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कच्छ के रण में हो रही लूणी नदी के पानी की फिजूलखर्ची

Ratan Dave

Publish: Aug 23, 2019 11:27 AM | Updated: Aug 23, 2019 11:27 AM

Barmer

रेगिस्तान में पिछले तीन दिन से कल-कल कर बह रही लूणी नदी आठ-आठ फीट तक पानी के हिलोरे मारते हुए आगे बढ़ रही है।

बाड़मेर. रेगिस्तान में पिछले तीन दिन से कल-कल कर बह रही लूणी नदी आठ-आठ फीट तक पानी के हिलोरे मारते हुए आगे बढ़ रही है। जहां पानी की किल्लत है उनकी आंखों में पानी देखते ही अलग चमक है, लेकिन अफसोस कि चार दिन बाद यह पानी कच्छ के रण में पहुंचकर फैल जाएगा और कुछ ही दिनों में लूणी अजमेर से कच्छ के रण तक खाली हो जाएगी। रण में लूणी का पानी फालतू और फिजूल होगा।

अथाह जलराशि जो कई खेतों में धानी चुनर ओढ़ा सकती है, अकाल में मवेशियों को कई महीनों तक पेयजल उपलब्ध करवा सकती और थार की जमीन को रिचाजज़् कर उपजाऊ बना सकती है, उसकी फिजूलखचीज़् को रोकने की सरकार ने कोई योजना नहीं बनाई है।

तीन साल से लगातार

- जहां एक ओर बाड़मेर जिले में तीन साल से अकाल है और चारे-पानी की किल्लत से पशुपालक और मवेशी परेशान है, वहां लूणी में लगातार तीन साल से पानी आ रहा है। मानसून का मूड बदलने के साथ अजमेर, जोधपुर, पाली की बारिश से लूणी बहने लगी है। लिहाजा बाड़मेर जिले में जहां पानी की किल्लत है, फालतू बह रहे पानी को रोकने की जरूरत है।

क्या हो सकता है उपयोग

- केन्द्र सरकार ने नदियों को भी हाईवे की तरह जोडऩे की योजना की सोच जाहिर की है। लूणी नदी को नर्मदा प्रोजेक्ट से जोड़कर इसकी जलराशि का उपयोग लिया जा सकता है

- बालोतरा-समदड़ी-गुड़ामालानी और गांधव हाइवे पर रिवर फ्रंट बनाकर इसको पर्यटन से जोड़ा जा सकता है। पानी यहां रोककर सालभर इस पानी से पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकता है

- बाड़मेर में पशुधन के लिए पेयजल की किल्लत सालभर रहती है। इस पानी को सहेजकर वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से अकाल में आपूर्ति के लिए काम में ले सकते हैं

- भूमिगत जल को रिचार्ज करने के लिए जलग्रहण क्षेत्र में मनरेगा सहित अन्य योजना में काम कर सकते हैं

- अजमेर से लूणी तक नदी तट पर विभिन्न औषधीय व अन्य पौधे 495 किमी तक लगाने की योजना वर्ष 2003 की राज्य सरकार में प्रस्तावित थी, इसको लागू कर पर्यावरण का बड़ा काम हो सकता है

फेक्ट फाइल

- 495 किमी बहती है लूणी
-05 जिलों अजमेर, पाली, जोधपुर, बाड़मेर, जालोर में प्रवाह

-04 सहायक नदियों से जुड़ी है लूणी

योजना बनाई जा सकती है

- लूणी नदी में लगातार तीन साल से पानी आ रहा है। यह पानी हफ्ते पखवाड़े में खत्म हो जाता है। जरूरी है कि कच्छ के रण में जाने से पहले पानी को रोका जाए। इसके लिए योजना बनाकर अमल किया जाए तो यह पानी रेगिस्तान में उपयोगी हो सकता है।

- डा. प्रदीप पगारिया, कृषि वैज्ञानिक