स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

शहनाइयों और बैंड बाजे की धुन के बीच शुरू होगा देवा मेला, 10 दिनों तक गूंजेंगे वेद मंत्र और कुरान की आयतें

Nitin Srivastva

Publish: Oct 15, 2019 11:04 AM | Updated: Oct 15, 2019 11:07 AM

Barabanki

- देवा मेले (Dewa Mela 2019) में वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट (One District One Product) के तहत सजा विभिन्न उत्पादों का बाजार

- फिरोजाबाद की चूड़ियां-अमरोहा की ढोलकें और कानपुर का खजला बना आकर्षण

- कवि सम्मलेन (Kavi Sammelan) और मुशायरा भी देता है गंगा जमुनी तहजीब को बढ़ावा

- 10 दिनों तक देवा मेले में लगातार चलेंगे साम्प्रदायिक सौहार्द के कार्यक्रम

 

बाराबंकी. कौमी एकता और सद्वाव का प्रतीक ऐतिहासिक देवा मेले (Dewa Mela 2019) का आज से आगाज होगा। शाम पांच बजे शहनाइयों और बैंड बाजे की धुन के बीच मेले का शुभारंभ होगा। आज से दस दिनों तक चलने वाले इस मेले में धार्मिक गतिविधियों के साथ, व्यावसायिक, सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों का अपना अलग स्थान है। शुभारंभ के साथ ही मजार शरीफ (Haji Waris Ali Shah Majar) के कार्यक्रम की भी शुरुआत हो जाएगी। प्रेक्षागृह में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ ही खेल गतिविधियों की भी शुरुआत होगी। आस्था और गंगा जमुनी तहजीब का पर्याय बने इस मेले के दौरान लाखों जायरीन सूफी संत को अकीदत पेश करने आते हैं। देवा मेला के दौरान ऑडीटोरियम (Dewa Mela Auditorium) में सीरतुन्नबी में जहां नात पाक के स्वर गूंजते हैं, वहीं मानस सम्मेलन में चौपाइयां और वेद मंत्र की गूंज सुनाई देती है। कवि सम्मलेन और मुशायरा भी गंगा जमुनी तहजीब को बढ़ावा देते हैं। यहां अनेक लोक संस्कृतियों के प्रदर्शन के साथ ही साम्प्रदायिक सौहार्द के कार्यक्रम निरंतर आयोजित होते हैं।

यह दुकानें देंगी मेले को अलग रंग

देवा मेला में एक जिला-एक उत्पाद (One District One Product) के तहत चयनित उत्पादों की दुकानें मेला को अलग दे रही हैं। यहां फिरोजाबाद की चूड़ियां, बरेली का सुरमा, खुर्जा की क्राकरी, भदोही का कालीन उद्योग, पीलीभीत की बांसुरी, सहारनपुर का लकड़ी का सामान, पानीपत के कंबल, अमरोहा की ढोलकें और मेरठ के खेल के सामानों की दुकानों पर आप अपनी पसंद का सामान सस्ते दामों में खरीद सकते हैं। मेले की मनोरंजन वाली गली में झूलों के शौकीनों के लिए दर्जनों झूले और मौत के कुएं भी तैयार हो गए हैं। यहां रोमांच अनुभव कराने वाले एक से बढ़कर एक झूले मौजूद हैं।


मेले में ऊंट की सवारी का मजा

मेला में लखनऊ के मुनीर, मुकेश और राम अपने तीन ऊंट को लेकर आए हैं। सजे-धजे इन ऊंटों पर सवार होकर आप या बच्चे मेले का आनंद ले सकते हैं। इससे आपको तीस से पचास रुपये खर्च करने होंगे। अस्थाई मछली घर में मछलियां आपका मनोरंजन करेंगी। मेले की यादों को संजोने के लिए फोटो वाली गली में फोटो खिंचवाइए और चंद मिनट में तस्वीर पाइए। बच्चों के खिलौनों की दुकानों की मेले में भरमार है। शिल्पकला की दुकानों पर आप मनचाहे गुच्छे, ब्रेसलेट, टैटू बनवा सकते हैं। अगर भविष्यवाणी में यकीन है तो ऑडीटोरियम के पास दस रुपये में वजन के साथ अपना रिकार्डेड भविष्य भी सुन सकते हैं।


मन मोह लेंगे यह लजीज व्यंजन

देवा मेले (Dewa Mela 2019) में लजीज व्यंजनों की दुकानें सज गई हैं। इनमें एजाज रसूल गेट के पास हलवा पराठा, दादा मियां की मजार के पास बिरयानी और कश्मीरी चाय की दुकान है। यहां पर हो सकता है आप को नंबर भी लगाना पड़े। चाट के शौकीनों के लिए ऑडीटोरियम के सामने फूड जोन है। मेले की खजले की दुकानों पर आपको मीठा, फीका, नमकीन और खोये वाला खजला हर समय तैयार मिलेगा। थोड़ा आगे जाएंगे तो मेला कोतवाली के पास ही खादी के कपड़ों और कंबलों की अलग मार्केट हैं। नुमाइश की दुकानों में गृहउद्योग में बनने वाला आचार, मुरब्बा, आंवले का सामान, कपड़े सहित अनेक उत्पादों की दुकानें इस बार भी लग चुकी हैं।


ये दुकानें भी लगीं

मेले की बक्से वाली गली, मस्जिद के पास चोटी, कंघे वाली गली, ठठेरी बाजार में भी लोग खूब खरीदारी करते हैं। कोतवाली के पास ही आपको विभिन्न विभागों और उत्पादों की प्रदर्शनियां भी देखनें को मिलेंगी।

यह भी पढ़ें: आज से शुरू हो रहा है ऐतिहासिक देवा मेला, इस साल यह कार्यक्रम होंगे आकर्षण का केंद्र