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भील प्रदेश विद्यार्थी मोर्चा के राज्य स्तरीय सम्मेलन में बोले अतिथि- ‘आदिवासी जाति नहीं, एक समुदाय है’

Varun Kumar Bhatt

Publish: Sep 23, 2019 15:50 PM | Updated: Sep 23, 2019 15:50 PM

Banswara

भील प्रदेश विद्यार्थी मोर्चा के पैनल के उम्मीदवारों को जीताने के लिए बनेगी रणनीति

डूंगरपुर. भील प्रदेश विद्यार्थी मोर्चा का राज्य स्तरीय सम्मेलन व सम्मान समारोह आदिवासी छात्रावास में हुआ। सम्मेलन में आदिवासी एकता, समानता और संगठित होने पर जोर दिया। साथ ही राजनीति के पहले पायदान कॉलेज छात्र संघ चुनाव में डूंगरपुर को छोड़ शेष अन्य जगहों पर मोर्चा के पैनल ही हुई हार के कारणों पर मंथन किया। समारोह में मुख्य अतिथि विधायक राजकुमार रोत ने मौर्चा के पैनल में हारे हुए विद्यार्थियों से कहा कि हम दूसरों के संगठित होने से नहीं अपनी ही कमियों के कारण चुनाव हारे हैं। हमें अपनी कमियों को दूर कर संगठित होकर चुनाव लड़ेंगे, तो हमारी जीत होगी। सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे भंवरलाल परमार ने कहा कि 1950 में राष्ट्रपति की ओर से जारी नोटिफिकेशन में भील को जाति नहीं एक समुदाय माना था। लेकिन, कालांतर में भील समुदाय को मीणा जाति में परिवर्तित कर दिया। यह भील सभ्यता, संस्कृति पर कुठाराघात है। भील जाति नहीं एक समुदाय है। दक्षिणी राजस्थान में हम क्षैत्रीय एकता और अखंडता के लिए लोगों को जोडऩे का काम कर रहे हैं।

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सम्मेलन में विशिष्ट अतिथि रूपालाल डामोर, सोमालाल कोटेड़, वेलाराम घोघरा, प्रो. मणिलाल गरासिया, पार्वती घोघरा, हीरालाल दामा, पवन आमलीया, पोपटलाल थे। स्वागत चंदुलाल बरंडा ने किया। इस मौके पर नानालाल, उमेश डामोर, मेनका, कांतिभाई आदिवासी ने आदिवासी एकता और समानता की बात कही। सीबीईओ रामलाल खराड़ी ने कहा जो जाति अपना इतिहास नहीं जानती वह कभी अपना विकास नहीं कर सकती। इसलिए हमें अपने इतिहास की जानकारी रखनी चाहिए। इस मौके पर विभिन्न जिलों से आए मोर्चा के पैनल उम्मीदवारों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।

अन्य प्रदेशों से भी आए प्रतिनिधि
सम्मेलन में डूंगरपुर, बांसवाड़ा, उदयपुर, सलूम्बर, प्रतापगढ़, कुशलगढ़ सहित मध्यप्रदेश, गुजरात से बड़ी संख्या में मोर्चा के पैनल से चुनाव लडऩे वाले विद्यार्थी व समाज के लोगों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन में जय जौहार, एक तीर एक कमान, आदिवासी एक समान का नारा गूंजा। भोगीलाल पंड्या राजकीय महाविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष कमलेश घाटिया ने बताया कि अगली बार डूंगरपुर की रणनीति के तहत अन्य जगहों पर चुनाव लड़े जाएंगे।