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बांसवाड़ा : माही के कमजोर नहरी तंत्र पर उठे सवाल, जल वितरण समिति में विधायकों और किसानों ने जताया रोष

deendayal sharma

Publish: Oct 23, 2019 09:51 AM | Updated: Oct 23, 2019 09:51 AM

Banswara

बांसवाड़ा जिला मुख्यालय पर जल वितरण समिति की बैठक में माही के कमजोर नहरी तंत्र पर सवाल उठे। माही परियोजना के अभियंताओं के प्रति गढ़ी एवं घाटोल विधायकों तथा किसानों ने आक्रोश जताया। निर्धारित समय से करीब एक घंटा देरी से शुरू हुई बैठक की शुरुआत में घाटोल एवं गढ़ी विधायक ने नहरों की बदहाली एवं सफाई के मुद्दे उठाए और कमजोर नहरी तंत्र की पोल खोलकर रख दी।

बांसवाड़ा. जिला मुख्यालय पर जल वितरण समिति की बैठक में माही के कमजोर नहरी तंत्र पर सवाल उठे। माही परियोजना के अभियंताओं के प्रति गढ़ी एवं घाटोल विधायकों तथा किसानों ने आक्रोश जताया। निर्धारित समय से करीब एक घंटा देरी से शुरू हुई बैठक की शुरुआत में घाटोल एवं गढ़ी विधायक ने नहरों की बदहाली एवं सफाई के मुद्दे उठाए और कमजोर नहरी तंत्र की पोल खोलकर रख दी। साथ ही टेल तक समय पर पानी नहीं पहुंचने की शिकायत की। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि आंकड़े 30 वर्षों से सुनते आ रहे हैंं। मुद्दे की बात करो। जल प्रवाह के लिए आपकी तैयारी क्या है। नहरों को दुरुस्त करने के लिए बड़े पैमाने पर राशि आई उसका क्या हुआ। नहरों में पानी छोडऩे का समय आ गया और सफाई अभी तक नहीं हुई है। जहां सफाई का कार्य चल रहा हैं वहां अपर्याप्त श्रमिक लगे हुए हैं और काम धीमी गति से हो रहा है। इस पर कलक्टर अंतरसिंह नेहरा ने किसानों को साथ लेकर नहरों की युद्ध स्तर पर सफाई व दुरुस्त करने के निर्देश दिए। बैठक में पहली बार जायद में मूंग के लिए भी अप्रेल में पानी छोडऩे पर सहमति हुई। कृषि अनुसंधान केन्द्र के संभागीय निदेशक प्रमोद रोकडिय़ा तथा उप निदेशक बीएल पाटीदार ने बताया कि वर्तमान में जिले में मूंग 11 हजार हैक्टेयर में होती हैं, लेकिन किसानों को पानी की उपलब्धता होती है तो उसका रकबा बढ़ाकर 20 हजार हैक्टेयर तक किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि जायद में यहां के मंूग की गुणवत्ताा बहुत बेहतर होती है। ऐसे में अप्रेल में जल वितरण होने से इसका उत्पादन एवं हैक्टेयर बढ़ेगा। इस पर अप्रेल में मूंग के लिए पानी छोडऩे पर सहमति बनी।गढ़ी विधायक ने बताए नहरों के हालात गढ़ी विधायक कैलाश मीणा ने आंजना माइनर के बिलोदा, परतीपुरा, दुदैली, कुवालिया, मोटी बस्सी, खखैड़ा माइनर, कोटडा के लालपुरा, कोटड़ा, इटाउवा, बिलड़ी, पांचवड़ा, अरथूना, पादेड़ी। आरनोड़ा वितरिका के पालोदा, कोटड़ा बड़ा, नडियादा बड़ा, खोडन, अगरपुरा, मोर, वाकावाड़ा, चौपासांग, पारसोलिया वितरिका के गढ़ी माइनर, टोल सेमलिया, परतापुर से नवापादर, खेरन का पारड़ा मादलदउर, छींच वितरिका से कोहाला भखाड़ा, कुशलपुरा, सागवाडिय़ा, वजवाना, खेड़ा भीमसौर, सालिया तथा नवागांव माइनर भगोरा नाटावाड़ा में पानी नहीं पहुंचने की समस्या बताई। साथ ही कई माइनरों के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी माही के एसई को दी। उन्होंने कहा कि टेल तक पानी पहुचंने में महीनेभर का समय लग जाता है। ऐसे में किसानों को काफी परेशानी होती है। माही परियोजना के पास एजेंडा नहीं बैठक के दौरान किसान नेता रणछोड़ पाटीदार एवं अन्य किसानों ने कहा कि विभाग एनवक्त पर जल वितरण समिति की बैठक करता है। इससे न तो नहरों की सफाई हो पाती है और नहीं अंतिम छोर तक बैठक किसान को पानी मिल पाता है। एलएमसी कचरे से भरी हुई है। ऐसे में जब माही विभाग पानी छोड़ता है तो वह सीधा किसानों के खेतों में जाता है। इससे फसल उत्पादन पर वितरीत प्रभाव पड़ता है। पाटीदार ने कहा कि जहां नहरों को दुरुस्त किया जा रहा हैं वहां उनकी गुणवत्ता पर भी सवाल है। कई जगह नहरों की गुणवत्ता उच्च स्तर की नहीं है। नहरों की तराई भी नहीं हो रही है। पाटीदार ने बताया कि नहरों का निर्माण वर्ष 1964 के समय हुआ था उस समय सिंचाई का क्षेत्र ज्यादा नहीं था, लेकिन वर्तमान में सिंचाई क्षेत्र बढ़ गया है। ऐसे में नहरों के विस्तार एवं अन्य बिंदुओं के बारे में सोचना जरूरी है। हर बार बैठक होती है। इसके बाद भी टेल तक पानी नहीं पहुंचता है। ऐसे में बैठक केवल खानापूर्ति बनकर रह जाती है। पन्द्रह दिन बाद समीक्षा बैठक भी होनी चाहिए। पानी को छोडऩे के अलावा अन्य किसी प्रकार का माही के पास कोई एजेंडा ही नहीं है। अब तो माही विभाग के अधिकारी बैठक की सूचना भी नहीं देते हैं। अखबरों से पढकऱ बैठक में पहुंचते हैं। खरीफ में बहुत हुआ है नुकसान कृषि विभाग के अधिकारियों ने कहा इस बार अतिवृष्टि से खरीफ में बड़े स्तर पर नुकसान हुआ है। ऐसे में किसानों को हुए इस आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए रबी व जायद की फसल से करने के लिए पानी की उपलब्धता समय पर होना जरूरी है। कृषि अनुसंधान केन्द्र के संभागीय निदेशक प्रमोद रोकडिया व कृषि विभाग के उप निदेशक बीएल पाटीदार ने बताया कि टेल तक पानी करीब एक माह में पहुंचता है। ऐसे में समय पर पानी छोडऩा जरूरी है, जिससे बुवाई समय पर करवाई जा सके। 24.75 टीएससी पानी है सिंचाई के लिए माही विभाग के एसई पीएआर खोइवाल ने बताया कि इस साल माही बांध में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी की आवक हुई है। उपलब्ध उपयोग जल 64.75 टीएससी है, जिसमें से 40 टीएससी पानी गुजरात राज्य के लिए आरक्षित है। जबकि 24.75 टीएमसी पानी माही परियोजना के कमाण्ड क्षेत्र 89.हजार 920 हैक्टेयर के लिए उपलब्ध है। मुख्य नहर एवं वितरण प्रणालियों की कुल लंबाई लगभग 2230 किलोमीटर है, जिनकी ओर से उपलब्ध जल दिया जाता है। माही परियोजना का कमाण्ड क्षेत्र बांसवाड़ा, डूंगरपुर एवं उदयपुर जिले में आता है। 120 दिन चलेगा पानी माही के एसई ने बताया कि उक्त नहरों को 120 दिन पानी चलाना प्रस्तावित रखा है, जिनमें रेलनी सहित चार पाण पानी दिया जाएगा, जिसके प्रत्येक पाण में सात रोज नहर बंद रहेगी।