स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

दवा भंडार को जरूरी लाइसेंस का...

Pramod Kumar Verma

Publish: Sep 12, 2019 04:02 AM | Updated: Sep 11, 2019 22:05 PM

Bharatpur

भरतपुर. दवा उपभोक्ता भंडार की दुकान का डी-फार्मा लाइसेंस जारी करने में देरी का खामियाजा सेवानिवृत व सेवारत कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है।

भरतपुर. दवा उपभोक्ता भंडार की दुकान का डी-फार्मा लाइसेंस जारी करने में देरी का खामियाजा सेवानिवृत व सेवारत कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है।

आरबीएम अस्पताल परिसर में जिला सहकारी उपभोक्ता थोक भंडार की एक दुकान पर करीब डेढ वर्ष से ताला लगा है, जिससे पेंशनर व सेवारत कर्मचारियों को दवाई नहीं मिलने की स्थिति में एनओसी के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है।

कहा जाता है कि यह कैश काउंटर की दुकान थी, जहां से सेवानिवृत और सेवारत कर्मचारी दवाई नहीं मिलने पर एनओसी बनवाकर अन्य दुकान से खरीदकर विभाग से मेडिकल का भुगतान उठाते थे। लेकिन लाइसेंसीधारी व्यक्ति के नहीं होने से दुकान का ताला लग गया।

ताला लगने की स्थिति लगभग डेढ वर्ष से है, जो सहकारिता विभाग के ढुलमुल रवैये को दर्शा रही है। जबकि, जिले में लगभग 25 हजार पेंशनर और सैंकड़ों कर्मचारी हैं। इनकी सुविधा के लिए जनाना अस्पताल में दो और तीन दुकान आरबीएम में खोली गई। इनमें आरबीएम में दो संचालित हैं, वहीं एक पर ताला लगा है।


इससे यहां पर खुली दुकानों के एक-एक साप्ताहिक अवकाश भी तरस गए हैं। महीनों से ये दुकानें एक दिन के लिए भी बंद नहीं की गईं। इस कारण पेंशनर, सेवारत कर्मचारियों को दवा नहीं मिलने की स्थिति में एनओसी बनाने का भी भार अधिक हो गया।

इसलिए इन दुकानों पर भीड़ देखी जा सकती है, जिससे उपभोक्ताओं को परेशानी आती है। कहा जाता है कि बंद दुकान को संचालित करने के लिए डी-फार्मा का लाइसेंसी सहकारिता की ओर से जारी किया जाता है फिर भी लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में देरी गई। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है।

सहकारी उपभोक्ता थोक भंडार भरतपुर के महाप्रबंधक रविंद्र सोनी का कहना है कि आरबीएम अस्पताल परिसर में दवा उपभोक्ता भंडार की एक दुकान बंद है। पेंशनर्स की आवश्यकता को देखते हुए दुकान को शीघ्र चालू कर दिया जाएगा। इसके आदेश भी कर दिए हैं।