स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

राज्यपाल के हस्तक्षेप पर उठे सवाल

Rajendra Shekhar Vyas

Publish: Jul 20, 2019 23:29 PM | Updated: Jul 20, 2019 23:29 PM

Bangalore

सदन की कार्यवाही में दखल का अधिकार नहीं: शिवलिंगे गौड़ा

बेंगलूरु. राज्यपाल वजूभाई वाळा द्वारा विधानसभा में विश्वास मत की प्रक्रिया शुक्रवार दोपहर 1:30 बजे तक पूरा करने से संबंधित निर्देश पर शुक्रवार को विधानसभा में सत्ता पक्ष के सदस्यों ने रोष प्रकट किया।

जद-एस के शिवलिंगे गौड़ा ने कहा कि सदन की कार्यवाही में हस्तक्षेप का राज्यपाल को अधिकार नहीं है। सदन की कार्य सूचीकैसी हो और सदन की कार्यवाही कहां तक चले इसके बारे में विधानसभा अध्यक्ष की अध्यक्षता वाली सदन की कार्य मंत्रणा समिति ही तय करती है। ऐसे में राज्यपाल को सदन की कार्यसूची में बदलाव करने का अधिकार नहीं है। विश्वास मत पर बहस के लिए कितना समय दिया जाए इसके बारे में कार्य मंत्रणा समिति ही फैसला कर सकती है।
सदन में ग्रामीण विकास तथा पंचायत राज मंत्री कृष्णबैरे गौड़ा ने भी इस तर्क का समर्थन करते हुए कहा की कार्य मंत्रणा समिति के फैसले के तहत ही सदन में मुख्यमंत्री ने गुरुवार को विश्वास प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव पर सदन में बहस चल रही है। अब इस कार्यसूची के तहत सदन की कार्यवाही चलाना विधानसभा अध्यक्ष का दायित्व है। ऐसे में अब इस मोड़ पर राज्यपाल सदन की कार्यवाही को निर्देशित नहीं कर सकते है। उन्होंने कहा कि सदन की कार्यवाही चलाने का अधिकार केवल विधानसभा अध्यक्ष को है। विधानसभा अध्यक्ष के इस अधिकार को चुनौती नहीं दी जा सकती है?
भाजपा ने किया समर्थन
गौड़ा के इस बयान का भाजपा नेता बसवराज बोम्मई ने विरोध करते हुए कहा कि कृष्णबैरे गौड़ा अपनी अनुकूलता देखकर शीर्ष अदालत के अरुणाचल प्रदेश राज्य से संबधित फैसले के आधार पर तर्क पेश कर रहें है। अरुणाचल प्रदेश का मामला तथा मौजूदा सदन में विश्वास प्रस्ताव का मामला अलग होने के कारण शीर्ष अदालत का यह फैसला अब सदन में चल रही कार्यवाही के लिए लागू नहीं होता है। राज्यपाल को संविधान की धारा 175 के तहत मुख्यमंत्री तथा राज्य सरकार को निर्देश देने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि राज्यपााल ने अपने आदेश में सदन की कार्यवाही की सूची में कोई फेरबदल नहीं किया है। बोम्मई के इस तर्क का भाजपा के नेता मधुस्वामी ने समर्थन किया उसके पश्चात विधानसभा अध्यक्ष के हस्तक्षेप के बाद इस मामले का पटाक्षेप हुआ।