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'नंद के आनंद भयो जय कन्हैयालाल की...'

Neeraj Shrivastava

Publish: Aug 24, 2019 18:35 PM | Updated: Aug 24, 2019 18:35 PM

Bassi

कृष्ण जन्माष्टमी त्यौहार, भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्री कृष्ण के अवतरण दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह हिंदू धर्म की वैष्णव परंपरा से संबंधित है। इस त्यौहार के अंतरगत भगवान श्री कृष्ण के जीवन के दृश्यों को नाटक, उपवास, भागवत पुराण कथा, रस लीला/कृष्णा लीला जैसे माध्यमों द्वारा मध्यरात्रि तक प्रायोजित किया जाता है, जैसा कि मध्यरात्रि को भगवान श्री कृष्ण का अवतरण समय माना जाता है।

 

 

बस्सी . कहीं झांकियां सजी, तो कहीं मटकी फोड प्रतियोगिता हुई। कहीं शोभायात्रा से बाजारों में रौनक छाई, तो कहीं भजन संध्या और अभिषेक से श्रद्धालुओं की भीड़भाड़ बनी रही। रात को श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया। रात 12 बजे प्रभु की महाआरती कर श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर शनिवार को घर और मंदिरों में धार्मिक आयोजनों के चलते बस्सी, चाकसू और जमवारामगढ़ कस्बा क्षेत्र में देर रात तक हर्षोल्लास का ऐसा ही माहौल देखने को मिला। कस्बे में ठाकुरजी की शोभायात्रा निकाली गई।

बस्सी में सुबह शोभायात्रा निकाली गई। श्रद्धालुओं ने दिनभर उपवास रखा। कोई निरहार और फलाहार, तो किसी ने एक समय खाना खाया। प्रभु के जन्म के स्वागत में मंदिरों और बाजारों को रंग बिरंगी लाइटों, गुब्बारों, बांदरवाल, फूल आदि से सजाया गया। कस्बा के बंशीधर मंदिर से सुबह गाजे बाजे के साथ ठाकुरजी की शोभायात्रा निकाली गई। ध्वज पूजन के साथ बिदाजी मंदिर चौक से शुरू हुई यात्रा बिदाजी तिराहा, चक रोड, बस स्टैंड, सूर्यनारायण मंदिर, भादुका मौहल्ला, छीपा मौहल्ला, कल्याणगंज होते हुए सुनार मौहल्ला, गौर बाजार होकर वापस बंशीधर मंदिर पहुंची। शोभायात्रा में श्रद्धालुओं ने जगह जगह ठाकुरजी की पूजा अर्चना की। शोभायात्रा में प्रभु स्वागत में प्रमुख स्थानों पर तोरण द्वार भी सजाए गए। शाम को भजन संध्या ुहुई, जिसमें कलाकारों ने भजनों की सुमधुर प्रस्तुतियां दी।

सजे मंदिर और बाजार
शोभायात्रा में लखेरों के मौहल्ला स्थित सीताराम मंदिर के सामने समेत कई स्थानों पर मटकी फोड़ कार्यक्रम हुआ। इसमें नन्हे मुन्नों ने माखन से भरी लटकी मटकी फोड़कर माखन खाया।
कस्बा के सूर्यनारायण मंदिर, कल्याणजी मंदिर, सीताराम मंदिर, मुरलीमनोहर मंदिर, गोपीनाथ मंदिर, सांभरिया रोड स्थित वैंकटेश्वर मंदिर, ढिंढ़़ोल स्थित ठाकुरजी मंदिर, चारणवास स्थित ठाकुरजी मंदिर आदि मंदिरों समेत आसपास के क्षेत्र को सजाया।