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खाद्य अधिकारियों ने एक जगह पर बैठे-बैठे कर दिया 70 स्कूलों के मध्यान्ह भोजन के गुणवत्ता की जांच

Laxmi Narayan Dewangan

Publish: Oct 22, 2019 07:10 AM | Updated: Oct 21, 2019 22:52 PM

Bemetara

जिला मुख्यालय में सोमवार को जागरूकता शिविर की आड़ में खाद्य सुरक्षा विभाग ने मध्यान्ह भोजन संचालन करने वाले समूहों को बुलाकर मध्यान्ह भोजन के रॉ-मटेरियल की सैंपल जांच की।

बेमेतरा . जिला मुख्यालय में सोमवार को जागरूकता शिविर की आड़ में खाद्य सुरक्षा विभाग ने मध्यान्ह भोजन संचालन करने वाले समूहों को बुलाकर मध्यान्ह भोजन के रॉ-मटेरियल की सैंपल जांच की। विभाग द्वारा स्कूलों में जाकर फूड टेस्ट करने के बजाए शिविर लगाकर एक ही जगह पर बैठे-बैठे सैंपल जांच करने पर सवाल उठने लगे हैं। जिला प्रभारी रोशन वर्मा के अनुसार शिविर कलक्टर के निर्देष पर आयोजित किया गया था। जिसके लिए जिला कार्यालय से निर्देष जारी हुआ है। आज लोगों को जागरुक करने के लिए शिविर लगाया गया है। आने वाले दिनों में स्कूलों में जाकर जांच की जाएगी।

सीएमएचओ कार्यालय के सामने लगा शिविर
बताना होगा कि पुराना बस स्टैंड में जिला स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी कार्यालय परिसर में जिला खाद्य एवं सुरक्षा विभाग ने जिले के स्कूलों में मध्यान्ह भोजन बनाने वाले समूहों को खाना बनाने की सामग्री लेकर बुलाया और इसके बाद रायपुर से आए प्रयोगशाला टीम के जरिए सैंपल की जांच की। इस प्रक्रिया में मध्यान्ह भोजन बनाने वाले समूहों के द्वारा लाए गए सैंपल की वास्तविकता पर भी सवाल उठ रहा है। इस संबंध में जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी रोशन सिंह वर्मा ने बताया कि आज केवल लोगों को जागरुक करने के लिए शिविर लगाया गया है, जिसमें लोगों को आयोडीन नमक का पैकेट लाने के लिए कहा गया था। साथ ही मध्यान्ह भोजन बनाने में उपयोग किए जाने वाले सामग्रियों को भी मंगाया गया था। आज करीब 70 समूहों के संचालक पहुंचे थे, जिनके द्वारा 500 सैंपलों की जांच कराई गई है।

जिला प्रशासन के आदेश पर लगाया गया शिविर
जिला प्रशासन द्वारा जारी आदेशानुसार सोमवार को विश्व आयोडीन अल्पता विकार नियंत्रण दिवस पर शिविर का आयोजन किया गया था। जिसके लिए आंगनबाड़ी केंद्र, मध्यान्ह भोजन, रसोई घर में उपयोग किए जाने वाले नमक व अन्य खाद्य सामग्रियों की चलित प्रयोगशाला में जांच कराना था, ताकि गुणवत्ता का आंकलन किया जा सके। आदेश के बाद संबंधितों ने केवल औपचारिकता का पालन किया है। जांच के दौरान समूहों ने आचार व पापड़ की सैंपल जांच नहीं कराई, जबकि इन दोनों की गुणवत्ता में सर्वाधिक शिकायत मिलती रही है।

हाथ में पैकेट लेकर पहुंचे थे कई लोग
सोमवार को जांच के लिए लगभग 70 स्कूलों के मध्यान्ह भोजन संचालक समूह के लोग पहुंचे थे। जिनके हाथों में कई कपनियों के पैकेट देखे गए। पत्रिका प्रतिनिधि के पूछे जाने पर कुछ लोगों ने बाजार से सामग्री खरीदकर लाने की बात कही। साथ ही यह भी बताया कि वे जिस कंपनी की वस्तुएं उपयोग करते हैं, वही लेकर आए हैं। ढोलिया स्कूल के संचालन समिति से जुड़े फेरु साहू व शिवकुमार साहू ने बताया कि उसन नमक, हल्दी व मिर्च की जांच कराई है। नंदकुमार व सनतकुमार ने भी बाजार से सामग्री लाकर जांच कराने की बात कही है।

ये है सबसे बड़ा सवाल
जानकारों की मानें तो स्कूलों व आंगनबाड़ी केंद्रों में भोजन की गुणवत्ता जांचने के लिए मौका निरीक्षण करना आवश्यक है। मौका निरीक्षण के दौरान ही वास्तविकता का पता चलता है कि वे भोजन बनाने के लिए किस कंपनी की क्या-क्या वस्तुएं उपयोग करते हैं। बच्चों को किस गुणवत्ता का खाना परोसा जा रहा है। जिले में मध्यान्ह भोजन के दौरान कई स्कूलों में गुणवत्ता को लेकर शिकायतें मिलती है। जिसे देखते हुए खाद्य विभाग ने सैंपल जांच की औपचारिकता न निभाते हुए मौका निरीक्षण करना जरूरी है।

जिले में 1133 स्कूलों में मध्यान्ह भोजन बना रहे सैकड़ों समूह
जिले के बेमेतरा, साजा, बेरला, नवागढ़ विकासखंड के 745 प्राथमिक व 388 माध्यमिक स्कूलों सहित कुल 1133 स्कूलों में 123636 विद्यार्थियों को मध्यान्ह भोजन दिया जाता है। जिले के इन स्कूलों में सैकड़ों समूह मघ्यान्ह भोजन के संचालन में कार्यरत हैं। ऐसे में केवल 70 संस्थाओं से जुडे समूहों ने सैंपल जांच कराया है, जिसे देखते हुए शिविर को केवल औपचारिक ढंग से निपटाया जाना माना जा रहा है।

बाजार में जांच पर कोताही
त्यैाहारी सीजन शुरू होने के बाद शहर समेत जिलेभर में बाहर से लाकर मिठाई व अन्य सामग्री खपाया जा रहा है। वहीं नकली खोवा व नकली दूध की शिकायतें भी आती है। जिसे देखते हुए सैंपल जांच किया जाना जरूरी है। उपभोक्ता मामलों के जानकारों की माने तो त्यैाहार मे मांग अधिक होने के कारण इस तरह की स्थिति बनती है। पूर्व में की गई कार्रवाई के दौरान खाद्य सामग्री बरामद किया गया था पर जिले में इस बार इस तरह की कार्रवाई शून्य नजर आ रही है।