स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

मौसम खुलने के बाद केंद्रों में धान खरीदी शुरू, फिर भी किसानों की परेशानी नहीं हो रही कम

Chandra Kishor Deshmukh

Publish: Jan 10, 2020 23:38 PM | Updated: Jan 10, 2020 23:38 PM

Balod

बारिश बंद होने और मौसम खुलने के बाद धान उपार्जन केन्द्रों में किसानों के धान की खरीदी शुरू हो गईहै। समिति द्वारा पूर्व में जारी टोकन के आधार पर धान खरीदा जा रहा है। समिति में अलग अलग गांवों के किसानों को टोकन के लिए अलग अलग तारीखों में बुलाया जा रहा है।

बालोद/दल्लीराजहरा @ patrika . बारिश बंद होने और मौसम खुलने के बाद धान उपार्जन केन्द्रों में किसानों के धान की खरीदी शुरू हो गईहै। समिति द्वारा पूर्व में जारी टोकन के आधार पर धान खरीदा जा रहा है। समिति में अलग अलग गांवों के किसानों को टोकन के लिए अलग अलग तारीखों में बुलाया जा रहा है। मौसम खराब होने से बिना टोकन के वापस लौटा दिया जाता है। इसके अलावा इस बार नए नए नियमों एवं मौसम की खराबी के कारण खरीदी में देरी हो रही है। देरी के कारण किसानों में सरकार के प्रति नाराजगी है।

किसान अपना पूरा धान नहीं बेच पा रहे
राज्य स्तर से बार बार नए नियमों के निर्देश मिलने पर जहां समिति प्रबंधन में परेशानी है वहीं किसानों को भी नए नए नियमों के कारण परेशानी उठानी पड़ रही है। जिन किसानों को पूर्व में टोकन जारी किया गया था उनका धान मौसम की खराबी होने के कारण नहीं खरीदा जा सका था और जो किसान अपना धान बेचना चाह रहे थे उन्हें इंताजर करना पड़ा। ले देकर समिति में धान खरीदी शुरू हुई है लेकिन समिति में एक दिन मेंं मात्र दो हजार क्विंटल तक की धान खरीदे जाने के नियम से किसान अपना पूरा धान नहीं बेच पा रहे हैं। जबकि इसके पहले तक समिति में एक दिन मेें चार से साढ़े चार हजार क्विंटल तक की धान खरीदी की जाती थी।

खरीदी की मात्रा कर दी आधी, किसान नहीं बेच पा रहे धान
प्रदेश कांग्रेस सरकार द्वारा समितियों में किसानों से धान खरीदी की मात्रा आधी कर दिए जाने के कारण अधिकतर किसान अब तक अपना धान नहीं बेच पाए हैं जिससे किसान वर्ग अपने खेतों में जुताई, धान कटाई व मिंजाई कार्य के बदले में संबंधितों को समय पर उनकी मजूदरी राशि अथवा मेहनताना देने के लिए बड़ी आर्थिक समस्या आ रही है जिन्हें ले देकर मान मनौव्वल किया जा रहा है वे भी प्रदेश सरकार के इस बार की नीतियों से परिचित होने के कारण किसानों पर ज्यादा दबाव न डालकर अपना पैसा लेने के लिए केवल इंतजार कर रहे हैं।

घरेलू खर्च के लिए किसान मोहताज
इनके बीच सबसे बड़ी परेशानी यह हो रही है कि किसानों को अपने घर परिवार के अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए विषम आर्थिक परेशानी के दौर से गुजरना पड़ रहा है तथा शहर जाकर अन्य लोगों से काम चलाऊ कर्जा लेने के लिए मजबूर होना पड़ा है, क्योंकि गांव के किसान अपनी जरूरतों के अनुसार कुछ दुकानों अथवा कोचिए के पास अपना कुछ धान बेचकर आर्थिक व्यवस्था करते हुए घर परिवार के खर्च चला लेते थे, अब तो कोचिए व दुकानदारों ने भी धान लेने से मना कर दिया है ऐसे में जिन किसानों की साग सब्जी की खेती नहीं है उन किसानों को बाजार से साग सब्जी लेने व राशन में तेल दाल, हल्दी, मिर्च आदि सामग्री के लिए पैसे की तंगी के चलते परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और यह सब प्रदेश सरकार के नए नीतियोंं के चलते हो रहा है कि वर्तमान मेंं घरेलू खर्च तक के लिए किसान पैसे पैसे को मोहताज हो गए हैं।

कई केंद्रों में परिवहन और टोकन की समस्या
कुसुमकसा, भर्रीटोला, अडज़ाल, खल्लारी, धुरवाटोला, पथराटोला एवं विभिन्न गांवों के किसान रोमनलाल, सुखदेव सिंह, गुलाब सिंह, जगदीश प्रसाद, लखनलाल, होलीराम, कलीराम यादव, मनोज साहू, खिलेश वर्मा सहित अन्य किसानों ने कहा कि दिसंबर माह से समितियों मेें धान की खरीदी शुरू हुई है और इसे एक माह पूरे होने के बाद भी धान खरीदी केन्द्रोंं मेंं किसानों को समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए टोकन देने की समस्या अब तक बनी हुई है जिससे किसान हलाकान हो रहे हैं। एक तो धान खरीदी केन्द्रों मेंं टोकन देने की समस्या हो रही है तो दूसरी ओर समितियों से धान का परिवहन ठीक से नहीं होने के कारण भी धान खरीदी प्रभावित हो रही है।

बारदाना की कमी बताकर किया जा रहा किसानों को परेशान
धान के परिवहन की समस्या डौंडी ब्लाक के सभी समितियों में कर्मचारियों से सुनने को मिल रही है तो कहीं बारदाना की कमी बताकर किसानों को परेशान किया जा रहा है। धान खरीदी केन्द्र में टोकन देने के लिए अलग-अलग गांव के किसानों को अलग-अलग तारीख में बुलाया जाता है, जिसके आधार पर अलग-अलग गांवों के किसान समितियों मेंं अपना धान लेकर पहुंचते हैं। राज्य सरकार को समितियों में धान का ठीक से परिवहन सुनिश्चित करके धान खरीदी की मात्रा को पहले वर्षों की तरह बढ़ाया जाना चाहिए लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया जाकर किसानों को परेशान किया जा रहा है।

कुसुमकसा समिति में धान खरीदी की स्थिति
आदिम जाति सेवा सहकारी समिति कुसुमकसा में 9 जनवरी की स्थिति में कुल 990.40 क्विंटल मोटा धान, 3458.80 क्विंटल महामाया, 16574 क्विंटल पतला धान व 3083.60 क्विंटल सरना धान को मिलाकर कुल 24106.80 क्विंटल धान की खरीदी कर ली गई है। जिसमें से 240 क्विंटल पतला धान एवं 280 क्विंटल सरना धान को मिलाकर 520 क्विंटल धान मिल को जारी किया गया है तथा 1600 क्विंटल महामाया धान एवं 350 क्विंटल सरना धान को मिलाकर 1950 क्विंटल धान संग्रहण केन्द्र को जारी किया जाना बताया गया है। वहीं कुसुमकसा उपार्जन केन्द्र में 990.40 क्विंटल मोटा धान, 1858.80 क्विंटल महामाया धान एवं 2453.60 क्विंटल सरना धान को मिलाकर कुल 24636.8 0 क्विंटल धान वर्तमान में उपलब्ध होना बताया गया है।

अब तक किसानों को किया गया 2 करोड़ 89 लाख 26 हजार 210 रुपए का भुगतान
यहां समिति प्रबंधक द्वारा दी गई जानकारी में खरीदे गए कुल धान की राशि 4 करोड़ 40 लाख 8 5,322 रुपए है। वहीं सोसायटी ऋण के विरूद्ध वसूली की गई कुल राशि 1 करोड़ 51 लाख 59,112 रुपए है। धान खरीदी के बदले में किसानों को कुल 2 करोड़ 89 लाख 26 हजार 210 रुपए शुद्ध भुगतान किया गया है तथा शेष भुगतान योग्य राशि शून्य है। धान उपार्जन केन्द्र कुसुमकसा में अब तक कुल 731 किसान लाभान्वित हुए हैं। यहां उपयोग हुए बारदानों की संख्या 69,967 है वहीं वर्तमान में 44,504 बारदाने उपलब्ध हैं।

[MORE_ADVERTISE1]