स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

रहस्य बनी सांभर झील में प्रवासी पक्षियों की मौत !

Arun Sharma

Publish: Nov 19, 2019 21:17 PM | Updated: Nov 19, 2019 21:32 PM

Bassi

दो मंत्री, तीन विभागों के सात अफसर के दौरे, चार लैबों में जांच, िफर भी नहीं खुलासा, नहीं थम रही मौत


जयपुर। सांभर में पक्षियों की मौत की गुत्थी सुलझती नजर नहीं आ रही। पहले सांभर में और अब नागौर जिले के नावां की तरफ झील में मृत पक्षी मिल रहे हैं। आश्चर्य है कि कई मंत्री,विधायक समेत वैज्ञानिक एवं कई विभागों के आला अफसरों के सांभर दौरा करने के बाद भी पक्षियों की मौत रहस्यमयी बनी हुई है। वहीं पक्षियों की मौत का सिलसिला नहीं थम रहा। रेस्क्यू करके इलाज के लिए लाए गए कई बीमार पक्षियों भी नहीं बच रहे। करीब डेढ़ सप्ताह से लगातार पक्षियों की मौत हो रही है, रोकना तो दूर पक्षियों की मौत के कारणों तक का पता नहीं चला।
भोपाल लैब की रिपोर्ट के बाद बर्ड फलू नहीं होने का खुलासा तो हुआ लेकिन किस वजह से मौत हो रही है, यह खुलासा नहीं हुआ। अपेक्स सेंटर फोर एनिमल डिजीज इंवेटिगेशन मॉनिटियरिंग एंड सर्विलेंस बीकानेर के प्रोफेसर एके कटारिया ने बूटोलिज्म होने की बात कही लेकिन अफसर इस पर भी कायम नहीं है। इसलिए बरेली एवं भोपाल लैब में विशेषज्ञ सोमवार को िफर सैंपल लेकर गए हैं।
ये मंत्री—विधायक, अफसर कर चुके दौरा
पिछले डेढ़ सप्ताह में वन मंत्री सुखराम विश्नोई, पशुपालन मंत्री लालचंद कटारिया, भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष एवं विधायक सतीश पूनिया, विधायक निर्मल कुमावत, पूर्व मंत्री राजपाल सिंह समेत अतिरिक्त मुख्य सचिव वन श्रेहा गुहा, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक अरविंद तोमर,
डीएफओ कविता सिंह, डीएफओ सुदर्शन, पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. शैलेश शर्मा, संयुक्त निदेशक डॉ.तेज सिंह, जिला कलक्टर जगरूप सिंह यादव दौरा कर चुके हैं। इनके अलावा भी नगरपालिका, सांभर उपखंड प्रशासन के अधिकारी रेस्क्यू कार्य में लगे हुए हैं।

ये वैज्ञानिक आ चुके सांभर
भोपाल से आए डॉ.अशोक, आईवीआरआई बरेली से डॉ.मनोज, डब्ल्यूटीआई से डॉ.दिशा,
डॉ. भार्गवी, डॉ.अशरफ, पक्षी विशेषज्ञ प्रो.एके कटारिया सांभर में पक्षियों की मौत के कारणों की जांच करने आ चुके हैं। कई पक्षियों के इलाज में मदद कर रहे हैं। पक्षियों से जुड़ी एनजीओ के वॉलटियर भी मदद कर रहे है। हालांकि रेस्क्यू कार्य के दौरान कई पक्षियों को बचाया गया है। कई पक्षी स्वस्थ होने के बाद झील में भी छोड़े गए हैं।

[MORE_ADVERTISE1]