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700 वर्षों से निभाई जा रही है रास की परम्परा

Durgeshwari Sharma

Publish: Oct 16, 2019 14:40 PM | Updated: Oct 16, 2019 14:40 PM

Bhilwara

काछोला। भीलवाड़ा जिले में स्थित काछोला के निकट रूपपुरा गांव में भगवान नरसी मंदिर प्रांगण में मंगलवार को रास मेले का आयोजन हुआ। जिसमें रूपरा समाज के वैष्णव समाज के लोग शामिल हुए। उल्लेखनीय है कि काछोला भैरूपुरा में 700 वर्षों से चली आ रही परम्परा आज भी वैष्णव परिवार द्वारा कायम है। The Raas tradition has been alive for 700 years in Bhilwara

काछोला। भीलवाड़ा जिले में स्थित काछोला के निकट रूपपुरा गांव में भगवान नरसी मंदिर प्रांगण में मंगलवार को रास मेले का आयोजन हुआ। जिसमें रूपरा समाज के वैष्णव समाज के लोग शामिल हुए। उल्लेखनीय है कि काछोला भैरूपुरा में 700 वर्षों से चली आ रही परम्परा आज भी वैष्णव परिवार द्वारा कायम है। The Raas tradition has been alive for 700 years in Bhilwara

सदियों से चली आ रही रास मेले की परम्परा आज भी काछोला भैरूपुरा में कायम है। काछोला में मंत्र परिवार द्वारा इस रास मेले का आयोजन किया जाता है। विधि विधान एवं भगवान के जयकारों के साथ किया रास मेला शुरू होता है।
कलाकार भगवान श्री राम लक्ष्मण सीता हनुमान सहित आदि रासलीला का वर्णन करते हैं। भगवान कृष्ण की लीला मथुरा तक भगवान का बखान किया जाता है। कलाकार अलग-अलग प्रस्तुति के माध्यम से रास मेले में भगवान की पौराणिक कथा एवं पारम्परिक लोकगीतों के साथ मंचन करते हैं। मंदिर पुजारी द्वारा भगवान की विशेष पूजा —अर्चना की जाती है। रूपपुरा कस्बे में राजकीय मेले पर कस्बे में विद्युत सज्जा एवं विभिन्न आयोजन होते हैं। The Raas tradition has been alive for 700 years in Bhilwara