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प्रदेश में करीब 70 लाख लोग हेपेटाइटिस ‘बी’ और करीब 12 लाख लोग हेपेटाईटिस ‘सी’ से पीड़ित

Akansha Singh

Publish: Jul 29, 2019 09:01 AM | Updated: Jul 29, 2019 09:01 AM

Balrampur

हेपेटाइटिस के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए हर वर्ष 28 जुलाई को विश्व हेपेटाईटिस दिवस (World Hepatitis Day) मनाया जाता है।

बलरामपुर. हेपेटाइटिस के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए हर वर्ष 28 जुलाई को विश्व हेपेटाईटिस दिवस (World Hepatitis Day) मनाया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) हर वर्ष विश्व हेपेटाईटिस दिवस की नई नई थीम रखता है। इस वर्ष की थीम है ‘‘हेपेटाइटिस को खत्म करने में निवेश करें’’। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. घनश्याम सिंह ने बताया कि विश्व हेपेटाईटिस दिवस मनाने का लक्ष्य है वायरल हेपेटाइटिस (viral hepatitis) के बारे में लोगों को जागरूक करना। इसके अतिरिक्त यह दिवस लोगों में इस बीमारी की रोकथाम, परीक्षण और उपचार के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए भी मनाया जाता है। मरीज में बीमारी के शुरूआत में संक्रमण के लक्षण दिखाई नहीं देते इसलिए हेपेटाइटिस ‘बी’ (hepatitis B') और ‘सी’ (hepatitis c)'का पता लगाने के लिए खून की सामान्य जांच बहुत जरूरी है। प्रदेश में 60 से 70 लाख लोग हेपेटाइटिस ‘बी’ और करीब 12 लाख लोग हेपेटाईटिस ‘सी’ से पीड़ित हैं। जब मरीज को बीमारी का पता चलता है तो उसे लिवर सिरोसिस या फिर लिवर कैंसर हो चुका होता है। ऐसी स्थिति में मरीज को लिवर ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।

एसीएमओ व जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा. अरूण कुमार ने बताया कि लिवर ट्रांसप्लांट के लिए आने वाले अधिकतर मरीजों में बीमारी का कारण हेपेटाइटिस सी है। बीमारी के शुरूआत में मरीज में कोई लक्षण दिखाई नहीं देते इसीलिए संक्रमण का पता नहीं चलता है। लोग जांच भी नहीं कराते जिसके कारण संक्रमण छिपा रह जाता है। गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच (गर्भावस्था के दौरान होने वाली जांच), विदेश जाने के लिए वीजा लेते समय, ऑपरेशन कराने या फिर रक्तदान के समय हेपेटाइटिस बी व सी की जांच की जाती है। इस संक्रमण के हाईरिस्क ग्रुप में संक्रमित मां से बच्चे, चिकित्सा पेशे से जुड़े लोग, ऐसे मरीज जिन्हें रक्त चढ़ाया गया हो, सिरिंज से ड्रग लेने वाले आते हैं। इसलिए संक्रमण का पता लगाने के लिए जांच सबसे जरूरी है।

जिला कार्यक्रम प्रबंधक शिवेन्द्र मणि ने बताया कि हेपेटाईटिस का संक्रमण दूषित रक्त के संर्पक में आने और असुरक्षित यौन संबंध से भी फैलता है। संक्रमित व्यक्ति के साथ रहने से सामान्य व्यक्ति में किसी भी तरह से संक्रमण की आशंका नहीं रहती है। हेपेटाइटिस बी वायरस से बचाव का एक मात्र उपाय टीकाकरण है। अब ऐसे टीके आ गए है, जिससे हेपेटाइटिस बी बचाव संभव है। जागरूकता के अभाव में 30 प्रतिशत से भी कम लोगों को इस बीमारी के बारे में जानकारी है।

क्या है हेपेटाइटिस

हेपेटाइटिस लिवर से संबंधित बीमारी है। जब हेपेटाइटिस वायरस का संक्रमण हो जाता है तो लिवर से अधिक मात्रा में एंजाइम्स निकलने लगते हैं। शरीर के विषैले तत्व भी बाहर नहीं निकलते, जिससे शरीर को नुकसान पहुंचता है। हेपेटाइटिस बी और सी रक्त के संक्रमण से होने वाली बीमारी है। इस वायरस के संक्रमण का शिकार बच्चे बहुत तेजी से हो रहे हैं, दोनों रोगों में संक्रमण के शुरुआती लक्षण नहीं दिखते हैं। यदि गर्भवती मां को हेपेटाइटिस बी हो तो पैदा होने वाले बच्चे को भी संक्रमण होने की आशंका होती है।

हेपेटाईटिस बी का इलाज संभव

जिन लोगों को हेपेटाइटिस सी के संक्रमण के बढ़ने से लिवर सिरोसिस होता है, उन्हें लिवर कैंसर होने का भी अधिक खतरा होता है। लिवर सिरोसिस के लगभग 20 फीसदी रोगियों को बीमारी के अंतिम चरण में कैंसर हो सकता है। सी वायरस शरीर में ही पलता रहता है तो मरीज की स्थिति गंभीर हो जाती है। खून की जांच से इस रोग का पता लगाया जा सकता है। भारत में सी वायरस जीनो टाइप थ्री का इलाज 24 हफ्ते में और जीनो टाइप वन का इलाज 48 हफ्ते में हो जाता है। इस बीमारी के 80 फीसदी रोगियों को ठीक किया जा सकता है। हेपेटाइटिस बी वैक्सीन वायरस के प्रभाव को रोकने में और इस संक्रमण के होने की संभावना को कम करती है। टीकाकरण से इससे बचाव किया जा सकता है। वहीं, एंटी वायरल दवाओं द्वारा हेपेटाइटिस सी का उपचार संभव है, लेकिन इस संक्रमण से बचाव के लिए वैक्सीन उपलब्ध नहीं है।