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असंतोष की ‘वही आग’ अब भाजपा में

Santosh Kumar Pandey

Publish: Aug 22, 2019 16:54 PM | Updated: Aug 22, 2019 16:54 PM

Bangalore

  • बुझाने की जिम्मेदारी अब सीएम येडियूरप्पा पर
  • मंत्रीपद नहीं मिलने पर कई विधायकों ने जताई सार्वजनिक नाराजगी

बेंगलूरु. कैबिनेट विस्तार के बाद जिस परेशानी से कांग्रेस-जद-एस गठबंधन सरकार गुजरी कुछ वैसी ही परिस्थितियां सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के सामने भी पेश आई हैं। कैबिनेट में जगह नहीं मिलने से पार्टी के भीतर असंतोष की आग भडक़ उठी है लेकिन मुख्यमंत्री बीएस येडियूरप्पा को भरोसा है कि वे नाराज विधायकों को मनाने में कामयाब होंगे।

हुक्केरी के विधायक उमेश कत्ती, होन्नली के विधायक एमपी रेणुकाचार्य, शिरहट्टी के विधायक रामप्पा लमाणी, शोरापुर के विधायक राजू गौड़ा ने मंत्री नहीं बनाए जाने पर खुलकर सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जाहिर की है। येडियूरप्पा ने संवाददाताओं से कहा कि वे नाराज नेताओं से बात करेंगे। कत्ती के साथ उन्होंने एक घंटे बात की। वह इसलिए नाराज हैं क्योंकि उन्हें मंत्रीपद दिया जाना चाहिए था। उनकी नाराजगी दूर की जाएगी। वे रेणुकाचार्य से भी मिलेंगे जो असंतुष्ट हैं। बीजापुर (सिटी) के विधायक बसनगौड़ा पाटिल यत्नाल, हनगल के विधायक सीएम उदासी और राजू गौड़ा भी उनसे मिले हैं। सूत्रों का कहना है कि येडियूरप्पा ने कत्ती और यत्नाल से कहा है कि अगले कैबिनेट विस्तार में उनके नामों पर विचार किया जाएगा। येडियूरप्पा ने उनसे यह भी कहा कि अधिक लिंगायत नेताओं को कैबिनेट में शामिल किए जाने से एक गलत संदेश भी गया है।

हारे हुए विधायक को मंत्री क्यों बनाया: रेणुकाचार्य
इससे पहले रेणुकाचार्य ने पत्रकारों को बताया कि वे लक्ष्मण सवदी को कैबिनेट में शामिल किए जाने को लेकर नाराज हैं। उन्होंने कहा कि वे अन्य विधायकों की तरह नहीं हैं। उमेश कत्ती 8 बार के विधायक हैं। उन्हें क्यों नहीं शामिल किया गया। दावणगेरे से छह विधायक चुनकर आए हैं। उनमें से एक को भी मौका नहीं मिला। लोग आज उंगली उठा रहे हैं कि जो चुनाव हार गया उसे मंत्रिमंडल में कैसे शामिल किया गया। दरअसल, लक्ष्मण सवदी अथनी विधानसभा से चुनाव हार गए। उन्हें शिकस्त देेने वाले विधायक कांग्रेस विधायक महेश कुमटहल्ली ने भी विधानसभा से इस्तीफा दिया था जिन्हें स्पीकर ने अयोग्य ठहराया है। पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी से संपर्क स्थापित किए जाने की खबर पर पूर्व मंत्री रेणुकाचार्य ने कहा कि जब तक येडियूरप्पा राजनीति में हैं तब तक वे पार्टी के खिलाफ नहीं जाएंगे। वे येडियूरप्पा और पार्टी को कभी धोखा नहीं देंगें। अगर उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचती है तो वे इस्तीफा दे देंगे मगर किसी दूसरे के दरवाजे पर नहीं जाएंगे।

विस्तार में नहीं मिली जगह तो इस्तीफा: कत्ती
वहीं, उमेश कत्ती ने कहा कि राज्य मत्रिमंडल के अगले विस्तार के दौरान यदि उनको मंत्री नहीं बनाया गया तो उनके कदम अपने घर की तरफ बढ़ जाएंगे। संवाददाताओं के साथ बातचीत में उन्होंने मंत्री पद नहीं मिलने पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने बुधवार को सेवन मिनिस्टर्स क्वाटर्स में बेलगावी जिले के भाजपा विधायकों के साथ बैठक की। उन्होंने दो टूक कहा कि मंत्रिमंडल विस्तार के दूसरे चरण में भी यदि उनको मंत्री नहीं बनाया जाता है तो वे विधायक पद से त्यागपत्र देकर घर चले जाएंगे। पिछले लोकसभा चुनाव में चिक्कोड़ी सीट से भाई रमेश कत्ती को पार्टी का टिकट नहीं मिलने से कत्ती पहले ही नाराज थे। अब मंत्री नहीं बनाने की वजह से उनकी नाराजगी और बढ़ गई है।

जद-एस ने दिया कत्ती को न्यौता
उधर, जद-एस नेता बसवराज होरट्टी ने नाराज उमेश कत्ती से मुलाकात की और उनको जद-एस में लौट आने का न्योता दिया। कत्ती पहले जनतादल-एस में थे लेकिन बाद में वे भाजपा में शामिल हो गए थे। मंत्रिमंडल के हाल में हुए विस्तार के बाद भाजपा में उभरी नाराजगी का फायदा उठाने के लिए जनता दल-एस के नेताओं ने भाजपा के असंतुष्टों से संपर्क साधा है और उनको पार्टी में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है।