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बढ़ रहे एलर्जी और आंखों में जलन के रोगी, क्या है वजह जाने

Rajeev Goswami

Publish: Oct 22, 2019 12:12 PM | Updated: Oct 21, 2019 23:15 PM

Bhind

शहर में उड़ रही धूल, एलर्जी और आंखों की बीमारियों के मरीजों की बढ़ी संख्या

भिण्ड. शहर विकास के नाम पर सीवर एवं पेयजल लाइनों को बिछाने के लिए हो रही सडक़ों की खुदाई जनता के लिए मुसीबत बन गई है। जहां बारिश में पानी और कीचड़ से सडक़े लबालब हो जाती है। तो वहीं आम दिनों में उनसे उड़ती धूल आमजन के लिए मुसीबत बन जाती है। वहीं वातावरण धूल युक्त हो जाता है। ऐसे में शहर में श्वांस रोगियों को परेशानी होती है तो वहीं एलर्जी और आंखों में जलन के मरीज बढ़ जाते हैं।

खस्ताहाल सडक़ों, सीवर व पेयजल की पाइप लाइनें बिछाने के लिए जगह-जगह चल रही खुुदाई के चलते शहर की हवा विषाक्त होती जा रही है। पूरे शहर में गली मोहल्लों से लेकर मुख्य बाजारों की पक्की सडक़ों को खोदा जा रहा है, 24 घंटे धूल के गुबार उठते रहते हैं। यह धूल नाक व मुंह से सीधे शरीर के अंदर पहुंच रही है। धूल ने हवा को कई बुरी तरह प्रदूषित बना दिया है। भिण्ड का एयर क्वालिटी इंडेक्स लगभग 190 तक पहुंच गया है, जो खराब श्रेणी में आता है। इससे न केवल श्वासं के रोगी बढ़ रहे बल्कि एलर्जी एवं आंखों की जलन के मरीज भी बढ़ रहे हैं।

सीनियर मेडीसिन स्पेशलिस्ट डॉ राधेश्याम शर्मा कहते हैं, क्रॉनिक रेस्पीरेटरी डिसीज के लिए वायु प्रदुषण बड़ी वजह है। एलर्जी के कारण जुकाम, खांसी, अस्थमा, फेंफड़ों का कैंसर जैसी बीमारियां होने के खतरे रहते हैं। आंखों को भी नुकसान पहुंचता है।

धूल से सबसे अधिक असर ब‘चों पर पड़ता है। पहले से ही अस्थमा से पीडि़त रोगियों की हालत धूलयुक्त हवा से और गंभीर हो जाती है। धूल से बचने के लिए मास्क लगाकर चलना चाहिए।

पिछले दो दशकों से पर्यावरण संरक्षण के लिए काम कर रहे सोशल वर्कर महेन्द्र के मुताबिक मप्र रा’य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जुलाई 2018 में जारी रिपोर्ट के मुताबिक मप्र में सबसे शुद्ध हवा छिंदवाड़ा की है, एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) करीब &5 है। सबसे खराब हवा सतना की है, जहां का एक्यूआई करीब 200 है। प्रदेश के 4& शहरों की हवा प्रदूषित है। इनमें भिण्ड का तीसरा स्थान है। सबसे खराब स्थिति सतना, ग्वालियर, भिंड और श्योपुर की है। महेन्द्रभाई के अनुसार, इन शहरों का एक्यूआई 50 से अधिक है, जो मानव स्वास्थ्य के लिए अनुकूल नहीं है।

इन इलाकों में धूल की गंभीर समस्या

परेड चौराहा, लश्कर रोड, अटेर रोड, गौरी रोड, नई आबादी से नयापुरा मीट मण्डी रोड, बस स्टेण्ड, आर्यनगर रोड, हाउसिंग कॉलोनी, मीरा कालोनी, शास्त्री कालोनी, महेन्द्र नगर नबादा बाग, पुराना रेलवे स्टेशन, आलू मण्डी, भीमनगर चौराहा आदि ऐसे इलाके हैं, जहां हवा में धूल की मौजूदगी सबसे ’यादा है। डेढ़ साल से शहर की प्रमुख सडक़ों को सीवर योजना के लिए खोदा जा रहा है, अब पेयजल परियोजना के लिए सडक़ों की खुदाई शुरू हो गई है। पहले से ही शहर की अधिकांश सडक़ें घटिया निर्माण की वजह से उखड़ी हुई थीं, उस पर उन्हें खोद दिए जाने से धूल के गुबार उड़ते हैं। निर्माण एजेन्सियों द्वारा धूल को दबाने के लिए सडक़ों पर पानी का छिडक़ाव भी नहीं किया जा रहा।


-पिछले डेढ़ दो माह से अस्पताल में एलर्जी, श्वांस तथा खंासी जुकाम के रोगियों की तादाद में लगातार इजाफा हो रहा है। ओपीडी में आने वाले कुल रोगियों में से 15 से 20 प्रतिशत श्वसनतंत्र से जुड़ी बीमारियों के होते हैं।

डा आरएन राजौरिया, ईएनटी स्पेशलिस्ट, आरएमओ भिण्ड

-शहर में सीवर व पेयजल परियोजनाओं का काम चल रहा है। निर्माण कंपनियों को निर्देशित किया गया है कि वे खोदी गई सडक़ों को त्वरित गति से रेस्टोर करें। सडक़ों पर धूल न उड़े इसके लिए नियमित रूप से पानी का छिडक़ाव कराएं।

राजवीरसिंह भदौरिया, सिटी इंजीनियर नगर पालिका भिण्ड

-परेड चौराहा शहर का प्रमुख व्यावसायिक स्थल है। सीवर लाइन बिछाने वाली कंपनी ने पूरी सडक़ खोद दी है धूल के कारण दुकानदार व ग्राहक सभी परेशान हैं। जब तक सडक़ नहीं बनती तब तक वहां पानी का नियमित छिडक़ाव कराया जाना चाहिए।

उमेश पठान, रेडीमेड दुकानदार परेड चौराहा