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थम सी गई थीं वैज्ञानिकों की धड़कनें

Rajendra Shekhar Vyas

Publish: Aug 20, 2019 20:53 PM | Updated: Aug 20, 2019 20:53 PM

Bangalore

चांद को कक्षा में स्थापित करने के समय चरम पर था तनाव
तनाव बढ़ा है, कम नहीं हुआ: शिवन

बेंगलूरु. देश के दूसरे चंद्र मिशन (moon mission) चंद्रयान-2 को चंद्रमा की कक्षा में पहुंचाने के लिए अत्यंत जटिल मैनुवर लूनर आर्बिट इनसर्शन (LOI) के समय इसरो वैज्ञानिकों की धड़कनें थम सी गई थीं। एक मामूली चूक से पूरा मिशन विफल हो सकता था और हर एक गुजरता पल निर्णायक था।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अध्यक्ष K. Shivan ने कहा कि 'Chandrayan-2 को चंद्रमा की कक्षा में स्थापित करते वक्त हमारे दिल की धड़कनें थम सी गई थीं। ' उन्होंने कहा कि इसरो वैज्ञानिकों ने जब चंद्रयान-2 को चंद्रमा की कक्षा में स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू की तब धड़कनें काफी तेज हो गईं। एक ऐसा पल आया जब लगभग 30 मिनट तक दिल की धड़कनें रुक सी गई थीं। सफलता मिलने के बाद बावजूद मिशन को लेकर तनाव कम नहीं हुआ है। लैंडर विक्रम के चांद के दक्षिणी धु्रव पर लैंडिंग का 15 मिनट का समय बेहद डरावना है।'
शिवन ने कहा कि 7 सितंबर को चंद्रमा की सतह पर Soft landing कराने की प्रक्रिया के दौरान स्थिति काफी अलग और तनाव भरी होगी, क्योंकि इसरो ने ऐसा पहले कभी नहीं किया है। उन्होंने कहा 'अभी तनाव बढ़ा है, कम नहीं हुआ है। '
लैंडिंग में सफल हुए सिर्फ 37 फीसदी मिशन
चांद पर लैडिंग में सिर्फ 37 फीसदी मिशन ही सफल हुए हैं, जबकि 63 फीसदी मिशन विफल हो गए। इसरो को भरोसा है कि वह पहले ही प्रयास में सफल होगा, क्योंकि उसने दूसरे की विफलताओं से काफी कुछ सीखा है। विशेष रूप से इजरायली मिशन की विफलता से यह सीखा कि लैंडर को अधिक से अधिक स्वचालित होना चाहिए। सेंसर की भूमिका (निरुपण) इसमें काफी अहम होगी।
सावधानी से करना होगा लैंडिंग स्थल का चयन
इसरो ने इससे पहले कहा था कि चांद की धूल लैंडिंग में एक बड़ी समस्या होगी, लेकिन शिवन ने एक विशेष प्रकार की चुनौती के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि अगर लैंडर ऐसी जगह लैंड करता है, जहां चंद्रमा की सतह का ढालान 12 डिग्री से अधिक है या कोई ऐसी जगह जहां लैंडर की राह में कोई बोल्डर पर पड़ जाए तो वह लडखड़़ा सकता है। लैंडिंग स्थल का चयन Lander खुद करेगा। इसके लिए लैंडिंग स्थल की कुछ तस्वीरें लैंडर में अपलोड की गई हैं। जब लैंडर चांद के सतह के करीब पहुंचेगा तो वह सतह की कुछ तस्वीरें लेगा और Upload की गई तस्वीरों से उसका मिलान करेगा। उसी आधार पर वह लैंडिंग स्थल का चयन करेगा।
लैंडिंग के समय धरती से निकटतम दूरी पर होगा चांद
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि चंद्रयान-2 को जब चांद की कक्षा में पहुंचाया गया तब चंद्रमा
Earth से अधिकतम दूरी पर था। लेकिन, जब लैंडर विक्रम चांद की धरती पर उतरेगा तब चंद्रमा धरती से निकटतम दूरी पर होगा। उन्होंने कहा कि चंद्रमा की कक्षा ऐसी है कि पृथ्वी से उसकी दूरी घटती-बढ़ती रहती है।
मानव बस्तियां बसाने के लिहाज से अहम है मिशन
शिवन ने कहा कि चंद्रयान-2 से मिलने वाले आंकड़े वहां मानव बस्तियां बसाने अथवा आउटपोस्ट बनाने के लिहाज से काफी अहम होगा। उन्होंने कहा कि चंद्रयान-2 चांद के उस हिस्से में उतरने जा रहा है, जहां सबसे अधिक प्राकृतिक संसाधन है। अगर चांद पर जीवन संभव है तो दक्षिणी धु्रव एक महत्वपूर्ण स्थल हो सकता है। चंद्रयान-2 मिशन से यहां के बारे में काफी अहम इनपुट मिल सकते हैं जो भविष्य में चांद पर बस्तियां बसाने के लिहाज से महत्वपूर्ण होंगे।