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चबल में उफान, तटवर्ती इलाकों में बाढ़ के हालात

Rajeev Goswami

Publish: Aug 18, 2019 16:47 PM | Updated: Aug 18, 2019 16:47 PM

Bhind

खतरे के निशान से चार मीटर ऊपर बह रही चंबल, अगले 24 घंटे में और अधिक पानी बढऩे की आशंका, ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कवायद शुरू

कदोरा/अटेर. 16 अगस्त को कोटा बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद चंबल में लगातार पानी बढ़ रहा है। शनिवार दोपहर 3 बजे तक खतरे के निशान से जलस्तर चार मीटर ऊपर पहुंच गया है। ऐसे में प्रशासन ने एहतियात के तौर पर चंबल नदी किनारे बसे गांवों में अलर्ट घोषित कर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कवायद शुरू कर दी है।

चंबल नदी के उदी घाट पर 119.80 मीटर का निशान खतरे का है। शनिवार सुबह ७ बजे तक पानी खतरे के निशान को पार करते हुए 120.90 मीटर पर पहुंच गया था। जबकि लगातार पानी के बढऩे की स्थिति के चलते दोपहर 3 बजे तक 122.62 मीटर तक पहुंच गया है। लिहाजा चंबल के तटवर्ती गांवों में अलर्ट घोषित किए जाने के अलवा प्रशासन ने ग्रामीणों की सुरक्षित बसाहट के लिए जगह चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। शनिवार सुबह कलेक्टर छोटे सिंह, एएसपी संजीव कंचन, अटेर एसडीएम अभिषेक चौरसिया, लोक निर्माण विभाग अधिकारी केके शर्मा, अटेर एसडीओपी आरपी मिश्रा सहित एक दर्जन सदस्यीय प्रशासनिक अमला अटेर पहुंचा। जहां चंबल के तटवर्ती गांवों का जायजा लेने के उपरांत प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के इंतजामात किए जाने के निर्देश दिए।

कलेक्टर ने बाढ़ की स्थिति को देखते हुए अटेर में स्थानीय स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित कर दिया है। कंट्रोल रूम का प्रभारी तहसीलदार अटेर विजय कुमार को बनायाा गया है। राहत एवं बचाव दल को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

12 गांव घिरे हैं चंबल नदी में बढ़े पानी से, रास्ते हुए अवरुद्ध

चंबल नदी में तेजी से बढ़ रहे पानी के चलते तटवर्ती गांव कछपुरा, खैराट, नावलीवृंदावन, मुकुटपुरा, दिन्नपुरा, चिलोंगा, नखलौली की मढ़ैयन, कोषण की मढ़ैयन, रमा कोट, ज्ञानपुरा, सरायपुरा एवं थोना गांव के रास्ते अवरुद्ध हो गए हैं। इतना ही नहीं गांव के पहुंच मार्गों पर बनाए गए रपटे डूब जाने के कारण प्रशासन द्वारा पुलिस एवं राजस्व अमले को पहरे पर तैनात किया गया है ताकि पानी में धंसकर कोई भी जोखिम उठाकर न गुजरे।

50 से 55 हेक्टेयर जमीन पर खड़ी खरीफ फसल हुई बर्बाद

उल्लेखनीय है कि चंबल के तटवर्ती गांवों के अलावा चौम्हों, गड़ेर, तरसोखर, गढ़ा, बरही, रानीपुरा, ज्ञानपुरा, सांकरी आदि गांवों के किसानों की जमीन पर खड़ी खरीफ की फसल बाजरा, तिल एवं अरहर पूरी तरह से नष्ट हो गई है। स्थिति यह है कि खेत पानी से लबालब ही नहीं बल्कि फसलें तक डूब गई हैं। क्षेत्रीय किसानों की मानें तो चंबल किनारे पर स्थित करीब ५० से ५५ हेक्टेयर जमीन पर खड़ी फसल बाढ़ के पानी से प्रभावित हुई है।

रास्ते में पानी भरा होने के कारण दो गांवों तक नहीं पहुंच पाया प्रशासनिक अमला

कलेक्टर छोटे सिंह, एसडीएम अभिषेक चौरसिया एवं एएसपी संजीव कंचन के अलावा अन्य प्रशासनिक अमला जायजा लेने खैराहट व नावली वृंदावन गया था लेकिन रास्ते पानी से अवरुद्ध होने के कारण अधिकारियों को गांव के बाहर से ही लौटना पड़ा। आम रास्तों पर पानी तीन से चार फीट तक है। ऐसे में किसी भी दो या चार पहिया वाहन का गुजरना सहज नहीं हो पा है।

कॉलेज में पानी भरने से परीक्षा का समय और स्थान बदला

अटेर के शासकीय महाविद्यालय में शनिवार को बीएसडब्ल्यू की परीक्षा सुबह १०:३० बजे से होनी थी। लेकिन कॉलेज के सभी कक्ष में पानी भर जाने से न केवल परीक्षा का समय बदला गया बल्कि परीक्षा स्थल भी बदलना पड़ा। केंद्राध्यक्ष डॉ. चिमन प्रकाश विमल के मुताबिक परीक्षा का आयोजन सुबह 10:30 बजे के स्थान पर दो शिफ्ट में सुबह 11:30 बजे एवं दोपहर 3 बजे कराया गया। कुल 69 परीक्षार्थियों में से 40 परीक्षार्थी सुबह 10:30 बजे परीक्षा के लिए आमंत्रित किए गए, जबकि 29 दोपहर 3 बजे बुलाए गए। समय और स्थान के अचानक बदले जाने से पहली शिफ्ट में 20 एवं दूसरी शिफ्ट में 11 परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे। कॉलेज में उत्कृष्ठ विद्यालय में आयोजित की जा रही परीक्षा।

कलेक्टर के कहने पर गांव खाली नहीं कर रहे ग्रामीण

विदित हो कि चंबल के तटवर्ती गांवों में प्रशासन द्वारा गांव खाली कर ऊंचाई पर स्थित गांव के स्कूलों में बसाहट कर लेने के संबंध में मुनादी शुक्रवार को ही करवा दी गई थी। वहीं कलेक्टर छोटे सिंह ने स्वंय भी गांवों में जाकर ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचने की समझाइश दी। बावजूद इसके ग्रामीणों ने घर खाली नहीं किए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सामान इधर से उधर करने में बेहद परेशानी होती है। ऐसे में एक दिन और देखते हैं यदि पानी बढ़ा तो वह ऊंचे स्थानों पर पहुंच जाएंगे।

-बीहड़ में बसे गांवों में मुनादी करवा दी गई है। भले ही ग्रामीण ऊंचे स्थानों पर नहीं पहुंचे हैं लेकिन बचाव और राहत दलों की तैनाती करा दी गई है।

मुन्ना सिंह गुर्जर, भू अभिलेख अधीक्षक भिण्ड