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छात्राओं को कॉलेज तक ही रास आई राजनीति, आगे बढऩे की नहीं दिखी चाह

Ratan Dave

Publish: Aug 22, 2019 15:23 PM | Updated: Aug 22, 2019 15:41 PM

Barmer

- गर्ल्स कॉलेज की छात्राएं कॉलेज राजनीति तक सीमित

- अधिकांश नौकरी या फिर घर ही जिम्मेदारियां संभाल रही

बाड़मेर. सरकारें चुनाव में महिलाओं की भागीदारी के लिए सीट आरक्षित कर उन्हें आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन जिला मुख्यालय के एमबीसी महिला महाविद्यालय में राजनीति में सक्रिय रही छात्राएं कॉलेज राजनीति से आगे नहीं बढ़ पाई हैं। यहां निर्वाचित छात्रासंघ अध्यक्ष अब राजनीति की बजाय गृहिणी व सरकारी सेवाओं तक सीमित हा गई हैं। छात्रसंघ चुनाव को लेकर प्रदेश भर में कॉलेज कैम्पस में माहौल गरमाया हुआ है। इधर, गल्र्स कॉलेज में कोई भी छात्रा दावेदारी करती नजर नहीं आ रही है।

कैंपस तक राजनीति

पिछड़े समझे जाने वाले बाड़मेर जिला मुख्यालय के एमबीसी गल्र्स कॉलेज में अब तक रही छात्रसंघ अध्यक्ष राजनीति में कोई बड़ा मुकाम हासिल नहीं कर पाई हैं। यहां कॉलेज राजनीति के बाद छात्राएं राजनीति में सक्रिय नहीं रही। अब कोई गृहिणी है तो कई अध्ययन पर ध्यान देने लगी हैं। एक-दो अपवाद को छोड़कर अधिकांश ने राजनीति में आगे जाने की कोशिश नहीं की।

एक नजर छात्रसंघ अध्यक्ष पर

- सुमित्रा चौधरी (1997-98) : छात्रसंघ अध्यक्ष बनने के बाद राजनीति से नाता नहीं रखा। वर्तमान में अध्यापिका हैं।

- सरोज खत्री (1998-99) : छात्रसंघ अध्यक्ष बनने के बाद राजनीति में नहीं आर्इं। अब गृहिणी हैं।

- टीना चौधरी (1999-2000) : छात्र राजनीति तक सक्रिय रहीं। उसके बाद पारिवारिक जिम्मेदारियां संभाल रही हैं।

- भावना राठौड़ (2001-02) : अध्यक्ष बनी, बाद में राजनीति में नजर नहीं आई। शादी होने के बाद विदेश चली गईं।

- देवी चौधरी (2002-03) : छात्र राजनीति के बाद कुछ साल मूल राजनीति में सक्रिय रहकर पार्षद बनीं। लेकिन बाद में सरकारी नौकरी लग गई।

- अमरु विश्रोई (2004-05) : छात्र राजनीति के बाद एबीवीवी में सक्रिय रहीं। अब भाजपा में सक्रिय पदाधिकारी हैं।

- कंचन मालू (2010-11) : छात्रसंघ अध्यक्ष बनने के बाद घरेलू कार्यों में व्यस्त हो गई। अब गृहिणी हैं।

- चेतना खण्डेलवाल (2011-12) : छात्र राजनीति के बाद राजनीति की बजाय अध्ययन पर ध्यान दिया। वर्तमान में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही हैं।

- कृतिका चौहान (2012-13) : पारिवारिक जिम्मेदारियां संभाल रही हैं। अब परिवार के साथ जयपुर हंै।

- सोनू राठौड़ (2013-14), सुष्मिता जैन (2014-15) व उमा राठौड़ (2015-16) : सभी राजनीति की बजाय शिक्षा पर ध्यान दे रही हैं।

- मूली चौधरी (2016-17) : कॉलेज राजनीति के बाद महिला कांग्रेस कमेटी सक्रिय भूमिका निभा रही है। साथ ही महिलाओं की समस्याओं को लेकर संघषर्रत है।

तनुजा चारण (2017-18) : कॉलेज राजनीति के बाद एबीवीपी में सक्रिय रहीं। अब राजनीति की बजाय प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही हैं।