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देखिए सरकार आपकी गौठान योजना ने सरपंच को बनाया कंगाल

Chandra Kishor Deshmukh

Publish: Aug 12, 2019 08:02 AM | Updated: Aug 12, 2019 00:37 AM

Balod

छत्तीसगढ़ सरकार की महती योजना नरवा, गरूवा, घुरवा और बारी का बुरा हाल है। सरकार के भरोस और जिला प्रशासन के फरमान पर लाखों की लागत से गौठान निर्माण कर सरपंच बुरी तरह आर्थिक संकट में फंस गए हैं।

बालोद @ patrika. छत्तीसगढ़ सरकार की महती योजना नरवा, गरूवा, घुरवा और बारी का बुरा हाल है। सरकार के भरोस और जिला प्रशासन के फरमान पर लाखों की लागत से गौठान निर्माण कर सरपंच बुरी तरह आर्थिक संकट में फंस गए हैं।

गौठान में नहीं है चारा-पानी
गौठान में न तो चारा-पानी और न गौवंश है। चरवाहे और डाक्टर तो दूर की बात है। ऊपर से सरपंच पर लाखों का कर्ज चढ़ गया है। बड़ी उम्मीद से गांव में प्रतिष्ठा के चलते किसी तरह उधारी में निर्माण सामग्री लेकर गौठान तो बना दिया गया है। निर्माण के इतने दिनों बाद सरपंच को फूटी कौड़ी नहीं मिली है। कर्जदार के तकादे से सरपंच के परिजन भी परेशान है। सरपंच गांव छोडऩे को मजबूर है।

आधे-अधूरे निर्माण का कर दिया शुभारंभ
हम बात कर रहे हैं जिले के ग्राम पंचायत उमरादाह के आश्रित ग्राम चरोटा का। जहां पर सरकार से पैसा मिलने की उम्मीद में आदर्श गौठन का निर्माण किया गया है। आनन-फानन में आधे-अधूरे निर्माण के बाद इसका उदघाटन एक अगस्त को सरगुजा विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष एवं विधायक बृहस्पत सिंह ने किया था। गौठान का हाल ये हैं कि गौवंश ही नहीं हैं। बीते 6 माह से सरपंच को फूटी कौड़ी नहीं मिली है। सरपंच ने 17 लाख उधार लेकर इस गौठान का निर्माण कराया है। जिनसे उधार में निर्माण सामाग्री लिएथे उसे लौटा नहीं पाया है। अब दुकानदार सरपंच के घर वसूली के लिए पहुंच रहे है। दुकानदारों के तकादे के परेशान घर वालों ने सरपंच को गौठान में रहने को चेतावनी दे दी है। परेशान सरपंच ने कहा है कि मैं गांव छोड़कर ही भाग जाऊंगा।

मंत्रियों को भ्रमण कराया जाता है
जिला प्रशासन ने श्रेय लेने सरकार से वाहवाही लूटने अधूरे निर्माण का शुभारंभ करवा दिया। जिले में आने वाले मंत्रियों को इस गौठान को आदर्श बताकर दिखाया जाता है। लोग तारीफ कर चले जाते हैं। किसी ने भी गौवंश, चारे-पानी और चरवाहे के बारे में जानना उचित नहीं समझा। और तो और सरपंच से भी निर्माण में खर्च राशि और भुगतान के संबंध में भी कभी चर्चा नहीं की।

जेवर और गहने बेचकर कुछ कर्ज चुकाए
सरपंच सखाराम देवांगन ने बताया कि 6 माह से जिला प्रशासन के निर्देश पर गौठान का निर्माण चल रहा है। अब तक गौठान निर्माण में 17 लाख रुपए खर्च हो चुके है। जिन-जिन लोगों से उधार में निर्माण सामग्री खरीदे थे वे अब वसूली के लिए घर तक पहुंच रहे हैं। परेशान सरपंच ने घर के जेवर और गहने बेचकर कुछ हजार तक के कर्ज चुकाए हैं। लाखों रुपए कहां से लाए उन्हें समझ नहीं आ रहा है। कर्ज से परेशान सरपंच की पीड़ा का अनुमान इससे से लगाया जा सकता है कि पत्रिका से बात करते समय वे रो पड़े।

गौठान के बजाय बाहर करा रहे चराई
17 लाख की लागत से 3 एकड़ जमीन पर बने इस गौठान का एक अगस्त को उदघाटन हुआ था। उद्घाटन के बाद से एक भी मवेशी इस गौठान में नहीं आए। चरवाहा बाहर के चारागाह में गायों को चरा रहे हंै। इस गौठान में मवेशी नहीं रखने का कारण पौधरोपण को बताया जा रहा है। इस वजह से बाहर चारागाह में मवेशी चरा रहे हैं।

पंचायतों में फंड का अभाव
जानकारी के मुताबिक जब से नई सरकार बनी है तब से पंचायतों में निर्माण के लिए बिल ही पास नहीं हो रहे हैं। सभी पंचायतों के सरपंच भी परेशान है। ऐसे में आने वाले समय में बड़ी मुश्किल हो सकती है। ग्राम पंचायतों में फूटी कौड़ी नहीं है। सरपंचों का कहना है कि अब तो पंचायतों के पास किसी भी काम के लिए फंड नहीं है।

गांव छोड़कर कहीं चला जाऊं
सरपंच सखाराम देवांगन ने पत्रिका से चर्चा में अपनी पीड़ा बताई और कहा कि आए दिन लोग वसूली के लिएघर पहुंचते हैं। इससे बड़ी शर्म महसूस होती है। मन करता है गहनों की तरह ही खेत बेचकर कर्ज चूका दंू और गांव छोड़कर कहीं चला जाउं।

परेशानी जल्द दूर की जाएगी
इस मामले में जिला पंचायत सीईओ बीएल गजपाल ने कहा कि अभी बिल स्वीकृत नहीं हो रहे है। जनपद पंचायत सीईओ और सरपंच से चर्चा कर उनको हो रहे परेशानी को दूर करने प्रयास किया जाएगा।