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बेटी ने मां की अर्थी को दिया कंधा और चिता को दी मुखाग्नि, नम हो गई सभी की आंखें

Bhawna Chaudhary

Publish: Oct 16, 2019 11:27 AM | Updated: Oct 16, 2019 11:27 AM

Baloda Bazar

एक बेटी ने एक बार फिर समाज को आईना दिखाया है। उसने फिर ये साबित कर दिया कि मां-बाप का बड़ा सहारा बेटी भी होती है।

लवन. एक बेटी ने एक बार फिर समाज को आईना दिखाया है। उसने फिर ये साबित कर दिया कि मां-बाप का बड़ा सहारा बेटी भी होती है। मां की इच्छा और बेटा न होने की वजह से बलौदाबाजार जिले के ग्राम मुंडा की एक बेटी ने अपना फर्ज निभाया और मां का चिता को मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार किया। इस दौरान मुंडा गांव के श्मशान घाट में मौजूद परिवार के हर व्यक्ति, हरेक गांववासी की आंखों से आंसू छलक आए।

समय-समय पर समाज को एक नई दिशा देने वाली घटनाएं सामने आती रहती है। ऐसा ही कुछ हुआ है बलौदाबाजार जिले के आदर्श ग्राम पंचायत गांव मुंडा में, जहां रहने वाली एक बेटी वर्षानी पांडे ने अपनी मां इंद्राणी पांडेय को मुखाग्नि देकर अपना फर्ज निभाया। इस दौरान वर्षानी के पिता भी उनके साथ रहकर अपनी बेटी का हौसला बढ़ाते रहे।

दरअसल बलौदाबाजार जिले के गांव मुंडा में रहने वाली वर्षानी पांडे की मां इंद्राणी लंबे समय से बीमारी थी। ऐसे में बीमारी के दौरान उनकी माता हर समय इच्छा जाहिर कर रहीं थीं कि अगर वह दुनिया से दूर जाती हैं, तो उनकी बेटी वर्षानी उनको मुखाग्नि दे और उनका अंतिम संस्कार करे। अपनी मां की इच्छा की पूर्ति करते हुए वर्षानी पांडे ने अपना साहस दिखाते हुए और समाज को नई दिशा देते हुए न सिर्फ अपनी मां को अंतिम विदाई दी, बल्कि श्मशान घाट में उनके अंतिम संस्कार के समय अपनाई जाने वाली सारी प्रक्रिया को अपने हाथ से पूरा किया।

वर्षानी पांडे के द्वारा किए गए इस काम से गांव के हर एक व्यक्ति की आंखों में आंसू थे। वहीं परिवार के लोगों कहना है कि बेटा जिस तरह से अपनी मां बाप का साहस होता है। ठीक उसी तरह बेटी भी अपने मां बाप के लिए एक बड़ा सहारा होती है। वर्षानी पांडे ने समाज के सामने बेटियों के साहस को प्रदर्शित करते करते एक बड़ा उदाहरण पेश किया है।

गांव में रहने वाले उनके चाचा मानस पांडे बताते हैं कि समाज में बेटियों को लेकर मानसिकता जो भी हो, लेकिन उनकी भतीजी वर्षानी पांडे ने अपने मां बाप की इकलौती बेटी होने का फर्ज बखूबी निभाया है और वह अपनी भतीजी के इस काम से काफी खुश है। उन्होंने अपील की कि समाज में बेटियों की सहभागिता को स्वीकार किया जाना चाहिए और ऐसे दुख की घड़ी में अपनी भतीजी के साहस को मानस पांडे ने नमन किया है।