स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

एम्बुलेंस नहीं मिला तो पिता को खाट पर लेकर अस्पताल पहुंचा बेटा, इलाज में देरी होने से मौत

Sarweshwari Mishra

Publish: Jul 16, 2019 12:42 PM | Updated: Jul 16, 2019 12:42 PM

Basti

एम्बुलेंस में आने में हुई एक घंटे देरी, सही समय पर इलाज न मिलने से हुई मौत

बस्ती. यूपी के स्वास्थ्य मंत्री हमेशा सुविधाओं की बात करते हैं। अभी हाल ही भी स्वास्थ्य विभाग के निरीक्षण के लिए आए मंत्री सिद्धार्थनाथ का कहना था कि स्वास्थ्य सेवा कहीं खराब नहीं है। हर जगह मरीजों के लिए हर समय ऐम्बुलेंस उपलब्ध है। यूपी के बस्ती में ऐम्बुलेंस के बजाय खटिए पर पिता को लेकर अस्पताल पहुंचाना स्वास्थ्य महकमें की कार्य-प्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिया है। ऐम्बुलेंस सेवा नहीं मिलने पर बेटे द्वारा अपने पिता को खटिए पर लेकर सीएचसी अस्पताल पहुंचा। डॉक्टरों ने मरीज की हालत गंभीर देखते हुए जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। बेटा अपने पिता को लेकर ऐम्बुलेंस का इंतजार करता रहा एक घंटा बीतने के बाद उसके पिता की हालत और बिगड़ गई, आखिरकार इलाज के अभाव में उसके पिता ने अस्पताल के बाहर दम तोड़ दिया।


दरअसल, यह मामला हर्रिया थाना क्षेत्र के मुरादपुर गांव का है जहां भोर में 45 वर्षीय गंगाराम को सीने में दर्द और खून की उल्टी होने लगी। गंगाराम के परिजन 108 ऐम्बुलेंस को एक घंटे तक फ़ोन करते रहे लेकिन फोन नहीं लगा। पिता की ऐसी हालत को देखते हुए बेटे ने खटिये पर पिता के लिटाकर सीएचसी अस्पताल चल दिए। जब 6 किलोमीटर की दूरी तय करके हरैया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के पहुंचे तो वहां मौजूद डॉक्टरों ने मरीज का प्राथमिक उपचार शुरू किया, लेकिन गंगाराम की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ तब डॉक्टर ने मरीज को जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।

 


वहां मौजूद डॉक्टर खुद 108 ऐम्बुलेंस को फोन कर मरीज को ले जाने को कहा लेकिन अस्पताल पर एम्बुलेंस न होने के कारण दूसरे अस्पताल से 108 एम्बुलेंस को आने में एक घंटे का वक्त बीत गया औऱ इसी इंतजार में गंगाराम ने दम तोड़ दिया। मौत के बाद गंगाराम के परिजन दोबारा उनके शव को खटिए पर लादकर रोते बिलखते घर चले आए।

 


उनकी बात नहीं हो पाई, लगातार फ़ोन करने के बाद भी इमरजेंसी सेवा 108 नंबर व्यस्त बताता रहा, अंत मे अपने पिता की जान बचाने के लिए बेटे अपने पिता को खटिये पर लाद कर हर्रिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए निकल पड़े, 6 किलोमीटर पैदल चलने के बाद अस्पताल पहुचे तो वहां मौजूद डॉक्टर ने प्राइमरी इलाज शुरू किया, कुछ देर बाद भी जब गंगाराम की हालत में कोई सुधार नही हुआ तो डॉक्टर मरीज को जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिए, वहां मौजूद डॉक्टर खुद 108 एम्बुलेंस को फ़ोन कर मरीज को ले जाने को कहा लेकिन अस्पताल पर एम्बुलेंस न होने के कारण दुसरे अस्पताल से 108 एम्बुलेंस को आने में एक घंटे का वक़्त बीत गया और इसी इन्तेज़ारी में गंगाराम ने दम तोड़ दिया, मौत के गंगाराम के परिजन दोबारा अपने पिता को उसी खटिये पर लादकर रोते बिलखते घर को चले गए।

BY- Satish Srivastava