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इलेक्शन 2019 स्पेशल...बेगूसराय में मोदी बनाम मोदी विरोध

Prateek Saini

Publish: Apr 22, 2019 19:53 PM | Updated: Apr 22, 2019 19:53 PM

Begusarai

विशेष संवाददाता प्रियरंजन भारती की रिपोर्ट...

 

(बेगूसराय): वामपंथ का गढ़ 'लेनिनग्राद' कहे जाने वाले बेगूसराय में अब हालात बदल गए हैं।चुनावी संग्राम में तीन महारथी हैं और लडा़ई आरपार की हो रही है। सीपीआई के उम्मीदवार कन्हैया कुमार पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं। महागठबंधन में आरजेडी ने छात्र आंदोलन के नेता तनवीर हसन को खड़ा किया है। एनडीए उम्मीदवार भाजपा के फायरब्रांड नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह हैं।


भाजपा सांसद भोला सिंह के निधन से खाली हुई सीट पर गिरिराज सिंह के खड़े होने को लेकर लंबे समय तक विवाद चला पर आखिरकार भाजपाध्यक्ष अमित शाह के निर्देश पर गिरिराज सिंह ही मैदान में उतरे। भूमिहार और मुस्लिम बहुल सीट पर गिरिराज सिंह बाहरी उम्मीदवार कहे जाते रहे। लेकिन चुनाव की बिसातें बिछते ही यहां नरेंद्र मोदी बनाम मोदी विरोध मुद्दा बन गया।साढ़े चार लाख भूमिहार मतों के बीच करीब एक लाख ऐसे मतदाता हैं जिन्हें भाकपा का कैडर कहा जाता है। कन्हैया कुमार इसी आधार वोट के सहारे मैदान में उतरे हैं। उन्हें यहां के स्थानीय होने के फायदे का भी भरोसा है। कन्हैया के कारण देश दुनिया की नज़रें बेगूसराय पर टिकी हैं।बड़े वामपंथी नेता और फिल्मों के सितारे उनके प्रचार में जुटे हैं। मीडिया में खासतौर पर यह प्रदर्शित किया जा रहा कि बेगूसराय में मुकाबला सीधे कन्हैया और गिरिराज सिंह के बीच है। हालांकि ज़मीन पर हकीक़त कुछ और ही दिखी।

 


आरजेडी ने कन्हैया कुमार के लिए सीट नहीं छोड़ी और तनवीर हसन को उम्मीदवार बना दिया। जेपी आंदोलन की उपज तनवीर हसन एक सधे हुए मिलनसार नेता हैं और उनकी छवि जातियों से ऊपर उठकर सर्वसमाज के बीच अच्छी बनी है। वह क्षेत्रीय स्तर पर लोगों में लोकप्रिय भी कम नहीं हैं। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव कन्हैया कुमार को विपक्ष की राजनीतिक धारा में अपने प्रतिद्वंदी बनाने से बचना चाहते रहे और उन्हें महागठबंधन का उम्मीदवार बनाने की बजाय सीपीआई-सीपीएम से कोई तालमेल ही नहीं किया। नतीजन चुनावी जंग में भाजपा के विरुद्ध दो दलों के उम्मदवारों के बीच वोटों के बंटने का माहौल बना है। चुनावी परिदृश्य में मुद्दा बस प्रधानमंत्री मोदी को फिर से सत्ता की बागडोर सौंपने और उन्हें हटाने का है। इसमें जातियां सिरे से गायब दिखती हैं। महत्वपूर्ण यह है कि बेगूसराय के हर कोने में चुनावी चर्चाओं के बीच मोदी बने हुए हैं।


बछवाड़ा के रानी तीन पंचायत की एक चाय दुकान पर वृद्ध रामविलास पासवान कहते हैं,कन्हैया पढ़ा लिखा बीहट का लड़का है। उसको सभी का वोट मिलेगा। भूमिहार लोग भी खूब वोट देंगे।पासवान से पूछा,प्रधानमंत्री किसे बनाएंगे तो जवाब मिला, प्रधानमंत्री तो मोदिए जी बनेंगे। कहा कि और कोई इस लायक हइए नहीं है। पूछा गया कि कन्हैया कुमार को वोट देंगे तो मोदी जी कैसे बनेंगे प्रधानमंत्री? पासवान ने छूटते ही कहा,एगो कन्हैया के वोट देवे से कि होतय?मोदी जी को ढेरों लोगिन का साथ मिलतइ। वहीं पास में बैठी सुकुमारी देवी हंसी और बोल पड़ी, मोदी जी ने जेना काम कैलथिन कि घरे घरे घर गैस चूल्हा जले लगलै,शौचालय के पैसा घरे घर मिलइ छे। सबन के बैंक खाता खुललै से पइसा नुकाए के जमा कर देइ छे। आगे बढ़े तो रास्ते में एक जगह कई लोग जमा थे। मुखिया रह चुके बालेश्वर शाह मोदीनामा का व्याख्यान करने लगे। कहा कि कन्हैया तो देशद्रोही है। सर्जिकल स्ट्राइक के दौर में कुछ कैडरों को छोड़ उन्हें गांवों में भी लोगों का विरोध झेलना पड़ रहा है। यहां के मुकाबले में गिरिराज सिंह को तनवीर हसन से सामना हो रहा है।

 

वहीं हनुमान होटल में सुनील राय कहने लगे, तनवीर हसन को ही मुसलमानों का वोट मिल रहा है। झूठा प्रचार किया जा रहा है कि गिरिराज सिंह और कन्हैया के बीच की जंग में तनवीर हसन तीसरे नंबर पर हैं। हकीकत यह है कि कन्हैया का पोजीशन पीछे जा रहा है। बराज टोला में मिले लोगों में यही चर्चा छिड़ी थी। सुनील सिंह बोले, हम देश के लिए वोट करेंगे। कोई भी उम्मीदवार क्यों न हो, हमें मोदी जी को जिताने के लिए वोट करना है। सुनील सिंह की बातों का मंडली में बैठे दूसरे लोगों ने भी खुलकर समर्थन किया। बात निकली तो राष्ट्रवाद पर आकर अंटक गई। फौज से रिटायर त्रिभुवन सिंह ने कहा, मोदी जी ने पाकिस्तान की सीमा में घुसकर आतंकवादियों को मार गिराया। पहले सेना को इतनी छूट क्यों नहीं दी गई? एक प्रधानाचार्य श्यामसुंदर सिंह ने जीतहार के बारे में पूछे जाने पर कहा, यहां की लड़ाई मोदी बनाम एंटीमोदी है।


हाईवे के ढाबों पर ही नहीं चौक चौराहों से लेकर गांवों की बैठकों में मोदी और राष्ट्रवाद की चर्चा छाई हुई है। गेहूँ कटाई में लगे शिवकुमार शर्मा ने कहा, सीपीआई को कैडर छोड़कर कौन वोट देगा। अभी देश में मोदी जी हैं, उन्हें एक मौका और दिया जाना जरूरी है। अरुण यादव ने कहा,यहां भाजपा और महागठबंधन के बीच मुकाबला है। अंतिम लड़ाई मोदी बनाम एंटी मोदी की होगी।


प्रचार शैली का जायजा लेने सीमा गांव पहुंचा। वहां गिरिराज सिंह का काफिला जबर्दस्त उत्साह और भीड़ के साथ आगे बढ़ता मिला। गांव की औरतें, बूढ़े, बच्चे, जवान सभी खिले चेहरों से हाथ उठाकर उनका समर्थन करते दिखे। कुछ उत्साही नौजवान हाथों में लस्सी और बिस्किट के पैकेट बांटते मिले। यह दृश्य स्वयं ही बयां कर देता है कि जनता क्या करना चाह रही है? एक चौराहे पर मिले कन्हैया कुमार के समर्थक जो डफली बजाकर गीत गाते हुए प्रचार कर रहे थे। कुछ नौजवान बड़ी तल्लीन होकर नज़ारे को समझने में लगे थे। पूछा,वोट किसे देंगे तो हंसते हुए शंकर शर्मा ने कहा कि जो जीते उसी को वोट देंगे।


मटिआनी में तनवीर हसन की चुनावी सभा में पांच सात हजार लोग बड़ी गंभीरता के साथ भाषण सुनने में तल्लीन दिखे। एक महिला सुनीता राय ने पूछने पर कहा कि वोट देने के लिए कोई कुछ कहेगा तो भी निर्णय करेंगे क्या? हमको खुद तय करना है। वहीं बबलू कुमार कह पड़े, मोदी जी की सरकार फिर बनेगी। बेगूसराय में भी उन्हीं के नाम पर वोट है। चाहे पक्ष में हो या विपक्ष में। सच तो यही दिखता है कि चुनावी जंग मोदी बनाम मोदी विरोध है। इस दौर में समाजवाद, साम्यवाद और जातिवाद से ऊपर अब मोदीवाद का ज़ज़्बा हावी है। 1952 से 2005 तक सवर्ण उम्मीदवार को जीत दिलाने वाला बेगूसराय पिछले तीन चुनावों से एनडीए के कब्जे में है। 2019 में भी विकास और राष्ट्रवाद के मुद्दों के हावी हुए रहने से जातिवाद और दूसरी बातें पिछड़ती दिख रही हैं। ऐसे में इतिहास फिर दुहराया जाएगा या न ई पटकथा लिखी जाएगी, इसे तो वोटर ही 29 अप्रैल के मतदान में तय करेंगे पर फिलहाल मोदी बनाम एंटीमोदी की जंग में लड़ाई इस बात की है कि मोदी को मुकाबला देने में कौन आगे निकलेगा।