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जयपुर के जमवारामगढ़ में सामान्य से अधिक बारिश, फिर भी बांध रीते

Vinod Sharma

Publish: Sep 08, 2019 08:30 AM | Updated: Sep 08, 2019 00:06 AM

Bassi

Heavy Rain in Jaipur Rajasthan : jaipur जिले के जमवारामगढ़ Ramgarh dam उपखण्ड में सामान्य से ज्यादा बारिश होने के बाद भी खरड़, रायावाला, नीमला और दांतली बांध की भराव क्षमता भी पूरी नहीं हुई है। तहसील क्षेत्र में अब तक 734 एमएम ( Heavy Rain In Ramgarh ) बारिश दर्ज की गई।

आंधी (जयपुर)। जमवारामगढ़ Heavy Rain In Ramgarh तहसील क्षेत्र में इस मानसून सीजन में सिंचाई और राजस्व विभाग की ओर से दर्ज किए बारिश के आंकड़े सुनने-सुनाने में अच्छे लग रहे है लेकिन वास्तविकता में उनसे राहत मिलने की आस नहीं है। क्योंकि यहां सामान्य से अधिक वर्षा होने के बाद भी चार बांध रीते हैं। ऐसे में सिंचाई के लिए जल प्रबंधन की समस्या हो सकती है। तहसील क्षेत्र के रामगढ़ बांध सहित अन्य बांधों के कैचमेंट एरिया में बारिश की कमी के चलते ये बांध अब तक पानी की आवक को तरसते रहे हैं। कैचमेंट एरिया में बारिश की कमी तथा भराव स्रोतों में मौजूद अतिक्रमणों के चलते क्षेत्र की पहचान माने जाने वाले रामगढ बांध सहित अधिकांश बांधों में पानी की आवक नहीं हुई। इससे क्षेत्र के छोटे-बड़े सभी बांध रीते ही रह गए।

मौसम विभाग rain water in Ramgarh dam : monsoon 2019 की माने तो प्रदेश से अब मानसून की विदाई होने वाली है। ऐसे रीते पड़े बांधों में अब पानी की आवक की आस भी नहीं बची है। बारिश की कमी से बांधों में पानी नहीं होने से बांधों से लाभांवित होने वाले गांवों में सिंचाई के लिए पानी मिलना तो दूर, भूमिगत जल का पर्याप्त पुनर्भरण भी नहीं हो पाया। ऐसे में लोगों को पीने का पानी नसीब होने के भी लाले पडऩे के आसार नजर आने लगे हैं।


सामान्य से 209 एमएम अधिक बारिश
सिंचाई विभाग अधिकारियों की मानें तो इस मानसून सीजन में ramgarh dam update news जमवारामगढ़ तहसील क्षेत्र में सामान्य का आंकड़ा छूने के लिए कुल 525 एमएम बारिश होनी चाहिए थी। इसकी तुलना में अब तक यहां 734 एमएम बारिश दर्ज की जा चुकी है। आंकड़ों के अनुसार क्षेत्र में सामान्य से 209 एमएमए बारिश अधिक हुई है, फिर भी क्षेत्र में अधिकांश बांधों के साथ तालाब, एनिकट रीते पड़े हैं।

हजारों हैक्टेयर भूमि पर होती है सिंचाई
क्षेत्र के 150 एमसीएफ टी क्षमता वाले खरड़, रायावाला, नीमला और दांतली बांधों में पानी की अच्छी आवक होने के बाद इनसे निकलने वाली नहरों से जुड़े jaipur news गांवों की हजारों हैक्टेयर भूमि में रबी मौसम की फ सलों में सिंचाई होती है।

खरड़ बांध से 4073 हैक्टेयर
150 एमसीएफ टी क्षमता वाले इस बांध से निकलने वाली मुख्य नहर और चार माइनरों से क्षेत्र के आंधी, सायपुर, खरड़, भगवानपुरा, थोलाई, बिरासना, रामनगर, टोलूपुरा, भौडाखेड़ा, सकरपुरा, फुटोलाव, भावनी, सानकोटडा, पातलवास, चक दांतली सहित 18 गांवों की 4073 हैक्टेयर भूमि पर सिंचाई होती है।

रायावाला बांध से 300 हैक्टेयर
बांधों से निकलने वाली नहर से गुवाडा, सिंगपुरी, थली, रायावाला, खागा की ढाणी, बणजारा की ढाणी की करीब 300 हैक्टेयर भूमि पर सिंचाई होती है।

नीमला बांध से 400 हैक्टेयर
बांधी से निकलने वाली नहर से नीमला, श्रीरामगोपालपुरा, नेतावाला और राम्यावाला गांव की लगभग 400 हैक्टेयर भूमि पर सिंचाई होती है। अधिशेष पानी रायावाला मिनी डैम में आता था। चार वर्ष पहले सिंचाई विभाग ने करीब पांच लाख रुपए की लागत से नहर का सुदृढ़ीकरण कार्य भी करवाया था, लेकिन बांध में पानी की कम आवक होने और इससे नहर में पानी नहीं छोडऩे के कारण अब नहर का अधिकांश हिस्सा अतिक्रमण की भेंट चढ़ गया है।

दांतली बांध से 350 हैक्टेयर
बांध से निकलने वाली नहर से जुड़े भावनी, पावटा, लोडीपुरा, खरड, दांतली गावोंं की करीब 350 हैक्टेयर भूमि पर सिंचाई होती थी। यहां बांधों से सिंचाई के लिए जाने वाले पानी की बर्बादी रोकने के साथ साथ-टेल तक भूमि में भरपूर पानी पहुंचाने के लिए सिंचाई विभाग ने जापान सरकार के सहयोग से लाखों रुपए की लागत से सीमेंटेड नहर बनवाई थी। वर्ष 2003 से 2005 के बीच खरड़ बांध से निकलने वाली 9 किलोमीटर लम्बी नहर और फिर वर्ष 2011 में रायावाला बांध की डेढ़ किलोमीटर लम्बी नहर को सीमेंटेड नहर बनाया। लेकिन बांधों में पिछले कई वर्षों से पानी की आवक नहीं होने से किसानों को इसका लाभ नहीं मिला और अब पक्की नहरें जर्जर होने लगी हैं।

बांध का नाम भराव क्षमता मौजूद पानी मिट्टी
खरड 42 21.11 15
रायावाला 22 9.14 4
नीमला 17.50 14.00 5
दांतली 20.5 7 5
(नोट : बांधों की भराव क्षमता फीट में है।)

इनका कहना है
इस बार मानसून सीजन में जमवारामगढ़ तहसील क्षेत्र में अब तक 734 एमएम बारिश हो चुकी, जो सामान्य से अधिक है। लेकिन बांधों के कैचमेंट एरिया में बारिश कम होने से बांधों में पानी की आवक नहीं हो पाई। पानी नहीं आने से किसानों को जल प्रबंधन में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
सतीश कुमार खंडेलवाल, सहायक अभियंता, सिंचाई विभाग, जमवारामगढ़