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कांग्रेस-जद-एस ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका

Rajendra Shekhar Vyas

Publish: Jul 20, 2019 01:37 AM | Updated: Jul 20, 2019 01:37 AM

Bangalore

व्हिप और राज्यपाल के निर्देश पर मांगा स्पष्टीकरण

बेंगलूरु. राज्य में जारी सियासी उठापटक के बीच कांग्रेस और जनता दल-एस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। प्रदेश कांग्रेस प्रभारी दिनेश गुंडूराव ने सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को एक याचिका दाखिल कर पिछले 17 जुलाई को दिए गए फैसले को चुनौती दी है।
याचिका में गुजारिश की गई है कि कोर्ट यह स्पष्ट करे कि 15 विधायकों को सदन की कार्यवाही से छूट देने का आदेश पार्टी व्हिप जारी करने के संवैधानिक अधिकार पर लागू होता है या नहीं। यह भी कहा गया है कि 15 बागी विधायकों के बारे में सुप्रीम कोर्ट का आदेश पार्टी के अधिकारों का उल्लंघन है। पार्टी को 10 वीं अनुसूची के तहत अपने विधायकों को व्हिप जारी करने का पूरा अधिकार है।
याचिका में दावा किया गया है कि शीर्ष अदालत के आदेश से अपने विधायकों को व्हिप जारी करने का राजनीतिक दल का अधिकार कमजोर हुआ है। इस आदेश पर स्पष्टीकरण जारी करना चाहिए कि बागी विधायकों को विधानसभा की कार्यवाही में हिस्सा लेने के लिये बाध्य नहीं किया जाएगा। कांग्रेस ने कहा था कि इस मामले में पार्टी है ही नहीं, फिर उसके अधिकार को सुप्रीम कोर्ट कैसे रोक सकता है।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 15 बागी विधायकों के इस्तीफों पर अपने अंतरिम फैसले में कहा था कि इस्तीफों पर निर्णय करने का अधिकार स्पीकर केआर रमेश कुमार को है वहीं बागी विधायक सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेने या नहीं लेने के लिए स्वतंत्र हैं। विधायकों को इसके लिए बाध्य नही किया जा सकता।
उधर, सीएम एचडी कुमारस्वामी ने भी एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की है। कुमारस्वामी की ओर से दायर याचिका में भी सुप्रीम कोर्ट के 17 जुलाई के आदेश पर स्पष्टीकरण की मांग की गई है साथ ही कुमारस्वामी ने दावा किया है कि जब विश्वास मत पर कार्यवाही चल रही है तो राज्यपाल वजूभाई वाळा विश्वास मत पर कोई निर्देश नहीं दे सकते।
राज्यपाल ने निर्देश जारी किया कि विश्वास मत दोपहर 1:30 बजे से पहले पूरा कर लिया जाए, जो वह पूरा नहीं कर सकते। कुमारस्वामी ने शीर्ष अदालत को बताया कि विश्वास प्रस्ताव पर बहस किस तरह से हो इसे लेकर राज्यपाल सदन को निर्देशित नहीं कर सकते। राज्यपाल के निर्देश शीर्ष अदालत के पूर्व के फैसले के पूरी तरह विपरीत है। जब विश्वास मत पर कार्यवाही चल रही है तो राज्यपाल कोई निर्देश नहीं दे सकते।