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कर्नाटक में इस नए संकट से कैसे पार पाएगी कांग्रेस

Priya Darshan

Publish: Sep 15, 2019 18:29 PM | Updated: Sep 15, 2019 18:29 PM

Bangalore

Wrong decision of high command will increase the gap between leaders and workers
नेताओं की गुटबाजी ने बढ़ाई कांग्रेस आलाकमान की मुसीबत

बेंगलूरु. विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष पद के लिए कांग्रेस में घमासान मचा है। यह जगजाहिर है कि कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस समिति में मल्लिकार्जुन खरगे, सिद्धरामय्या तथा डीके शिवकुमार के गुट हैं।

विधानसभा में विपक्ष नेता पद के दावेदार पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या इस मामले को लेकर पार्टी आलाकमान से अभी तक कोई स्पष्ट सूचना नहीं मिलने से निराश हैं।

बताया जा रहा है कि अब वे कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाकर आलाकमान को संदेश देंगे। इस पद के लिए पूर्व मंत्री एचके पाटिल तथा डॉ. जी परमेश्वर ने भी दावेदारी पेश की है।

पार्टी में अब मूल कांग्रेसी तथा दूसरी पार्टी से नेताओं के बीच वर्चस्व की जंग चल रही है। लिहाजा नेता प्रतिपक्ष का चयन करना कांग्रेस आलाकमना के लिए टेढ़ी खीर बना है।

विशेषज्ञों के अनुसार कांग्रेस आलाकमान को ऐसे नेता की तलाश में है जो सभी को साथ में लेकर चले। इसलिए इस पद की दावेदारी की आड़ में चल रही राजनीति को देखते हुए फूंक-फूंक कर कदम रखे जा रहे हैं।

कांग्रेस की स्थिति नाजुक होने के कारण आलाकमान का गलत फैसला नेता तथा कार्यकर्ताओं के बीच के फासले बढ़ा सकता है।

हाल में इस पद की दावेदारी के साथ पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने दिल्ली का दौरा किया और वरिष्ठ नेता एके ऐंटोनी समेत कई नेताओं के साथ विचार-विमर्श कर राज्य की स्थितियों की जानकारी दी।

सिद्धरामय्या को ही विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बने रहने के लिए कांग्रेस के कई विधान परिषद सदस्यों ने सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल से मंत्रणा की।

बताया जा रहा है कि सिद्धरामय्या का सोनिया गांधी के साथ बैठक के प्रयास भी विफल रहा है, इससे सिद्धरामय्या शुक्रवार देर रात दिल्ली से लौट आए।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि 18 सितंबर को विधायक दल की बैठक की आड़ में अपनी ताकत का अहसास कराना ही सिद्धरामय्या की वास्तविक मंशा है।