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यूपी के इस जिले में सामने आया बड़ा घोटाला, परिचितों के खाते में भेज दी टीबी रोगियों की रकम

Hariom Dwivedi

Publish: Jul 16, 2019 18:48 PM | Updated: Jul 16, 2019 18:52 PM

Barabanki

- 'निश्चित पोषण योजना' की रकम में बंदरबाट का बड़ा मामला
- योजना के तहत टीबी रोगियों को हर माह दिये जाते हैं पांच रुपए
- जिलाधिकारी के निर्देश पर दर्ज हुआ मुकदमा

बाराबंकी. टीबी (Tuberculosis) रोगियों को समय से दवा खाने के लिए प्रोत्साहित करने की स्कीम 'निश्चय पोषण योजना' (Nishchay Poshan Yojna) की रकम में बंदरबाट का बड़ा मामला सामने आया है। इस काम को देख रहे एसटीएलएस पद पर तैनात संविदा कर्मियों ने रोगियों के बैंक खाते में रकम भेजने के बजाय अपने और अपने सहयोगियों के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर दी। घोटाले (Scam) की यह रकम दो लाख 32 हजार रुपये है। मामला खुलने के बाद बाराबंकी के जिलाधिकारी आदर्श सिंह (DM Barabanki) ने पूरे मामले का संज्ञान लिया और उनके निर्देश के बाद संबंधित संविदा कर्मी पर मुकदमा दर्ज करवाया दिया गया है।

दरअसल टीबी रोगियों को बीमारी की पहचान के बाद छह माह तक दवा खानी होती है। अक्सर देखा जाता था कि इस पूरी अवधि में रोगी लगातार दवा नहीं खाते थे। इसको देखते हुए जनवरी 2018 में केंद्र सरकार ने रोगियों के लिए यह स्कीम घोषित की। इसमें रोगी को हर महीने पांच सौ रुपये दिए जाने थे। इस स्कीम के तहत बैंक अकाउंट में पैसा भेजने के काम में एसटीएलएस पद पर कार्यरत संविदाकर्मी वीरेंद्र कुमार को लगाया गया, लेकिन उसने मरीजों के बैंक खातों में रकम भेजने के बजाए अपने और दूसरे सहयोगी के बैंक खातों में यह रकम भेज दी।

संविदाकर्मी बर्खास्त
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. एके वर्मा ने बताया कि 'निश्चय पोषण योजना' के अंतर्गत टीबी रोगियों को हर महीने पांच सौ रुपये दिए जाने थे। लेकिन, एसटीएलएस पद पर कार्यरत संविदाकर्मी वीरेंद्र कुमार ने मरीजों के बैंक खातों में रकम भेजने के बजाय अपने और दूसरे सहयोगी के बैंक खातों में यह रकम भेज दी। यह मामला डीएम डॉ. आदर्श सिंह के संज्ञान में आया तो उन्होंने आरोपित संविदाकर्मी पर मुकदमा दर्ज कराने के साथ ही उसकी बर्खास्तगी के भी आदेश दिए।