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मरीज को पहले क्या बीमारी हुई डाक्टर नहीं पूछेंगे, कम्प्यूटर पर ही खुल जाएगी पूरी कुंडली

Shiv Bhan Singh

Publish: Aug 09, 2019 15:30 PM | Updated: Aug 09, 2019 15:30 PM

Baran

जिला चिकित्सालय में रोगियों का ऑनलाइन डाटा फीड करने का काम जारी
बारां. जल्द ही मरीजों को अस्पतालों में रजिस्ट्रेशन कराने के लिए अधिक देर तक लाइन में खड़े रहने व हमेशा उपचार पर्ची साथ रखने की झंझट से छुटकारा मिलने वाला है।

जिला चिकित्सालय में रोगियों का ऑनलाइन डाटा फीड करने का काम जारी
बारां. जल्द ही मरीजों को अस्पतालों में रजिस्ट्रेशन कराने के लिए अधिक देर तक लाइन में खड़े रहने व हमेशा उपचार पर्ची साथ रखने की झंझट से छुटकारा मिलने वाला है। मरीज को उसकी व्यक्तिगत एचआईडी कोड नम्बर याद रखना होगा। इस आई-डी के माध्यम से मरीज जरूरत के मुताबिक किसी भी सरकारी अस्पताल में सहजता से उपचार करा सकेगा। मरीज को पुरानी पर्ची व पूर्व में लिए गए उपचार आदि की जानकारी देने की जरूरत नहीं रहेगी।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से अस्पताल में रोगी पंजीयन के लिए इंटिग्रेटेड हेल्थ मैनेजमेंट सिस्टम शुरू किया है। इसके तहत मरीजों की बीमारी व उपचार परामर्श आदि का डाटा ऑनलाइन किया जा रहा है। यहां जिला चिकित्सालय में यह कार्य गत एक मई 2019 से शुरू किया गया है। मरीजों की बीमारी का डाटा ऑनलाइन करने की प्रक्रिया के तहत ओपीडी रजिस्ट्रेशन काउंटर से उपचार पर्ची पर ही एक एचआईडी कोड नम्बर अंकित किया जा रहा है। इस कोड नंबर से ही मरीजों की बीमारी का डाटा ऑनलाइन होगा। इससे जरूरत होने पर मरीज को प्रदेश के उच्च चिकित्सा संस्थान पर रैफर किया जाएगा तो मरीज को पूर्व में कराए गए उपचार से सम्बंधित कागजों को साथ ले जाने की झंझट से भी राहत मिलेगी। इस कोड नंबर से जानकारी मिलेगी कि मरीज ने किस अस्पताल में इलाज कराया है, इलाज किस डॉक्टर ने किया था तथा इलाज के दौरान मरीज को कौन सी दवाइयां दी गई थी।
ऐसे भी होगा ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन
इसके अलावा सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ इंफोरमेशन टेक्नोलॉजी (डीओआईटी) की ओर से इसके लिए अलग से 'आईएचएमएसÓ मोबाइल एप लांच किया है। इस एप पर मरीज घर बैठे रजिस्ट्रेशन करा सकते हंै। एप खोलने के बाद उस पर रजिस्ट्रेशन कराने के दो ऑपशन दिखेंगे। पहला ऑपशन ऑनलाइन अपॉइंटमेंट व दूसरा लेबोरेट्री रिपोर्ट का होगा। अपॉइंटमेंट क्लिक करने पर मोबाइल नंबर एंटर करना होगा। इसके बाद यूजर को ओटीपी नम्बर मिलेगा। नाम, पता, मोबाइल नंबर, परामर्श विभाग का नाम फीड करना होगा। इसके बाद मोबाइल पर मरीज का एचआईडी नम्बर मिलेगा।
इस तरह मिलेगी
लाइन से राहत
एचआईडी नम्बर जिला चिकित्सालय के रजिस्ट्रेशन काउंटर पर देना होगा। ऑपरेटर इस नम्बर को कम्प्यूटर पर सर्च करेगा तो सम्बंधित मोबाइल नम्बर से दी गई जानकारी कम्प्यूटर स्क्रीन पर शो हो जाएगी। इस जानकारी को ऑपरेटर उपचार पर्ची पर पिं्रट कर मरीज को देगा। इससे मरीज को रजिस्ट्रेशन कराने के लिए अधिक देर तक रजिस्ट्रेशन काउंटर पर लाइन में खड़ा नहीं रहना होगा। रजिस्ट्रेशन के समय पूछे जाने वाली जानकारी मरीज उसके मोबाइल से पहले ही फीड कर देगा तो ऑपरेटर के समय की भी बचत होगी।
& गत मई माह से जिला चिकित्सालय में मरीज की उपचार पर्ची व पररामर्श का डाटा ऑनलाइन किया जा रहा है। मरीज को केवल अपना एचआईडी कोड नंबर याद रखना होगा। इस नंबर से प्रदेश के किसी भी अस्पताल में उसका डाटा कम्प्यूटर पर मिल जाएगा। रजिस्ट्रेन के लिए मरीज को भामाशाह, आधार नम्बर आदि देना होगा।
दीपक कुमार शर्मा, टेक्नीकल सपोर्ट इंजीनियर, जिला चिकित्सालय, बारां