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डोर टू डोर नशा मुक्ति के नाम अवैध उगाही, नाराज ग्रामीणों ने कलेक्टर से कहा पद का दुरुपयोग कर रहे SDM, मैडम कुछ तो कीजिए

Dakshi Sahu

Publish: Sep 17, 2019 15:42 PM | Updated: Sep 17, 2019 15:42 PM

Bemetara

वैध उगाही के विरोध में बेरला के करीब 200 ग्रामीण सोमवार को कलक्टोरेट पहुंचे और बेरला एसडीएम दुर्गेश वर्मा के खिलाफ शिकायत कर कार्रवाई की

बेमेतरा. बेरला ब्लॉक के ग्रामीण क्षेत्रों में 30 रुपए सेवा शुल्क के एवज में डोर टू डोर टैग लगाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस अवैध उगाही के विरोध में बेरला के करीब 200 ग्रामीण सोमवार को कलक्टोरेट पहुंचे और बेरला एसडीएम दुर्गेश वर्मा के खिलाफ शिकायत कर कार्रवाई की

मांग की है। ग्रामीणों के प्रतिनिधि राहुल टिकरिहा ने कलेक्टर (Bemetara collector) शिखा राजपूत तिवारी को बताया कि बेरला एसडीएम अपने पद का दुरुपयोग करते हुए राज्य सरकार के आदेश बगैर अंबिकापुर के एनजीओ मानव सेवा समिति को हम सब ने ठाना है, नशा मुक्त छत्तीसगढ़ बनाना है, नारा अंकित टैग को हर घर में लगाने के आदेश जारी किए। इस आदेश की एक-एक प्रति 31 मई को बेरला जनपद एवं संबंधित संस्था को जारी की गई। इसके बाद बेरला जनपद ने सभी ग्राम पंचायतों को कोटवार के माध्यम से मुनादी कराकर घर-घर में संस्था की ओर से टैग लगाने के आदेश जारी किए। टैग लगाने के एवज में संस्था की ओर से 30 रुपए शुल्क निर्धारित किया गया है। बेरला ब्लॉक में करीब 50 हजार राशनकार्डधारी परिवार हैं। इस तरह शत् प्रतिशत सर्वे की स्थिति में करीब 15 लाख रुपए की अवैध उगाही ग्रामीणों से की जा रही थी।

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इन 23 एसडीएम ने संस्था को टैग लगाने की दी अनुमति
जानकारी के अनुसार बीते 6 सालों में संबंधित संस्था को प्रदेश के 23 अनुविभागीय अधिकारियों ने इस तरह का टैग लगाने के लिए अनुमति पत्र दिया है। जिसमें रायगढ़ एसडीएम, बिलाईगढ़, बैकुंठपुर, अंबिकापुर, धरमजयगढ़, कुरुद, कवर्धा, डोंगरगढ़, सीतापुर, बगीचा, मुंगेली, राजपुर, खैरागढ़, पत्थलगांव, रामानुजगंज, सक्ती, सारंगगढ़, नगरी, मस्तुरी, खरसिया, घरघोड़ा अनुविभाग शामिल हंै।

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नहीं जारी किया कोई आदेश
राज्य सरकार की ओर से रेवेन्यू विभाग को कोई आदेश जारी नहीं हुए हैं। इसके बावजूद बेरला एसडीएम ने अपने स्तर पर संबंधित संस्था की ओर से टैग लगाने का आदेश जारी कर दिए। मामला उजागर होने के बाद से अधिकारी गोलमोल जवाब दे रहे हैं। ऐसी स्थिति में रेवेन्यू विभाग की ओर से इस तरह के आदेश जारी करने से संबंधित अधिकारी की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। यहां बेरला एसडीएम ने कलेक्टर को सूचना देना भी उचित नहीं समझा।

समाजसेवी संस्था अंकुर के अध्यक्ष राहुल टिकरिहा के अनुसार शासन की ओर से जांच कराए जाने पर करोड़ों रुपए का घोटाला उजागर होगा, क्योकि इस संस्था को प्रदेश के 23 अनुविभागीय अधिकारियों ने टैग लगाने की अनुमति दी है। संस्था की ओर से बीते 6 साल में लाखों घरों में टैग लगाया गया है। टैग लगाने के एवज में प्रत्येक परिवार से 20-30 रुपए सेवा शुल्क के रुपए में वसूले गए हैं। इस तरह प्रदेश के लाखों परिवारों से करोड़ों रुपए की अवैध वसूली की गई है।

सोमवार को शिकायत के लिए पहुंचे ग्राम सुरहोली, खर्रा, कुम्ही, मुढ़पार, बेलौदीकला, सोढ़, बहेरा, बोरिया, करेली, देवरी, सरदा, आंदू के ग्रामीणों ने बताया कि राशन कार्ड कटने का भय दिखाकर संस्था की ओर से घरों में टैग लगाया जा रहा है। ग्रामीणों को फर्जी रसीद देने का मामला भी सामने आ रहा है। जिसमें संस्था का नाम अंकित भी नहीं है।

सीधी बात-एसडीएम बेरला दुर्गेश वर्मा
Q संस्था से मिलीभगत कर ग्रामीणों से अवैध उगाही के आरोप लग रहे हैं।
A. सारे आरोप निराधार हैं, इससे पहले इस संस्था को प्रदेश के 23 अनुविभागीय अधिकारियों ने टैग लगाने की अनुमति दी है।
Q. आर्थिक लाभ के लिए संस्था को अनुमति देने के आरोप हंै।
A नशामुक्ति, स्वच्छता, भू्रणहत्या व बालिका शिक्षा के प्रति ग्रामीणों को जागरुक करने के उद्देश्य से संस्था को अनुमति दी गई है, इसमें आर्थिक लाभ लेने के आरोप निराधार हैं।

सीधी बात- कलेक्टर शिखा राजपूत तिवारी

Q. बेरला के ग्रामीणों ने एसडीएम पर अवैध उगाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है।
A. मामले की जांच के आदेश दिए गए हंै, संयुक्त कलेक्टर को जांच अधिकारी बनाया गया है।
Q एसडीएम ने पद का दुरुपयोग कर संस्था को टैग लगाने का आदेश जारी किए।
A. बेरला एसडीएम के आदेश को तत्काल निरस्त किया गया है।
Q. मामले में क्या कार्रवाई करेंगे।
A. जांच अधिकारी से एक दिन में रिपोर्ट मांगी है, रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।