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तीन बार नहीं हुआ राज्यपाल के निर्देशों का पालन

Rajendra Shekhar Vyas

Publish: Jul 20, 2019 01:24 AM | Updated: Jul 20, 2019 01:24 AM

Bangalore

  • विश्वास मत प्रस्ताव पर चर्चा रही अधूरी
  • सत्ता पक्ष ने राज्यपाल के दखल पर किए तीखे प्रहार
  • सदन सोमवार सुबह तक के लिए स्थगित

बेंगलूरु.Karnatak Vidhan Sabha में मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी द्वारा पेश Vote of confidence प्रस्ताव पर शुक्रवार को भी चर्चा अधूरी रहने से मतदान नहीं हो सका। governor वजूभाई वाळा ने सरकार को तीन बार बहुमत साबित करने के लिए समय-सीमा निर्धारित की लेकिन उसका अनुपालन नहीं हुआ। रात करीब 8 :25 बजे स्पीकर आर.रमेश कुमार ने सदन की कार्यवाही सोमवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
राज्यपाल ने एक बार स्पीकर को पत्र भेज कर देर रात तक बहुमत परीक्षण कराने को कहा जिसे स्पीकर ने सदन में पढ़कर सुनाया। इसके बाद दो और पत्र मुख्यमंत्री को भेजे। पहले पत्र में शुक्रवार 1:30 बजे तक बहुमत साबित करने का निर्देश दिया लेकिन वोटिंग नहीं हुई। इसके बाद राज्यपाल ने एक और पत्र Kumarswamy को भेजा और शुक्रवार शाम 6 बजे तक बहुमत साबित करने के लिए वोटिंग कराने का वक्त दिया।
राज्यपाल ने लिखा 'मैं पहले ही कह चुका हूं कि आपके पास बहुमत नहीं है और आप बहुमत परीक्षण के लिए बहस को बढ़ा रहे हैं। मेरे पास ऐसी लगातार रिपोट्र्स आ रही हैं कि legislators की खरीद-फरोख्त हो रही है। मेरी आपसे अपेक्षा है कि आप जल्द से जल्द विधानसभा में अपनी सरकार का बहुमत साबित करें।'
चर्चा पूरी होने तक वोटिंग नहीं: स्पीकर
राज्यपाल द्वारा समय-सीमा निर्धारित करने पर मुख्यमंत्री ने बहुमत परीक्षण का फैसला स्पीकर पर छोड़ दिया। स्पीकर ने कहा कि जब तक विश्वास मत पर चर्चा पूरी नहीं होती बहुमत परीक्षण नहीं हो सकता। अध्यक्ष ने कहा कि प्रक्रिया का पालन किया जाना है। चर्चा के बाद नियमों के अनुसार, अगर जोर दिया गया, तो इस पर मतदान कराया जाएगा। उन्होंने भाजपा सदस्यों से कहा कि जब तक चर्चा चलेगी, वे मत-विभाजन के लिए दबाव नहीं बना सकते।
हालांकि, राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री कुमारस्वामी को भेजे गए पत्र के अनुसार भाजपा ने डेढ़ बजते ही विभाजन पर जोर दिया। इस पर, राज्यपाल की भूमिका को लेकर भाजपा और कांग्रेस के सदस्यों के बीच गरमागरम बहस हुई और व्यवधान के बीच सदन की कार्यवाही तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
राज्यपाल के पत्र से आहत हूं: कुमारस्वामी
राज्यपाल ने इसके बाद दूसरा पत्र भेजा और शाम 6 बजे तक बहुमत परीक्षण कराने को कहा। इस पर मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने कहा कि वे राज्यपाल के दूसरे पत्र से आहत हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि राज्यपाल विधानमंडल के लोकपाल के रूप में कार्य नहीं कर सकते। वह राज्यपाल की आलोचना नहीं करेंगे लेकिन, अध्यक्ष केआर रमेश कुमार से यह तय करने का अनुरोध करते हैं कि राज्यपाल को इसके लिए समय सीमा तय करने का अधिकार है या नहीं। वे बहुमत परीक्षण का फैसला स्पीकर पर छोड़ते हैं। यह दिल्ली से निर्देशित नहीं होगा। 'राज्यपाल द्वारा भेजे गए पत्र से मेरी रक्षा करें।'