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हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी को लेकर हुई उलझन, जानें किस दिन व्रत रखना होगा शुभ

Bhawna Chaudhary

Publish: Aug 28, 2019 17:54 PM | Updated: Aug 28, 2019 17:54 PM

Baloda Bazar

Hartalika Teej 2019: सुहागिन महिलाओं के सबसे बड़े त्योहार हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी को लेकर बड़ी उलझन बनी हुई है , आइये जानते है किस दिन व्रत रखना होगा शुभ

बलौदा बाजार. हाल ही में दो-दो दिन जन्माष्टमी त्योहार मनाए जाने के बाद एक बार फिर से सुहागिन महिलाओं के सबसे बड़े त्योहार तीजा को लेकर महिलाओं के बीच भ्रम की स्थिति निर्मित हो गई है। इस बार तीजा पर्व भी दो दिन होने को लेकर महिलाओं में भ्रम है। इस वर्ष दो -दो दिन पडऩे वाले त्योहार महिलाओं के लिए काफी सिरदर्द बने हुए हैं।

किस दिन को छोड़े और किस दिन में पूजा करें यह देखना महिलाओं के लिए काफी मुश्किल का काम होता है।पंचांग और पंडितों के बीच तीज के त्योहार के नाम पर अब विवाद होने से महिलाओं की परेशानी और बढ़ गई है। तीज त्यौहार और उपवास के संबंध में नगर के पंडित पृथ्वीपाल द्विवेदी ने बताया कि तीजा व्रत रखने वाली महिलाओं को 1 सितंबर को ही तीज का व्रत तथा पूजन करना चाहिए।

2 तारीख को सुबह 8.30 बजे के बाद से चतुर्थी लग जाएगी। श्री द्विवेदी ने बताया कि हिंदू पंचांग अक्षांश और देशांतर के हिसाब से चलता है, जिसकी वजह से कभी कभी दो-दो दिन का भ्रम हो जाता है। परंतु तीज का व्रत तथा पूजन 1 तारीख को ही होनी है। गणपति स्थापना के बारे में उन्होंने बताया कि 2 तारीख को सुबह 8.30 बजे के बाद से चौथ लग रही है। इसी दिन गणपति स्थापना होगी।

पूजा का महत्त्व
कुंवारी लड़कियां मनचाहा वर पाने और शादीशुदा महिलाएं अपने पति की लम्बी उम्र के लिए इस व्रत को करती है। माना जाता है कि माता पार्वती ने भी भगवान शिव को पाने के लिए ये व्रत किया था। इस दौरान उन्होंने अन्न और जल का त्याग था। इसलिए महिलाएं इस दिन निर्जल व्रत रखती है।

हरितालिका तीज की पूजा विधि
पंडितों ने बताया कि इस व्रत में भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती की पूजा की जाती है। इस व्रत की पूजा विधि ये हैं

- हरतालिका तीज प्रदोष काल में किया जाता है। सूर्यास्त के बाद के तीन मुहूर्त को प्रदोषकाल कहा जाता है। यह दिन और रात के मिलन का समय होता है।

- हरतालिका पूजन के लिए भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की बालू रेत व काली मिट्टी की प्रतिमा हाथों से बनाएं।

- पूजा स्थल को फूलों से सजाकर एक चौकी रखें और उस चौकी पर केले के पत्ते रखकर भगवान शंकर, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।

- इसके बाद देवताओं का आह्वान करते हुए भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश का षोडशोपचार पूजन करें।

- सुहाग की पिटारी में सुहाग की सारी वस्तु रखकर माता पार्वती को चढ़ाना इस व्रत की मुख्य परंपरा है। इसमें शिव जी को धोती और अंगोछा चढ़ाया जाता है।

- यह सुहाग सामग्री सास के चरण स्पर्श करने के बाद ब्राह्मणी और ब्राह्मण को दान देना चाहिए। इस प्रकार पूजन के बाद कथा सुनें और रात्रि जागरण करें।

- आरती के बाद सुबह माता पार्वती को सिंदूर चढ़ाएं और ककड़ी-हलवे का भोग लगाकर व्रत खोलें।