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चंबल में आई बाढ़ ने तोड़ा सालों पुराना रिकॉर्ड, हर तरफ पानी ही पानी

Rahul Singh

Publish: Sep 18, 2019 13:22 PM | Updated: Sep 18, 2019 13:22 PM

Bhind

आर्मी, एसडीआरएफ व पुलिस के जवानों के अलावा होमागार्ड सैनिक भी लगे बचाव कार्य में
अटेर में ऊंचे स्थानों पर बनाए गए दो हेलीपेड, दो दिन में 1322 लोग रेस्क्यू कर पहुंचाए राहत शिविर में

भिण्ड। प्रदेश की चंबल नदी में लगातार बढ़ते जलस्तर ने पिछले 49 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। वर्ष 1971 में ऐसे हालात बने थे तब चंबल का जलस्तर 128.06 मीटर हो गया था। वर्ष 1996 में पुन: बने बाढ़ के हालात के दौरान चंबल का उफान 128.36 मीटर तक पहुंच गया था। वर्ष 2019 में 17 सितंबर की देर शाम तक 128.49 मीटर पहुंच गया है। अटेर क्षेत्र के कुल 44 गांव में पानी ही पानी नजर आ रहा है। यदि पानी 130 मीटर तक पानी पहुंचता है तो सेना द्वारा एयर लिफ्टिंग से रेस्क्यू चलाया जाएगा। इसके लिए हेलीपेड भी बनाकर तैयार कर लिए गए हैं।

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शाम छह बजे तक चौम्हों, कछपुरा, दिन्नपुरा एवं रमाकोट गांव से 713 ग्रामीणों को सुरक्षित बाहर निकालकर राहत शिविर में पहुंचाया गया है। सोमवार को 609 लोग बाढ़ प्रभावित गांवों से निकालकर शिविरों में ले जाए गए थे। गुजरे दो दिन के रेस्क्यू में 1322 लोग सुरक्षित शिविरों में पहुंचा दिए गए है जहां उनके लिए खाने-पीने की पूरी व्यवस्था प्रशासन द्वारा की गई है। शिविर में रह रहे अधिकांश लोगों को अपने पशुओं को लेकर चिंता सता रही है। ग्रामीणों को लाइफ जैकेट पहनाकर बोट के माध्यम से गांवों से निकालकर लाया जा रहा है। नावलीवृंदावन से शहीद की 100 वर्षीय मां लीलावती पत्नी गुरुदयाल यादव को सुरक्षित लाया गया।

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ज्ञानपुरा गांव से 20 परिवारों ने छोड़े घर
प्रशासन की चेतावनी के बाद ज्ञानपुरा गांव में निचले स्थान पर बने 20 घरों के लोग पानी बढऩे से पहले ही ऊंचे स्थानों पर पहुंच गए हैं। अधिकांश लोग अपने रिश्तेदारों के घर पहुंच गए हैं तथा कुछ परिवारों ने राहत शिविर में शरण ले ली है।

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पांच दिन से मंदिर में फंसे संतों को निकाला
पांच दिन से देवालय मंदिर के पास पागलदास आश्रम में फंसे संत अमरदास, संत ऋषि पाण्डे व एक अन्य व्यक्ति को सुरक्षित निकालकर लाया गया। वहीं एक छह माह के नौनिहाल को आर्मी मेजर डीएस लांबा स्वंय निकालकर लाए। मंगलवार को एक आर्मी की एक बोट की मशीन अचानक खराब हो गई। ऐसे में दूसरी मशीन को पानी में उतारा गया। देवेंद्र ङ्क्षसह लांबा ने डूबती हुई गाय को भी कछपुरा से निकाला।

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रमाकोट में फंसे हैं एक दर्जन लोग
सुरपुरा क्षेत्र के रमाकोट गांव में अभी भी एक दर्जन लोगों ने घर नहीं छोड़े हैं। उनका कहना है कि वह अपने पशुओं को मरने के लिए नहीं छोड़ सकते। जब तक उनके पशुओं को निकालने की व्यवस्था नहीं की जाती वह भी गांव में ही रहेंगे।


सिंध नदी में भी दिखा बाढ़ का असर
रौन जनपद पंचायत क्षेत्र के लोहचरा गांव में चंबल नदी के बढ़े जलस्तर का असर सिंध नदी में भी दिने लगा है। बताया जा रहा है कि संगम में पानी की अधिकता होने से सिंध का पानी का आगे नहीं बढ़ रहा है। जनपद पंचायत सीईओ रौन आलोक इटोरिया ने गांव का दौरान कर ग्रामीणों को ऊंचे स्थानों पर बसाहट करने की हिदायत दी। स्वास्थ्य विभाग की टीम को भी सूचित किया गया है। वहीं सिंध नदी के सहायक बरसाती नाले का पुल पूरी तरह से डूब जाने के कारण आवागमन बंद कर दिया गया है। ऐसे में कलेक्टर ने गांव के हालात पर हर पाल नजर रखने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए हैं।

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ये गांव बाढ़ प्रभावित घोषित
प्रशासन द्वारा ग्राम आकोन, बड़ापुरा, खिपोना, जमसारा, डांग सरकार, तरसोखर, नावलीहार, नखलौली, अटेर, रमा, जौरी अहीर, अर्जुनपुरा, कदौरा, बिजौरा, खैराहट, अहरौलीकाली, गड़ेर, चिलोंगा, कछपुरा, कनेरा, मघैरा, हिम्मतपुरा, परियाया, घिनौची, रैपुरा, चौम्हो, गढ़ा, चाचर, बड़ेरी, विण्डवा, सालिमपुर, सपाड़, बरही, बिंडवा, समन्ना, कुरौली, ज्ञानपुरा, काछुई, सांकरी, ख्वावली, जवई, नाहरा, कोषढ़ एवं नावली वृंदावन को बाढ़ प्रभावित घोषित कर दिया है। यदि पानी नहीं थमता तो इन गांवों से भी ग्रामीणों को निकालकर राहत शिविर पहुंचाया जाएगा।भिण्ड कलेक्टर छोटे सिंह ने बताया कि पांच गांव पूरी तरह से खाली करा लिए हैं। ग्रामीणों को राहत शिविर में पहुंचा दिया गया है। हर जगह हमारी नांव पहुंच गई हैं।