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सम्मेलन में बोले प्रोफेसर, गांधी की आलोचना भी जरूरी

Jasraj Ojha

Publish: Sep 21, 2019 11:40 AM | Updated: Sep 21, 2019 11:40 AM

Bhilwara

राष्ट्र जितना संकीर्ण होगा, वाद उतना ही मजबूत होगा

भीलवाड़ा. एमएलवी कॉलेज में महात्मा गांधी की १५०वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. सुब्रतो मुखर्जी ने कहा, भारत ही नहीं, दुनिया में औपनिषवाद के विरुद्ध संघर्ष का कोई भी इतिहास गांधी के बिना पूरा नहीं हो सकता। गांधी को उनकी समग्रता से समझा जाना चाहिए। गांधी की आलोचनात्मक व्याख्या भी जरूरी है। उधर, गांधी शांति प्रतिष्ठान नई दिल्ली के अध्यक्ष कुमार प्रशांत ने कहा, कश्मीर में अब भी किसी को पता नहीं है कि धारा ३७० क्या है। इसके बारे में केवल उनको पता है, जो इसकी मदद से सत्ता में गए या मुश्किल में रहे। मैं एक दर्जन बार कश्मीर गया। वहां कभी दो झंडे नहीं देखे। दो झंडे केवल विधानसभा या मंत्रियों की गाडि़यों पर ही थे। कुछ लोगों ने नया नारा दिया है 'नया कश्मीर बनाएंगे सबको गले लगाएंगे।Ó मैं कहता हूं पहले दिल लगाओ। राष्ट्र जितना संकीर्ण होगा, वाद उतना ही मजबूत होगा।

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ये भी बोले

राजस्थान विश्वविद्यालय के प्रो. राजीव गुप्ता ने महात्मा गांधी की अहिंसा को मिलिटेंट नॉन वॉयलेंस की संज्ञा दी। उन्होंने कहा, अहिंसक, निर्भय, दृढ़तापूर्ण संघर्ष ही गांधीजी की अहिंसा का आधार है।

मोहनलाल सुखाडि़या विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष संजय लोढ़ा ने कहा, गांधी की प्रयोगशाला ही उनकी विशिष्टता है। उनके विरोधी बार-बार उनकी हत्या करने की कोशिश करते हैं, लेकिन वे विराट होकर उभरते हैं।