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दिव्यांग होने के बावजूद नहीं टूटा बच्ची का हौसला, पढाई की ललक ऐसी की ट्राई साइकिल के सहारे जाती है स्कूल

Bhawna Chaudhary

Publish: Sep 10, 2019 22:00 PM | Updated: Sep 10, 2019 16:07 PM

Baloda Bazar

दिव्यांग होने के बावजूद नहीं टूटा बच्ची का हौसला, पढाई की ललक ऐसी की ट्राई साइकिल के सहारे जाती है स्कूल

देवभोग. कहते हैं कि जहां चाह होती है वहां राह होती है। इस कहावत को छत्तीसगढ़ के चलनापदर आश्रित ग्राम धुर्वापारा की 11 साल की बच्ची छाया धुर्व साबित करते हुए नजर आ रही है। छाया के दोनों पैर बचपन से काम नहीं करते। वहीं दिव्यांग होने के बाद भी छाया अपने आप अन्य बच्चों की तुलना में कभी कम नहीं समझती।

यह रोज पिता के सहारे ट्राई साइकिल से 1 किलोमीटर की दूरी तय कर चलनापदर के मिडिल स्कूल पहुंचती है। छठवीं क्लास में अध्ययन छाया पढ़ाई में कभी लापरवाही बरतना भी पसंद नहीं करती। छाया की तरह की पिता मुलेश्वर भी उसके भी पढ़ाई को लेकर गंभीर हैं। पिता के पैर भी सूजगए हैं ।

बावजूद इसके परवाह किए बिना ट्राईसाईकिल को पीछे से सपोर्ट देकर बेटी को स्कूल तक लाने और ले जाने का काम भी कर रहे हैं। मुलेश्वर ने बताया कि उनकी बेटी पढ़ना चाहती है तो वे उसका हर स्तर पर सपोर्ट करने को तैयार है। उनकी बेटी के अंदर पढ़ाई को लेकर एक अलग ही रुचि है ऐसे में वे चाहते हैं कि उनकी बेटी पढ़ लिखकर आगे जाए।

पेंशन के लिए दो साल से लगा रहे चक्कर
मुलेश्वर ने बताया कि उनकी बेटी को दिव्यांग पेंशन अब तक नहीं मिल पाया है। पंचायत में करीब 2 साल से आवेदन करते आ रहे हैं लेकिन अब तक पंचायत सचिव उनके आवेदन पर गंभीरता नहीं दिखाई है। इस संबंध में पंचायत सचिव पुस्तम नागेश ने कहा कि छाया धुर्व के परिवार का नाम 2002- 2003 तक बीपीएल सूची में नाम शामिल नहीं है। वहीं परिवार का नाम 2011 के बीपीएल सूची में है।

2002- 2003 में नाम नहीं होने के कारण पेंशन का लाभ नहीं मिल पा रहा है। राशन कार्ड को लेकर पंचायत सचिव का कहना है कि छाया का नाम भी परिवार के अन्य सदस्यों के साथ जुड़ा हुआ है। इससे उन्हें अभी 7 किलो राशन ही दिया जा रहा है। छाया का राशन कार्ड अलग करने की प्रक्रिया के लिए जिम्मेदार अधिकारियों से चर्चा कर उचित कदम उठाएंगे।

डॉक्टर बनना चाहती है छाया
छाया का कहना है कि वह आगे पढ़ लिखकर डॉक्टर बनेगी हालांकि उसके दोनों पैर बचपन से काम नहीं कर रहे इसके बाद भी वे अपने आपको अन्य दूसरे बच्चों की तुलना में कम नहीं समझती। छाया बताती है कि उसका परिवार आर्थिक रूप से बहुत ज्यादा कमजोर है इसलिए अच्छी पढ़ाई के लिए डॉक्टर बन कर अन्य लोगों की सेवा करने की इच्छा है। ऐसे में है यह परिवार के लोगों के साथ मिलकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मिलकर मांग करेगी कि उसकी इलाज को लेकर सरकार की तरफ से कुछ आर्थिक सहायता प्रदान की जाए ताकि वे भविष्य में अपने शब्द सपनों सपनों अपंग देकर उड़ान भर पाए।