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10 साल से प्रारंभिक शिक्षा से वंचित हैं छत्तीसगढ़ के ये कमार बच्चे, सरकार नहीं दे रही ध्यान

Akanksha Agrawal

Publish: Jul 16, 2019 23:23 PM | Updated: Jul 16, 2019 15:45 PM

Baloda Bazar

कमार बच्चों को महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित आंगनबाड़ी केंद्र से प्रारंभिक शिक्षा का लाभ विगत 10 वर्षों से नहीं मिल रहा है।

मैनपुर. विकासखंड मुख्यालय मैनपुर से 45 किमी की दूरी पर बसा राजापड़ाव क्षेत्र के ग्राम भाठापानी कमारपारा के बच्चों को महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित आंगनबाड़ी केंद्र से प्रारंभिक शिक्षा का लाभ विगत 10 वर्षों से नहीं मिल रहा है। इससे बच्चों का प्रारंभिक स्तर कैसे ऊपर उठ पाएगा यह गंभीर विचारणीय तथ्य है।

इन परिवारों के दशा एवं दिशा बदलने स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वरोजगार के दिशा में विशेष कार्ययोजना बनाकर कमार विकास परियोजना चलाई जा रही है, जिसके माध्यम से आदिम जनजाति परिवारों को विशेष लाभ मिल सके, लेकिन आज उन्हीं के मासूम बच्चे प्रारंभिक शिक्षा से वंचित होने को मजबूर हैं। जिम्मेदार विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों की इस समस्या को संज्ञान में नहीं लेना समझ से परे लगता है।

ग्राम की जमीनी हकीकत जानने मैनपुर मुख्यालय से 45 किमी की दूरी तय करके आदिम जनजाति कमार परिवारों से मुलाकात करने पर पता चला कि इस ग्राम की जनसंख्या 493 एवं मकान संख्या 110 के आसपास है, जहां पर आंगनबाड़ी केंद्र संचालित है वहां से करीबन डेढ़ किमी की दूरी तय करके 30 मासूम बच्चे केंद्र तक नहीं पहुंच पाते। बरसात के दिनों में छोटे बच्चों को इतनी दूरी तय करके आंगनबाड़ी केंद्र पहुंचना नामुमकिन है, जबकि उनका नाम उपस्थिति पंजी में दर्ज है।

सिर्फ पूरक पोषण आहार पाने मंगलवार के दिन अपने पालक के साथ आंगनबाड़ी केंद्र पहुंचते हैं। कभी कभी तो महीनों बीतने के बाद भी पोषण आहार लेने बच्चे केंद्र नहीं पहुंचते। दूरी अधिक होने से बच्चों को पालक चाह कर भी केंद्र तक नहीं भेजते क्योंकि रास्ता उबड़ खाबड़ और जंगल झाड़ी वाला है। शासन की योजना अनुसार एक और आंगनबाड़ी केंद्र इस पारा में खुल सकता है, लेकिन इस गंभीर समस्या को विभाग नजर अंदाज कर रहा है। लगता है कमार बच्चों को अपने हालत में छोड़ देने पर विभागीय कर्मचारियों को मजा आता होगा।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सुमन सोरी ने भी स्वीकार किया कि एक आंगनबाड़ी केंद्र की अत्यंत आवश्यकता है। बच्चों के नाम पंजी में दर्ज हैं, लेकिन अधिक दूरी होने से बच्चे केंद्र तक नहीं पहुंच पाते साथ ही शिशुवती एवं गर्भवतियों को भी हम समयानुसार जानकारी नहीं दे पाते। हम बच्चों को अभी तक प्रारंभिक शिक्षा नहीं दे पा रहे हैं। वास्तव में जंगल पहाड़ी में बसने वाले वनवासी गांव की स्थिति आज भी विकास के मामले में काफी पिछड़ा है, क्योंकि प्रशासनिक अधिकारियों का दौरा कम होने से इसका फायदा जमीनी कार्यकर्ता को लाभ के बतौर उपहार मिलने जैसा हो जाता है।

इस संबंध में उपाध्यक्ष कमार संघ मैनपुर एवं ब्लॉक अध्यक्ष कांग्रेस असंगठित क्षेत्र जन समस्या निवारण प्रकोष्ठ पिलेश्वर सोरी ने बताया कि मैंने क्षेत्र का दौरा किया है। भाटापानी में एक और आंगनबाड़ी केंद्र संचालन की जरूरत है। जल्द ही इन समस्याओं को लेकर जिलाधीश गरियाबंद से मुलाकात करते हुए आंगनबाड़ी केंद्र खुले इस दिशा में काम करूंगा। ग्राम के जोकेश कुमार, रामसाय, राम सिंह, हीरालाल, लाल सिंह, धनशाय, बुद्धू राम, गोंचा बाई, पीला बाई, राजुला बाई, लखीराम, रज्जनतीनबाई कबीलास ने ग्राम भाटा पानी कमार पारा में आंगनबाड़ी केंद्र संचालित करने की मांग जिलाधीश गरियाबंद से किया है।

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