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आदिवासी परिवारों ने ‘सिरा बावसी’ की स्थापना के साथ किए पौधरोपण, बदली गांव की तस्वीर और बन गया ‘पूर्वज वन’

Varun Kumar Bhatt

Publish: Aug 22, 2019 18:14 PM | Updated: Aug 22, 2019 18:14 PM

Banswara

Ancestor forest in banswara : आस्था के आंगन में आम का ‘पूर्वज वन’ महका, आम विहीन हो चुके चिकलीपूना गांव में आम के नब्बे पेड़ हुए आबाद

निर्मल कुमार शाह/बागीदौरा/बांसवाड़ा. आस्था और विश्वास में गजब की ताकत होती है। आस्था की ऐसी ही ताकत से आदिवासी बहुल बांसवाड़ा जिले का चिकलीपूना गांव एक बार फिर आम के वृक्षों से आबाद हो गया और इसकी ‘पूर्वज वन’ के रूप में पहचान कायम हो गई। इस जिले में ‘सिरा बावसी’ आदिवासियों की आस्था का केन्द्र है। आदिवासी समुदाय के लोग परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु के बाद इन पूर्वजों की याद में दीपावली पश्चात काली चौदस अमावस पर पत्थर को श्रंृगारित कर ‘सिरा बावसी’ स्थापित करते हैं। आदिवासियों की इस परम्परा को वृक्ष मित्र मण्डल बागीदौरा ने भावनात्मक रूप से जोडकऱ़ कर आम के पौधरोपण के लिए प्रेरित किया और देखते देखते इलाके की रंगत बदल गई।

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2007 से शुरुआत
मण्डल के अध्यक्ष गौकुल पाटीदार व दिनेश व्यास के मुताबिक वन सुरक्षा प्रबंध समिति चिकली पुना व वृक्ष मित्र मण्डल के संयुक्त तत्वावधान में आदिवासी समाज के लोगों को सिरा बावसी की स्थापना के साथ ही पौधरोपण के लिए तैयार किया और इसके लिए 15 दिसम्बर 2007 को पंचायत समिति आनंदपुरी का चिकली पुना गांव का चयन कर पौधरोपण शुरू किया। गांव में 121 मकान थे। गांव आम के वृक्षों की कटाई व अनदेखी के चलते आमविहीन हो गया था। आम की उन्नत किस्म के पौधे तैयार कर प्रत्येक परिवार के आंगन में इनका रोपण किया गया। परिवार अपने पूर्वज की याद के रूप में उनकी देखभाल करने लगे।

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90 वृक्ष दे रहे फल
मण्डल की ओर से बड़े स्तर पर पौधरोपण किया जा रहा है। इसी का परिणाम है कि चिकली पुना में वर्तमान में आम के 90 वृक्ष फल दे रहे हैं। मण्डल द्वारा उपखण्ड क्षेत्र बागीदौरा में अब तक 10000 पौधे लगाए गए हैं, जिनमें से करीब 6 हजार पेड़ के रूप में छांव, फल- फूल आदि दे रहे हंै।