स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

हर घंटे एक-एक इंच घट रहा चंबल का जलस्तर

Rajeev Goswami

Publish: Sep 19, 2019 12:04 PM | Updated: Sep 18, 2019 23:33 PM

Bhind

तीसरे दिन रेस्क्यू कर निकाले 64 लोग, जो नहीं निकले उन्हें गांव में ही बांटा भोजन

कदोरा/फूप. चंबल में खतरे के निशान से नौ मीटर ऊपर तक पहुंचने के बाद बुधवार को पानी घटना शुरू हो गया। प्रति घंटा एक इंच की रफ्तार से पानी कम हो रहा है। हालांकि सेना और होमगार्ड जवानों का रेस्क्यू जारी रहा। बुधवार को तीसरे दिन सुबह से शाम तक कुल 64 लोगों को रेस्क्यू कर राहत शिविर में भिजवाया गया। जो लोग पशुओं के कारण अभी तक गांव नहीं छोड़ पाए थे उन्हें गांव में ही सेना के जवानों और समाजसेवी दलों द्वारा भोजन उपलब्ध कराया गया।

उल्लेखनीय है कि दिन्नपुरा, कोषढ़ की मढ़ैया, नखलौली की मढ़ैया, मुकुटपुरा, देवालय, रमाकोट आदि गांवों को पूरी तरह से खाली कराए जाने के बावजूद पांच फीसदी लोग अपनी मवेशियों की चिंता के कारण गांव नहीं छोड़ पाए। उनका कहना था कि वह अपने मवेशियों को कैसे छोड़ सकते हैं। हम भी भगवान के भरोसे यहीं पर अपने मवेशियों के साथ रहेंगे। ऐसे में जो परिवार

गांवों में अभी भी रुके हुए थे उनके खाने पीने की व्यवस्था भी प्रशासन द्वारा समय-समय पर कराई जा रही है। इधर राहत शिविरों में ठहराए गए करीब 1400 लोगों को भी रहने खाने की समुचित व्यवस्था की गई है।

मुकुटपुरा में बीमार बुजुर्ग महिला की मौत

बुधवार दोपहर करीब 12 बजे मुकुटपुरा में लंबे समय से बीमार चल रही 71 वर्षीय लीलावती पत्नी शोभाराम पुरवंशी की मौत हो गई। गांव चारों ओर पानी से घिरा होने के कारण उसका शव श्मशान तक नहीं ले जाया जा सका। लिहाजा गांव में घर के पास ही बुजुर्ग महिला का अंतिम संस्कार कर दिया गया।

प्रशासन ने दी 25 हजार की सहायता राशि

मुकुटपुरा गांव में बोट के जरिए पहुंचकर डिप्टी कलेक्टर ओंकार बढक़ोले, सिद्धार्थ पटेल एवं अटेर एसडीएम अभिषेक चौरसिया ने मृतका लीलावती के परिजनों को न केवल 25 हजार रुपए की नगद सहायता राशि प्रदान की बल्कि उसके क"ो घर को मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत पक्का बनाने की प्रक्रिया शुरू किए जाने के निर्देश भी संबंधित अधिकारियों को दे दिए।

रिश्तेदारों के घरों में ली शरण

ज्ञानपुरा गांव में पानी तीन से साढ़े तीन फीट तक भर जाने से डेढ़ दर्जन से ’यादा परिवार अपने-अपने घर छोडक़र रिश्तेदारों के पास शरण लेने पहुंच गए हैं। स्थानीय निवासी राजेश सिंह भदौरिया का आरोप है कि उनके गांव में किसी प्रकार का राहत कार्य प्रशासन की ओर से नहीं किया गया है। कलेक्टर, एसपी व अन्य अधिकारी आए और चले गए। गांव में न तो कोई टेंट लगाया गया है और ना ही घरों से सामान निकलवाने के लिए किसी प्रकार का रेस्क्यू चलाया गया है।

रास्ता खुलने में लगेंगे 4 से 5 दिन

कोटा बैराज से छोड़े गए पानी से चंबल नदी के अटेर क्षेत्र के जिन तटवर्ती गांवों में पानी भर गया है तथा रास्ते नदी का रूप अख्तियार कर चुके हैं। उन गांवों के मार्ग खुलने में पानी उतरने की शुरूआत होने के बावजूद चार से पांच दिन लगने की संभावना है। वहीं स्थिति सामान्य होने में समय और लग कसता है। हालात ये हैं कि राहत शिविर में रह रहे लोग वापस अपने घर जाने के लिए बैचेन हैं। कई परिवार अपने मवेशियों को भगवान भरोसे छोडक़र ही रेस्क्यू दल के साथ जान बचाकर निकल आए हैं।

बाढ़ पीडि़तों के लिए लगाया लंगर

भिण्ड. अटेर पूर्व विधायक हेमंत कटारे ने अपनी स्वयं की निधि से शासकीय हायर सेकंडरी स्कूल अटेर में बाढ़ पीडि़तों के लिए राहत शिविर लगाया है। जहां ग्रामीणों के खाने-पीने सहित अन्य व्यवस्था की गई थ्ीा।

कालेज में की पीडि़तोंं की व्यवस्था

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनोज दैपुरिया ने अपने रोशनलाल दैपुरिया कालेज में सुरपुरा क्षेत्र के बाढ़ पीडि़तों के लिए ठहरने की व्यवस्था की है। यहां पर करीब 200 बाढ पीडि़तों को रोका गया है।