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शहर में घूमने वाले मवेशियों को पड़ी सब्जी-रोटी और प्लाटिक खाने की आदत, गोशाला में भूसा नहीं खाने से बढ़ी दिक्कत

Varun Kumar Bhatt

Publish: Aug 22, 2019 17:40 PM | Updated: Aug 22, 2019 17:40 PM

Banswara

City Council Banswara : नगर परिषद की कार्रवाई के बाद मंदारेश्वर गोशाला में पहुंची तकरीबन 180 गायें, रोटी जुटाने के लिए आए आगे युवा

बांसवाड़ा. शहर में छुट्टा घूमने वाले मवेशियों को नगर परिषद के द्वारा पकडकऱ गोशाला में छोडऩा शहरवासियों के लिए राहत की खबर है, लेकिन कार्रवाई में पकड़ी गई गायें गौशाला प्रबंधन के लिए समस्या खड़ी कर रही हैं। दरअसल, गो सेवकों का कहना है कि लम्बे समय तक खुला रहने और रोटी, सब्जी या प्लास्टिक खाने वाली ये गायें अब भूसा (काटिया) नहीं खा रही हैं।

करनी पड़ती है सब्जियों की व्यवस्था
गोशाला सचिव भुवन पंड्या ने बतायाकि नगर परिषद के द्वारा पकड़ी गई गायें भूसा नहीं खा रन्ही हैं। उनका पेट भरने के लिए सब्जियां, घास या रोटियां देनी पड़ रही हैं। चूंकि गायें भी बड़ी संख्या में है इसलिए प्रबंधन को व्यवस्था करने में कठिनाई हो रही है। नगर परिषद के अनुबंध के अनुसार गायों के खाने-पीने और रहने की व्यवस्था गो शाला को करनी है।

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रोटी : फेंकें नहीं, हमें दें
सचिव पंड्या ने बतायाकि यदि शहर के घरों से रात की बची रोटियां फेंकने की बजाय इन गायों के लिए दी जाएं तो गायों का पेट भी अच्छे से भर जाएगा और अन्न की बर्बादी भी नहीं होगी। इस संबंध में नगर परिषद अधिकारियों से चर्चा भी की जा रही है।

ऐसे कलेक्ट करेंगे रोटियां
अनुराग ने बतायाकि उनके संगठन की टीम के युवा घरों से रात में ही रोटियां एकत्रित कर लेंगे और गो शाला तक पहुंचा देंगे। ताकि समय से गायों को रोटियां मिल सकें।

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युवा आए आगे, जुटे गो सेवा में
इन गायों की सेवा को लेकर वागड़ बने वृंदावन के युवा सेवा कार्य मेें जुटे हुए हैं। इसके तहत ये युवा सब्जियां खरीदकर गायों की खाने की व्यवस्था कर रहे हैं। इसमें मंदारेश्वर गौशाला भी सहयोग कर रहा है।

रोजाना 500 रोटियों की व्यवस्था
गायों का पेट भरने के लिए युवाओं के द्वारा एक दिन में ही रोज 500 रोटियों की व्यवस्था कर ली गई है। युवा अनुराग सिंघवी ने बतायाकि गायों की समस्या को देखते हुए सोशल मीडिया पर रोटियों के संबंध में मैसेज डाला था। इसके बाद कई लोगों के फोन आए और रोज के लिए 500 रोटियों की व्यवस्था शहर के कई लोगों के द्वारा कर दी गई है।