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सड़क सुरक्षा अभियान का कैसा असर, हाइवे पर 1 साल में 50 मौत

Surendra Singh

Publish: Nov 21, 2019 07:00 AM | Updated: Nov 20, 2019 23:41 PM

Bassi

road safety campaign in rajasthan तेज रफ्तार व हाइवे के बीच डिवाइडर नहीं होने से हो रहे हादसे

मनोहरपुर दौसा नेशनल हाइवे पर 1 साल, 55 किमी, 50 की मौत 67 घायल

 

गठवाड़ी. मनोहरपुर दौसा नेशनल हाइवे के नवीनीकरण के बाद हादसों का ग्राफ दिनों दिन बढ़ता जा रहा है। हाइवे से जुड़े जमवारामगढ़, आंधी, चंदवाजी, मनोहरपुर व सैंथल थाना क्षेत्र में पिछले एक साल में 50 लोगों की सड़क दुर्घटना में मौत हो चुकी है, वहीं करीब 67 से अधिक लोग घायल हो चुके हैं।

कौनसे थाने में कितनी मौत

पुलिस अनुसार जमवारामगढ़ थाना क्षेत्र में 11, मनोहरपुर में 11, चंदवाजी में एक, आंधी थाना क्षेत्र अधीन 10 व सैंथल थाना क्षेत्र में सबसे ज्यादा 18 लोगों की पिछले एक साल में मौत हुई है। हाइवे पर पिछले तीन दिन के अन्दर सड़क दुर्घटना में पांच लोगों की मौत हो चुकी है। कैलाश जींजवाडिया, राकेश रूंडला, कमलेश शर्मा, नानूराम खटाणा, सुशील चौधरी सहित ग्रामीणों ने बताया कि मनोहरपुर दौसा हाइवे पर सम्बंधित थाना पुलिस की मॉनीटरिंग नहीं होने से वाहन चालक बैखोफ दौड़ते हैं। पुलिस द्वारा कार्रवाई नहीं करने से दुपहिया वाहन चालक यातायात नियमों का पालन तक नहीं करते हैं। इससे सडक सुरक्षा अभियान sadak surksha abhiyan पर भी सवाल उठने लगे हैं, हालांकि पुलिस स्कूलों में अभियान संबंधित कार्यक्रम कम रही है, लेकिन यहां वाहन चालक लापरवाही का शिकार हो रहे हैं। ग्रामीणों ने हाइवे पर पुलिस की सघन मॉनीटरिंग कर यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

सड़क हादसों की कमी के लिए उपाय

मनोहरपुर दौसा हाइवे पर आए दिन होने वाली दुर्घटना पुलिस व आमजनके लिए परेशानी का सबब बनने लगी है। मनोहरपुर से दौसा तक हाइवे पर गठवाड़ी, अजबपुरा, बहलोड़, भावनी, डांगरवाड़ा के अलावा अन्य आबादी क्षेत्र में डिवाइडर का निर्माण करवा फोरलेन सड़क का निर्माण करवाया गया है, जहां हादसे नहीं होते, लेकिन बिना डिवाइडर के दोलेन वाली जगह हादसे अधिक हो रहे हैं। दुर्घटना संभावित वाली जगहों पर एनएचएआई द्वारा किसी प्रकार के संकेतक बोर्ड नहीं लगाए हुए हैं। बढ़ती दुर्घटना को लेकर ग्रामीणों ने हाइवे को फोरलेन बनाने की मांग शुरू कर दी है। जिससे हादसों मे कमी आ सके


इंटरसेप्टर लगाने की मांग

पुलिस जहां हादसों का कारण वाहनों की तेज रफ्तार व ओवरटेक को मान रही है। वहीं ग्रामीण हाइवे के बीच डिवाइडर नहीं होना व सड़क की दो लेन होना मान रहे हैं। छह थानों की सीमा होते हुए भी दिन में हाइवे गश्त की व्यवस्था है ना ही इंटरसेप्टर है।

हाइवे नया होने से वाहन चालक तेज रफ्तार से चलते है। हाइवे के बीच डीवाइडर नहीं होने से वाहनों में आमने-सामने की भिंडत होती है। हाइवे पर बढ़ रही दुर्घटना को लेकर हम गंभीर है। इसके लिए एनएचएआइ के अधिकारियों के साथ भी दौरा किया था। तेज रफ्तार से चलने वाले वाहनों पर कार्रवाई के लिए जल्द शिफ्ट के हिसाब से इंटरसेप्टर गाडी लगाई जाएगी।

सुलेश चौधरी, एएसपी हाइवे व यातायात, जयपुर ग्रामीण

हाइवे पर आए दिन हादसों से लोग अकाल मौत का शिकार हो रहे हैं। हाइवे को फोरलेन कर डिवाइडर बने तो हादसों में कमी आ सकती है। नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ विशेष अभियान चलाकर कार्रवाई होनी चाहिए।

बाबूलाल मीणा, सरपंच संघ अध्यक्ष, जमवारामगढ़

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