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Banswara : चिटफंड कंपनियों ने बांसवाड़ा में फेरा कई परिवारों के उम्मीदों पर पानी

deendayal sharma

Publish: Sep 14, 2019 11:43 AM | Updated: Sep 14, 2019 11:43 AM

Banswara

चिटफंड कंपनियों ने बांसवाड़ा के लोगों से धोखाधड़ी तो की ही है साथ में उनके अरमानों एवं उम्मींदों पर भी पानी फेर दिया। किसी ने अपने बच्ची की शादी के लिए राशि जमा कराई तो कोई बच्चों की पढ़ाई के लिए रुपए सुरक्षित रखना चाहता था। ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जो इन चिटफंड कंपनियों का शिकार हुए हैं।

बांसवाड़ा. चिटफंड कंपनियों ने बांसवाड़ा के लोगों से धोखाधड़ी तो की ही है साथ में उनके अरमानों एवं उम्मींदों पर भी पानी फेर दिया। किसी ने अपने बच्ची की शादी के लिए राशि जमा कराई तो कोई बच्चों की पढ़ाई के लिए रुपए सुरक्षित रखना चाहता था। ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जो इन चिटफंड कंपनियों का शिकार हुए हैं।
लोगों ने जिस उम्मींद एवं विश्वास के साथ अपनी जीवनभर की गाढ़ी कमाई को इन कंपनियों के हवाले किया वे बड़ी आसानी से उनके रुपयों को पलभर में उड़ा ले गई। दरअसल, चिटफंड कंपनियों के खिलाफ दर्ज होने वाले मामलों में प्रभावी कार्रवाईयों का भी अभाव रहा है। थानों में प्रकरण पहुंचते हैं, लेकिन कार्रवाईयां आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित रहती है। आरोपियों की सम्पत्ति जब्त करने एवं फाइलों में उसको सम्मिलित करने जैसी कार्रवाईयां नहीं हो पाई। ऐसे में इस तरह के मामले में फौरी कार्रवाईयां ही देखने को मिलती आई है।

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बढ़ापा सुधरना तो दूर दुख दे गया
परतापुर के लोहावाड़ा निवासी मुकेश जैन ने बताया कि बुढ़ापा सुधर जाए इसके लिए करीब 36 माह पूर्व आदर्श क्रेडिट कॉपरेटिव सोसायटी में 50 हजार रुपए निवश किया था। कंपनी को 36 माह बाद 75 हजार रुपए देना था,लेकिन अभी तक कोई ठिकाना नहीं हैं। इधर, बांसवाड़ा निवासी पुखराज पुत्र गजराज ने बताया कि बच्चों की फीस एवं अन्य कार्यों के लिए वर्ष 2013 में आरडी करवाई थी, लेकिन अभी तक कोई ठिकाना नहीं हैं।
बच्चों की फीस के लिए की थी जमा राशि
अरथूना निवासी मुकेश ने बताया कि सहारा इंडिया में करीब 40 हजार की आरडी करवाई थी, जिससे बच्चों की स्कूल की फीस एवं अन्य खर्चे पूरे हो सके, लेकिन 15 माह गुजरने के बाद भी अभ तक कोई ठिकाना नहीं हैं। इधर, सालिया निवासी मुकेश पटेल ने बताया कि उसने एचबीएन कंपनी में वर्ष 2008 से 2012 तक आरडी के तहत रुपए जमा कराए। साथ में अपने साथियों से भी निवेश करवाया। अब हालत ये है कि न तो कंपनी का कोई ठिकाना है और न रुपए वापस आ रहे हैं। ऐसे में जिन लोगों को उसने जोड़ा वे भी रुपयों की मांग करते हैं।
झांसे में गंवा दी बच्चों की शादी के लिए बचाई राशि
अरथूना निवासी मोहन लाल मेहता ने बताया कि आदर्श क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी में उसने तीन लाख रुपए जमा कराए। इसके अलावा उसके साथियों में रामसिंह ने चुण्डावत ने पांच लाख, राजमल पटेल ने एक लाख और जयकिशन ने तीन लाख रुपए जमा कराए। इनके एजेंट ने विभिन्न आकर्षक योजना का झांसा देकर उनसे निवेश करवाया। अबउनका रुपया नहीं लौटाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बुढ़ापा अच्छे बीते और बच्चों की शादी में रुपया काम आए इसलिए निवेश किया, लेकिन अब रुपए वापस नहीं आने पर उन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
भूखण्ड तक बिक्री कर दिया
सदर थाना इलाके की मोना जोशी ने बताया कि उसने वर्ष 2018 के फरवरी में आदर्श क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोयायटी लिमिटेड की आपकी बेटी योजना के तहत करीब 18-20 लाख रुपए लगाए थे। कंपनी प्रतिनिधियों ने छह साल में उक्त राशि को डबल करने का झांसा दिया था। इसके बाद अभी तक राशि का ठिकाना नहीं हैं। मोना ने बताया कि उसने अपनी जीवनभर की कमाई के साथ एक भूखण्ड को बिक्री कर उक्त योजना में निवश किया था। बच्चों के भविष्य की खातिर निवेश किया था, लेकिन कंपनी ऐसा फर्जीवाड़ा करेगी किसी को पता नहीं था।