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सीएम साहब ! प्रदेश के नंबर 01 अस्पताल में डॉक्टर हैं न नर्स, मरीज हो रहे परेशान

Rajeev Goswami

Publish: Sep 09, 2019 09:03 AM | Updated: Sep 08, 2019 23:35 PM

Bhind

08 डॉक्टर के भरोसे जिले की 17 लाख आबादी की स्वास्थ्य सेवाओं का जिम्मा

भिण्ड. सीएम साहब.. कहने को भिण्ड का जिला अस्पताल प्रदेश का नंबर 01 अस्पताल है बावजूद इसके 17 लाख की आबादी की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए महज 08 चिकित्सक पदस्थ हैं। इनमें से भी अक्सर दो चिकित्सक अवकाश पर होते हैं और दो न्यायालय की पेशियों में व्यस्त रहते हैं। शेष चार डॉक्टर के कंधों पर प्रति दिन 1500 से 1800 मरीजों को चिकित्सीय सलाह देने की जिम्मेदारी रहती है। अस्पताल में स्टॉफ की कमी का खामियाजा मरीजों को उठाना पड़ता है।

यहां बतादें कि आठ चिकित्सकों में पांच चिकित्सक ऐसे हैं जो निजी प्रक्टिस के चलते अस्पताल में अपनी सेवाएं नियमित रूप से नहीं दे पा रहे हैं। संबंधित अधिकारियों से इसकी शिकायत करने पर उनके पास एक ही बहाना होता है कि चिकित्सकों की कमी होने के कारण वर्कलोड अधिक है। इन्हीं चिकित्सकों से काम लेना है। यदि डॉक्टरों के खिलाफ कोई कार्यवाही करते हैं तो हम डॉक्टर कहां से लाएंगे। लिहाजा जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं का ढर्रा चिकित्सक व नर्सों की बेहद कमी के चलते लंबे अर्से से बिगड़ा हुआ है।

जिला अस्पताल में 168 नर्सों के पद स्वीकृत हैं। उनके स्थान पर महज 106 नर्सें ही सेवारत हैं। शेष 62 नर्सों की कमी लंबे समय से पूरी नहीं हो पा रही है। नर्सों की कमी का खामियाजा अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों को परेशानी उठाकर चुकाना पड़ रहा है।

नर्सिंग होम व क्लीनिक कर रहे कमाई

जिला अस्पताल में नर्स व डॉक्टर की कमी का सीधा फायदा शहर के प्राइवेट नर्सिंगहोम एवं क्लीनिक संचालकों को हो रहा है। नर्सिंगहोम और क्लीनिक पर जिला अस्पताल के ही कुछ चिकित्सक अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वहीं कुछ चिकित्सक अपना ही क्लीनिक संचालित कर मरीजों को अपने घर पर आने के लिए बाध्य कर रहे हैं। बेबश मरीज न केवल आर्थिक रूप से लुट रहा है बल्कि इधर से उधर भटकते हुए शारीरिक रूप से परेशानी का सामना करने को भी मजबूर है।

पहले पर्चा बनवाने फिर डॉक्टर के लिए करते हैं इंतजार

जिला अस्पताल में ओपीडी का आलम ये है कि हर रोज 1500 से 1800 मरीज आते हैं। इन मरीजों को पहले घंटों पर्चा बनवाने के लिए कतारबद्ध रहना पड़ता है उसके बाद संबंधित डॉक्टर के आने का इंतजार उसके केबिन के बाहर बैठकर करना पड़ता है। वहीं नर्सों की कमी के अस्पताल के विभिन्न वार्डों में भर्ती मरीजों को भी पर्याप्त सेवाएं नहीं मिल पा रहीं हैं। अक्सर इंजेक्शन या ड्रिप लगवाने के लिए मरीज के अटेंडर को नर्सों की तलाश में भटकते देखा जा सकता है। जिला अस्पताल के सीएमएचओ डॉ. जेपीएस कुशवाह के अनुसार सरकारी डॉक्टर निजी नर्सिंग होम में सेवाएं नहीं दे सकते बावजूद इसके कुछ चिकित्सक प्राइवेट अस्पतालों को अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

-लगातार कई साल से शासन को चिकित्सक तथा नर्सों की कमी के बारे में अवगत कराया जा रहा है। स्टाफ की कमी पूरी होते ही स्वास्थ्य सेवाएं भी बेहतर होंगी।

डॉ. अजीत मिश्रा, सविलि सर्जन जिला अस्पताल भिण्ड