स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

यहां स्च‘छता के लिए कर रहे जागरूक तो वहां जमा है कचरा

Rajeev Goswami

Publish: Oct 16, 2019 11:11 AM | Updated: Oct 15, 2019 23:26 PM

Bhind

सडक़ के किनारे डंप किया जा रहा कचरा

आलमपुर. स्व‘छता को लेकर जहां चहुंओर अलख जगाई जा रही है यहां तक कि आमजन को जागरूक करने के लिए सांसद लगातार जिले में पदयात्रा निकाली जा रही है तो वहीं आलमपुर में ट्रेचिंग ग्राउंड होने के बाद भी दो हेक्टेयर जमीन अनुपयोगी साबित हो रही है। स्थिति यह है कि रोड किनारे बड़े कचरे से जहां बदबू आ रही है तो वहां जमा हो रहे मवेशी और उड़ती धूल दुर्घटना का कारण भी बन भी रही है। फिर टै्रचिंग ग्राउंड के निर्माण में कोई रूचि नहीं ली जा रही है। जाने ऐसा क्यो हो रहा है।

नगर परिषद द्वारा कस्बे से निकलने वाले रोजमर्रा के कचरे के संग्रहण व निपटान के लिए ट्रेचिंग ग्राउण्ड का निर्माण नहीं कराया जा रहा है। 10 साल से ट्रेचिंग ग्राउण्ड के लिए चिह्नित जमीन अनुपयोगी पड़ी है। शहर का सारा कचरा सडक़ों के किनारे फेंका जा रहा है। लगभग डेढ़ दशक पूर्व जिला प्रशासन नगर परिषद को ट्रेचिंग ग्राउण्ड के लिए 2 हैक्टेयर जमीन हस्तांतरित कर चुका है। नगर परिषद द्वारा इस जमीन की कोई सुध नहीं लिए जाने व यहां ट्रेचिंग ग्राउण्ड न बनाए जाने के चलते जमीन पर झाड़ झंखाड़ उग आया है। शहर के सारे कचरे को आलमपुर-देभई-सिरसा-सेंवढ़ा मार्ग पर सडक़ के किनारे डाला जा रहा है जिससे आसपास सड़ांध फैली रहती है और आने जाने वालों को परेशानी हो रही है। नगर परिषद की तत्कालीन अध्यक्ष नर्मदा देवी कौरव के कार्यकाल में 2004 से 2009 के बीच में नगर में ट्रेचिंग ग्राउंड के लिए जमीन चिह्नित की गई थी। यहां तक कचरा वाहनों के आसानी से आवागमन के लिए डब्ल्यूबीएम रोड भी डाला गया था। नर्मदा देवी कौरव का कार्यकाल खत्म होने के बाद ट्रेचिंग ग्राउंड की कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली गई। वर्तमान में ट्रेचिंग ग्राउंड जंगल में तब्दील हो गया है।

ट्रेचिंग ग्राउंड के आसपास है सरकारी जमीन

शासकीय महाविद्यालय आलमपुर से तकरीबन 500 मीटर दूर स्थित ट्रेचिंग ग्राउंड के लिए कलेक्टर द्वारा 2 हेक्टेयर जमीन नगर परिषद को आवंटित की गई है। इस जमीन के आसपास लगभग 20 से 25 बीघा अतिरिक्त शासकीय भूमि है जिस पर कुछ लोगों ने कब्जा कर रखा है। वार्ड एक के मुहाने पर भी कचरा डंप किया जा रहा है जिससे आसपास रहने वालों को परेशानी हो रही है। कचरे के कारण वहां आवारा जानवरों का जमवाड़ा रहता है जिससे रोड से निकलने वाले राहगीरों को एक्सीडेंट का खतरा बना रहता है।

नगर से रोज निकलता है डेढ़ से दो टन कचरा

नगर से रोज लगभग डेढ़ से दो टन कचरा निकलता है। इसके वैज्ञानिक तरीके से निपटान (रीसायकलिंग आदि) का कोई इंतजाम नहीं है। कचरे को टे्रचिंग ग्राउण्ड तक न ले जाकर रास्ते में सडक़ के किनारे डंप कर दिया जाता है। नगर परिषद के सफाई बेड़े में तीन कचरा गाड़ी, दो ट्रैक्टर, 18 अस्थायी सफाई कर्मचारी, 11 स्थायी सफाई कर्मी हैं। शहर के कुल 15 वार्डों की अनुमानित आबादी लगभग 25 हजार है। नगरीय प्रशासन विभाग ने सभी नगरीय निकायों को कचरे के निस्तारण के लिए ठोस अपशिष्ठ प्रबंधन कार्यक्रम लागू करने के निर्देश दिए हुए हैं।

-मैंने आज ट्रचिंग ग्राउंड का निरीक्षण किया है। उसे व्यवस्थित किए जाने हेतु उपयंत्री को डीपीआर बनाने के निर्देश दिए हैं। ताकि शासन द्वारा समय.समय पर दिए गए निर्देशों का पालन किया जा सके।

अशोक यादव, सीएमओ नगर पंचायत आलमपुर