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600 आशाओं को चुनौती साबित हो रहा मानदेय हासिल करना

Mahendra Kumar Rajore

Publish: Sep 07, 2019 09:00 AM | Updated: Sep 06, 2019 18:01 PM

Bhind

जच्चाओं की निगरानी के लिए मिलने वाले छह सौ रुपए पाने के लिए करना पड़ता है 9 महीने का इंतजार

भिण्ड. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) द्वारा शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में नियुक्त की गईं आशा, उषा तथा आशा सहयोगिनी आदि स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को जच्चाओं की निगरानी के एवज में प्रति जच्चा मिलने वाली 600 रुपए की प्रोत्साहन राशि पाने के लिए कई तरह के पापड़ बेलने पड़ रहे हैं। संबंधित विभागीय कर्मचारियों की हठधर्मी के कारण उनको यह मामूली सी प्रोत्साहन राशि उस वक्त भुगतान हो पाती है जब जच्चा को 9 माह बाद प्रसव हो जाता है। इसमें भी अगर किसी आशा से जच्चा व बच्चा की मॉनीटरिंग व तत्संबंधी जानकारी के दस्तावेजीकरण में कोई चूक हो गई तो प्रोत्साहन राशि देने से ही वंचित कर दिया जाता है।
ग्रामीण अंचल में नियुक्त आशा व आशा सहयोगिनी को अपने क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं पर प्रसव होने तक बारीकी से नजर रखनी पड़ती है। इस दौरान जच्चा को समय-समय पर टीके लगवाना, ब्लड जांच करवाना, वजन करवाना व अल्ट्रासाउंड करवाने जैसे अनेक समय आधारित कार्य संपन्न कराने होते हैं, ताकि जच्चा का सुरक्षित प्रसव हो और वह एक स्वस्थ शिशु को जन्म दे सके। आशाओं को दूरदराज के गांवों से गर्भवती महिलाओं को साथ लेकर हॉस्पिटल, नजदीकी उप स्वास्थ्य केंद्र व स्वास्थ्य केंद्र पर जाना पड़ता है और अपने पास उनके सारे परीक्षणों का अभिलेख संधारित करना पड़ता है। आठ व 9वें महीने के दौरान जच्चा की सारी गतिविधियों पर उन्हें बहुत ज्यादा ध्यान रखना पड़ता है। जब गर्भवती शिशु को जन्म दे देती है तब उनका काम खत्म होता है। सरकार इसी मॉनीटरिंग के लिए आशाओं को 600 रुपए प्रोत्साहन राशि देती है। इस दौरान अगर रिपोर्टिंग में लिखा-पढ़ी की कोई चूक हो गई और कागज सही समय पर बनाकर प्रस्तुत नहीं हो पाए तो यह राशि नहीं मिलती। अटेर विकासखण्ड की आशा मीना जलपुरा, सुनीता जमहोरा, केशकली रमटा, अनीता उदन्नखेड़ा, अरुणा बलारपुरा, रानी प्रतापपुरा और राजकुमारी आदि का कहना है कि विभागीय कर्मचारी उन्हें प्रोत्साहन राशि देने में अड़ंगे लगाते हैं, जिससे उनको समय पर भुगतान नहीं हो पाता। यहां बता दें कि जिले में आशा, आशा सहयोगिनी व उषाओं की कुल संख्या 1600 है। अटेर विकासखण्ड में 600, गोहद में 350, मेहगांव में 300, लहार में 200 तथा भिण्ड शहर में 50 उषाएं कार्यरत हैं।
गांवों में आशाओं को करने होते हैं ये काम
क्षेत्र में सैक्स रेशियो की गणना करना
गांव में गर्भवती महिलाओं का पता लगाना
जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाना
जच्चा का नियमित टीकाकरण करवाना
समय-समय पर आरोग्य केंद्र में बैठना
डिलीवरी के दौरान प्रसूता के साथ 24 घंटे साथ रहना
डिलीवरी के बाद शिशु के स्वास्थ्य पर 42 दिन तक नजर रखना
कथन
आशा, आशा सहयोगिनी व उषा मामूली मानदेय पर काम करती हैं। उन्हें मानदेय के भुगतान में अनावश्यक रूप से परेशान किया जाता है।
लक्ष्मी कौरव, प्रतिनिधि, आशा उषा सहयोगिनी संगठन
स्वास्थ्य विभाग के पास आशा, सहयोगिनी व उषाओं के मानदेय का कोई पुराना भुगतान लंबित नहीं है। तीन दिन पहले ही अटेर विकासखंड के लिए 15 लाख रुपए के पेंडिंग बिलों का भुगतान किया गया है।
डॉ. जेपीएस कुशवाह, सीएमएचओ भिण्ड