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निकायों में अध्यक्ष के दावेदारों को पहले पार्षद बनने के लिए करनी होगी मेहनत

Laxmi Narayan Dewangan

Publish: Oct 17, 2019 07:10 AM | Updated: Oct 16, 2019 23:31 PM

Bemetara

बेमेतरा नगर पालिका व अन्य निकायों के अध्यक्ष पद के लिए उम्मीद लगाए बैठे दावेदारों को झटका लगा है। मध्यप्रदेश की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी निकायों में अप्रत्यक्ष निर्वाचन प्रक्रिया लागू की जा रही है।

बेमेतरा . बेमेतरा नगर पालिका व अन्य निकायों के अध्यक्ष पद के लिए उम्मीद लगाए बैठे दावेदारों को झटका लगा है। मध्यप्रदेश की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी निकायों में अप्रत्यक्ष निर्वाचन प्रक्रिया लागू की जा रही है। जिले के साजा, परपोड़ी, थानखम्हरिया नगर पंचायत में अनारक्षित महिला व देवकर में अन्य पिछड़ा वर्ग महिला को चुना जाना है। इसके अलावा बेेमेतरा पालिका में भी महिला के लिए अध्यक्ष पद आरक्षित है।

अध्यक्ष पद के आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने से दावेदारों में जगी थी उम्मीद
18 सितंबर को जिले के 8 निकायों के लिए राजधानी रायपुर में अध्यक्ष पद के लिए आरक्षण प्रक्रिया पूर्ण की गई थी। तब सभी निकायों में अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी करने वालों की उम्मीदे जगी थी। मध्यप्रदेश सिस्टम लागू करने को लेकर प्रदेश शासन ने तीन सदस्यीय उपसमिति गठित की थी। इस उप समिति ने अपनी रिपोर्ट आज सौंप दी है। उप समिति के अनुशंसा के बाद प्रदेशभर की तरह अध्यक्ष चुने हुए पार्षद ही तय करेंगे। इससे दावेदारों में असंतोष है।

अध्यक्ष और पार्षद पद के लिए आरक्षण पूर्ण कर लिया गया
एक माह के दौरान नगर पालिका निर्वाचन के लिए जारी प्रक्रिया के तहत जिले के बेमेतरा नवागढ़, मारो, देवकर, थानखम्हरिया, परपोड़ी, साजा निकायों में वार्डों की आरक्षण प्रक्रिया पूर्ण की जा चुकी है। बेमेतरा नगर पालिका में 21 वार्ड और अन्य निकायों में 15 -15 वार्ड हैं, जहां पार्षदों को चुना जाएगा। इसके अलावा मारो नगर पंचायत के लिए अध्यक्ष पद अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित है, जहां आम निर्वाचन की प्रक्रिया दो साल बाद होनी है। इस बार मारो नगर पंचायत में अध्यक्ष का निर्वाचन होना है, जिसके लिए जिले में दीगर निकायों के साथ निर्वाचन होना था पर अब जिस तरह से प्रदेश शासन की तैयारी है, उससे माना जा रहा है कि पार्षद ही अध्यक्ष चुनेंगे। फिलहाल मारो में अध्यक्ष का पद रिक्त होने से कार्यावाहक अध्यक्ष के भरोसे कामकाज चल रहा है।

अब निर्वाचित पार्षद अपने बीच से चुनेंगे अध्यक्ष
नई व्यवस्था से जिला मुख्यालय मे दोनों दलों के दावेदारों को पहले पार्षद निर्वाचित होना होगा। तभी वे अध्यक्ष पद की दावेदारी कर सकेंगे। निर्वाचित पार्षद ही अपने बीच से अध्यक्ष चुनेंगे। इस स्थिति में भाजपा व काग्रेस के दावेदारों को झटका लगा है। इस स्थिति के बाद पार्षदों का वजन पूर्व की अपेक्षा अधिक होगा।

1979 में अप्रत्यक्ष चुनाव से अध्यक्ष बने थे संतोष
बेमेतरा नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए 1979 में संतोष कुमार चौबे पार्षदों के माध्यम से चुने गए थे। इसके बाद 1995 में अध्यक्ष गौहर अली चुने गए थे। उनके इस्तीफे के बाद अधिवक्ता ढारेन्द्र सिंह वर्मा अध्यक्ष चुने गए थे। 1999 के बाद सेे अध्यक्ष आम निर्वाचन चुना जाने लगा। अब एक बार फिर प्रदेश में 1999 से पूर्व की स्थिति लागू होगी।

अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली के विरोध में दिया धरना
राज्य सरकार द्वारा नगरीय निकाय में अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली लागू किए जाने के विरोध में बुधवार को पुराना बस स्टैंड बेमेतरा में धरना-प्रदर्शन किया गया। साथ ही बेरला के भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी धरना दिया। तत्पश्चात राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा गया। धरना प्रदर्शन में पूर्व विधायक अवधेश चंदेल, भाजपा जिलाध्यक्ष राजेंद्र शर्मा, मंडल अध्यक्ष विनोद दुबे, नेतराम वर्मा, सुनील राजपूत, शांतिलाल जैन, रविशंकर आडिल, संजीव तिवारी, बल्लू यादव, भोलाशंकर वर्मा, चंद्रहास वर्मा, बलराम यादव, संतोष साहू, मानक चतुर्वेदी, दाऊलाल कुर्रे, युगल पाटिल, राकेश साहू, कामदेव वर्मा, लेखराम साहू आदि उपस्थित थे।