स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

अधिकारी तो दूर भाजपा-कांग्रेस में से किसी भी पार्टी के जनप्रतिनिधियों ने नहीं सुनी फरियाद, 70 साल से ग्रामीण भोग रहे वनवास

Laxmi Narayan Dewangan

Publish: Aug 19, 2019 07:10 AM | Updated: Aug 19, 2019 00:23 AM

Bemetara

जिले के ग्राम झाझाडीह में सड़क, बिजली, पानी एवं स्वास्थ्यगत सुविधाओं की कमी है। गांव में राशन दुकान भी नहीं है। बारिश के दिनों में आवागमन के लिए बारहमासी सड़क नहीं है। मिडिल, हाईस्कूल एवं हायर सेकंडरी की पढ़ाई के लिए नवागढ़ या दूसरे गांव जाते हैं।

बेमेतरा. विकास के दावों की पोल खोलती तस्वीर जिले के ग्राम झाझाडीह में नजर आ रही है, जहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। रहवासियों की स्थिति बिल्कुल बीहड़ इलाके की तरह नजर आती है। जहां आना-जाना किसी मुसीबत से कम नहीं है। गांवों को आज तक विकास से दूर क्यों रखा गया है। इस पर भी सवाल उठने लगे हैं। बारिश के दिनों में ग्रामीण वनवास की तरह दिन काटते हैं। यानी जरूरत पर ही गांव से बाहर निकलते हैं। सबसे अधिक दिक्कत विद्यार्थियों को उठानी पड़ती है, जो मिडिल, हाईस्कूल एवं हायर सेकंडरी की पढ़ाई के लिए नवागढ़ या दूसरे गांव जाते हैं।

कथित विकास की सच्चाई दिखा रही झाझाडीह की बदहाली
जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर रामपुर पंचायत के आश्रित ग्राम झाझाडीह की बदहाली कथित विकास की सच्चाई दिखाने वाली है। गांव में विकास के नाम पर एक प्राथमिक शाला और एक आंगनबाड़ी है। इसके अलावा अन्य सुविधाएं यानी सड़क, बिजली, पानी एवं स्वास्थ्यगत सुविधाओं की कमी है। सबसे अहम गांव में राशन दुकान भी नहीं है। ग्रामीणों को गांव से चार किलोमीटर दूर ग्राम रामपुर जाकर राशन लाना पड़ता है। बारिश के दिनों में आवागमन के लिए बारहमासी सड़क नहीं है। ऐसे में उन्हें राशन लाना पहाड़ तोडऩा जैसा काम है।

87 साल की उम्र में न पेंशन मिल रहा, न राशन
ग्राम की सबसे उम्रदराज महिला जामुन बाई कहती है कि वह उम्र के इस पड़ाव में अकेली है। परिवार में एक बेटी है। बेसहारा होने के बाद भी उसे पेंशन व राशन का लाभ नहीं मिल रहा है। यदि पेंशन और राशन मिल जाए तो उसके जीवन की बड़ी कठिनाई दूर हो सकती है। जामुन बाई सड़क बनाने को सबसे अहम जरूरत बताती हैं। अपनी छलकती आंखों को रोककर बताया कि उसके भतीजे की मौत भी सड़क नहीं होने से हुई। अजीज को उपचार के लिए बाहर ले जा रहे थे कि रास्त में ही उसकी मौत हो गई। खराब सड़क के कारण आज तक गांव में संजीवनी वाहन नहीं पहुंचा है। ग्रामीणों ने बताया कि इसी तरह गांव के अन्य युवक सुरेंद्र टंडन की मौत उपचार के लिए बाहर जाते समय हुई थी। दोनों घटना केवल एक वर्ष के भीतर हुई।

हमर गांव के मनखे मन बर सपना होगे पक्का सड़क
गांव के 70 वर्षीय वृद्ध मंगला बारले बताते हैं कि उसने कभी इस सड़क को बनते नहीं देखा है। गांव में पक्की सड़क का आना उनके लिए सपना हो चुका है, उसके और भी साथी हैं, जो यही सेाचते है कि उनके लिए पक्की सड़क का आना किसी बड़े सपने की तरह है। गांव में किराना दुकान चलाने वाले कन्हैयादास ने बताया कि सड़क की वजह से गांव में फेरी वाले या दीगर सामान बेचने वाले नहीं आते हैं। सड़क नहीं होने से गांव का कारोबार प्रभावित होता है। कामकाज को लेकर भी दिक्कत होती है।

गांव के बच्चे बाहर जाते हैं, कई पढ़ाई छोड़ चुके
ग्रामीण धुमनलाल टंडन व तिलेयवर ने बताया कि गांव में केवल कक्षा 5वीं तक की पढऩे के लिए स्कूल है। इसके बाद बच्चों को दूसरे गांव जाना पड़ता है। गांव के विद्यार्थी इन पगडंडी से होकर ग्राम रामपुर जाते हैं। छोटे बच्चों को भी पैदल जाना पड़ता है। इस मार्ग पर साइकिल चलाना मुश्किल हो चुका है। ऐसे मे सरस्वती साइकिल योजना के तहत मिली साइकिल भी बेकार हो रही है। कक्षा 9वीं से लेकर 12वीं तक के विद्यार्थियों को 8 किलोमीटर दूर नवागढ़ जाना पड़ता है।

गांव से राशन दुकान 3 किलोमीटर और अस्पताल 7 किलोमीटर है दूर
गांव में एक भी राशन दुकान नहीं होने के कारण ग्राम झाझाडीह के ग्रामीणों को राशन के लिए 3 किलोमीटर की दूर तय कर रामपुर जाना पड़ता है। यही नहीं यदि गांव में किसी की तबियत खराब हो जाए तो उसे अस्पताल ले जाने के लिए 7 किलोमीटर की दूरी तय करके साजा ले जाना पड़ता है। आसपास में कहीं भी चिकित्सा की सुविधा नहीं मिल पाती। जिसके कारण मरीजों को काफी दिक्कत होती है। सड़क की सुविधा नहीं होने के कारण यहां एंबुलेंस भी नहीं आ पाती। ज्ञात हो कि गांव से समीपस्थ पक्की सड़क की दूरी लावातारा 4 किलोमीटर, हेमाबंद 4 किलोमीटर, रामपुर 3 किलोमीटर और ग्राम धनगांव 6 किलोमीटर की दूरी पर है। जहां तक ग्रामीणों को पैदल ही जाना पड़ता है।

शादी हो जाने के बाद डिलीवरी कराने गांव में नहीं आना चाहती बेटियां
520 आबादी वाले इस गांव के लोग दोहरी समस्या है। ग्राम पंचायत रामपुर की सरपंच माना बाई टंडन, पुष्पा टंडन, सीमा टंडन के अनुसार गांव में सबसे अधिक विकट स्थिति किसी के बीमार होने या फिर डिलीवरी के दौरान होती है। सड़क नहीं होने से संजीवनी या महतारी एक्सप्रेस के वाहन गंाव में नहीं पहुंच पाते हैं। डिलीवरी के दौरान बहुएं अपने मायके चली जाती हैं पर बेटी कभी डिलीवरी करीब होने की स्थिति में मायके नहीं आती और इसी तरह की कई समस्याओं का सामना ग्रामीण दशकों से करते आ रहे हैं। गांव मेें पेयजल संकट भी है। गांव में 7 हैंडपंप हैं, जिसमें से 5 खराब है। सिर्फ दो हैंडपंप से गुजारा चल रहा है। गांव में शासन ने एक भी पावर पंप नहीं लगाया है।

मुझे जानकारी नहीं गांव में टीम भेजूंगा - सीईओ
बेमेतरा जनपद पंचायत सीईओ दीपक ठाकुर ने बताया कि उसे गांव में सड़क नहीं होने की जानकारी नहीं है। इस तरह की स्थिति है तो इंजीनियर को भेज कर प्रकरण तैयार करवाता हूं। रामपुर पंचायत की सरंपच मानाबाई टंडन के प्रतिनिधि कमिश्नर टंडन ने बताया कि गांव की स्थिति को लेकर कई आवेदन दिए गए थे, जिसका आज तक निराकराण नहीं किया गया है। ग्रामीणों को केवल आश्वासन मिला है। सड़क नसीब नहीं हई है।