स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

फसल का हाल जानने खेतों में उतरे कृषि वैज्ञानिक, 7 दिन में अच्छी बारिश नहीं हुई तो फसल बचाना होगा मुश्किल

Laxmi Narayan Dewangan

Publish: Jul 19, 2019 07:15 AM | Updated: Jul 19, 2019 00:08 AM

Bemetara

जिले में अवर्षा की स्थिति, कृषि वैज्ञानिकों ने किया गांव का दौरा, बोनी कर चुके किसानों को घबराने की जरूरत नहीं, तीन-चार दिनों में अच्छी बारिश होने की है उम्मीद

बेमेतरा. जिले में एक सप्ताह से अवर्षा की स्थिति है। कृषि विज्ञान केंद्र बेमेतरा के वरिष्ठ वैज्ञानिक आर मोदी और कृषि विभाग के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से गांवों में जाकर सर्वे किया। वे बेमेतरा विकासखंड के ग्राम खंडसरा, झाल, ढोलिया पहुंचे। धान फसल की बोनी लगभग पूर्ण हो चुकी है। वर्षा आधारित धान के खेतों में फसल स्थिति का जायजा लेने पर पाया कि जिन खेतों में समय पर बोआई की गई, वहां फसल स्थिति ठीक है। आगामी एक सप्ताह के भीतर यदि अवर्षा की स्थिति रहती है, तो फसल के बढ़वार पर विपरित प्रभाव पडऩे की संभावना है।

जिले में 8-10 दिन से बढ़ गई थी सूरज की तपिश
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक आर मोदी ने बताया कि जिले में आठ से दस दिनों से अवर्षा की स्थिति है। उन्होंने अवगत कराया कि धान की मध्यम अवधि की किस्मों की बोआई समय पर जिन खेतों में की गई है, वहां अवर्षा से फसल बढ़वार पर अभी प्रभावित नहीं हुई है। अभी धान की फसल की अवस्था लगभग 20 से 25 दिन की है। साथ ही मृदा में सामान्य प्रतिशत के लगभग नमी बनी हुई है। उन्होंने बताया कि तीन-चार दिन के बाद मौसम विभाग के पुर्वानुमान अनुसार जिले में अच्छी वर्षा होने की संभावना है।

बारिश के बाद खेतों में पोटाश छिड़कने की दी सलाह
उप संचालक कृषि एचएस राजपूत ने किसानों को सलाह दी कि वर्षा के बाद कृषक अपने खेतों में पोटास उर्वरक निर्धारित मात्रा में उपयोग करें। क्योंकि पोटाश तत्व से पौधों में सूखा सहनशीलता की क्षमता में वृद्वि होती है। साथ ही नत्रजन (यूरिया) का स्पलिट डोज निर्धारित मात्रा को एक बार में खेत में ना डालकर दो से तीन बार में फसलों को देना। निरीक्षण दल ने धान फसल के साथ-साथ अरहर एवं सोयाबीन फसल का भी निरीक्षण किया। यह पाया गया कि अरहर एवं सोयाबीन फसल वर्तमान में अपने निर्धारित वानस्पतिक बढ़वार की स्थिति पर है।

मैदानी अमला फील्ड की लगातार करे निगरानी
कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने अवर्षा की स्थिति में कृषि एवं संबंधित विभाग के अधिकारियों की बैठक ली। मानसून के विलंब और अवर्षा की स्थिति की समीक्षा की। राज्य में अब तक 304 मिलीमीटर बारिश हुई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 17 प्रतिशत कम है। प्रदेश के 8-9 जिले में 80 प्रतिशत से कम बारिश हुई है। कृषि मंत्री ने ऐेसे जिलों में बीज और उर्वरक के भंडारण व वितरण पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। मैदानी अमले को लगातार फील्ड में निगरानी और तत्काल कार्रवाई करने कहा। उन्होंने अवर्षा से प्रभावित क्षेत्रों के लिए तैयार आकस्मिक कार्ययोजना के अनुसार दलहन, तिलहन एवं कम वर्षा की धान की किस्मों की व्यवस्था करने कृषि एवं बीज निगम के संचालक को निर्देश दिए। कृषि, उद्यानिकी, मत्स्य एवं पशुपालन विभाग के जिलास्तरीय अधिकारियों और मैदानी अमले को भी नियमित रूप से क्षेत्र में चौपाल, गोष्ठी,परिचर्चा करने एवं कृषि संबंधी तकनीकी सलाह देने के निर्देश दिए।

15 दिन बाद हुई बारिश, किसानों को अभी नहीं मिली राहत
पूरे 15 दिन तक रूठे बादल सावन के दूसरे दिन गुरुवार की शाम बरस पड़े। मात्र आधे घंटे हुई बारिश से लोगों ने गर्मी और उमस से थोड़ी राहत तो महसूस की,लेकिन किसानों के लिए यह बारिश राहत लेकर नहीं आई। बेमेतरा में अब तक औसत से 47 फीसदी कम बारिश हुई है। यहां तो अब तक मात्र 199.3 मिमी ही बारिश हो सकी। जबकि यहां अब तक 374.3 मिमी बारिश होनी थी। प्रदेश में सबसे कम बारिश वाले जिले में बेमेतरा दूसरे स्थान पर है। वही बालोद में अब तक सामान्य से 37 फीसदी कम बारिश हुई है। मौसम विभाग ने कहा है कि बंगाल की खाड़ी से बने चक्रवात का असर हालांकि दो से तीन दिनों तक रहेगा जिससे आने वाले समय में बारिश की उम्मीद है।

सिस्टम के असर से 24 घंटे में हो सकती है बारिश
मौसम वैज्ञानिक एचपी चंद्रा ने बताया कि पश्चिम बंगाल से बना यह सिस्टम अभी छत्तीसगढ़ में सक्रिय रहेगा। इसकी ऊंचाई 7.6 तक होने की वजह से प्रदेश के कई हिस्सों में अगले 24 घंटे में बारिश भी होगी और 30 से 40 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से हवा भी चलेगी। उन्होंने कहा कि अभी जुलाई को बीतने में 13 दिन है और उम्मीद है कि लगातार सिस्टम बनने से इन दिनों अच्छी बारिश होगी।