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भाजपा के दलित सांसद को उच्च जाति के गांव में घुसने से रोका गया

Ram Naresh Gautam

Publish: Sep 17, 2019 17:39 PM | Updated: Sep 17, 2019 19:08 PM

Bangalore

  • गांव में घुसने से रोके गए सांसद महोदय अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के मडिगा समुदाय से ताल्लुक रखते हैं...सांसद ने चेतावनी भी दी कि जाति या समुदाय के नाम पर इस तरह से व्यवहार करना अपराध है, लेकिन उनकी चेतावनी को अनसुना कर दिया गया।

बेंगलूरु. कर्नाटक (Karnataka) की राजधानी बेंगलूरु (Bengaluru) से सटे तुमकूरु (Tumkuru) जिले में भाजपा (BJP) के एक दलित (DALIT) सांसद (MP) को एक गांव में सिर्फ इसलिए नहीं घुसने दिया कि वह दलित वर्ग से हैं।

चित्रदुर्गा (Chitradurga) आरक्षित लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए ए. नारायणस्वामी (A. NARAYANSWAMY) सोमवार शाम अपने संसदीय क्षेत्र में आने वाले तुमकूरु जिले के गोल्लारहट्टी (GOLLARHATTI) गांव की ओर आए थे।

स्थानीय लोगों को मानना है कि यह गांव सिर्फ गोल्ला (यादव) समुदाय के लिए बसाया गया है। सांसद महोदय जैसे ही गांव के बाहर पहुंचे, उन्हें स्थानीय लोगों के एक समूह ने रोक लिया।

उनसे कहा गया कि चूंकि वह दलित हैं, इसलिए उन्हें गांव में नहीं घुसने दिया जाएगा। दिलचस्प बात यह है कि सांसद के साथ जो गैर-दलित लोग थे, उन्हें गांव में जाने से नहीं रोका गया।

नारायणस्वामी अनुसूचित जाति (Sheduled Caste) वर्ग के मडिगा समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। चेतावनी भी काम नहीं आई जब गांव वाले सांसद को उनकी जाति के नाम पर रोक रहे थे तब नारायणस्वामी ने चेतावनी भी दी कि जाति या समुदाय के नाम पर इस तरह से व्यवहार करना अपराध है, लेकिन उनकी चेतावनी को अनसुना कर दिया गया।

गांव वालों का कहना था कि गांव में आज तक कोई दलित ने पैर नहीं रखे हैं, इसलिए वे उन्हें नहीं जाने देंगे। करीब डेढ़ घंटे तक मान-मनौव्वल के बाद भी जब गांव वालों ने उनको गांव में घुसने नहीं दिया तो वे वहां से चलते बने।

नहीं की पुलिस से शिकायत गौरतलब है कि लोकसभा चुनावों में नारायणस्वामी को सांसद निर्वाचित करने में गोल्ला समुदाय की अहम भूमिका रही है, फिर भी जब माननीय उनके गांव पहुंचे तो उन्हें दुव्र्यवहार झेलना पड़ा।

हालांकि नारायणस्वामी ने कहा कि उन्हें गांव वालों के व्यवहार से दुख और पीड़ा हुई है, लेकिन वे पुलिस से शिकायत नहीं करेंगे। लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है।

उधर, तुमकूरु जिला पुलिस अधीक्षक (SP) ने मामले का संज्ञान लेते हुए स्थानीय अधिकारियों से रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।