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नौ हजार ने कराया पंजीयन, लाइसेंस बनाया सिर्फ 3 हजार ने

Chandra Kishor Deshmukh

Publish: Jul 20, 2019 08:25 AM | Updated: Jul 20, 2019 00:12 AM

Balod

वाहन चलाने का शौक रखने वाले बहुत से लोग यातायात के नियमों का पालन नहीं करते है। कई लोग तो लाइसेंस बनाना भी उचित नहीं समझते हैं। यही कारण है कि दुर्घटना के बाद कानूनी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

बालोद @ patrika . वाहन चलाने का शौक रखने वाले बहुत से लोग यातायात के नियमों का पालन नहीं करते है। कई लोग तो लाइसेंस बनाना भी उचित नहीं समझते हैं। यही कारण है कि दुर्घटना के बाद कानूनी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। लाइसेंस नहीं होने के कारण कई बार सड़क दुर्घटना के बाद बीमा की राशि संबंधित को नहीं मिल पाती है। जिले में बीते 6 साल में जिस हिसाब से वाहनों की संख्या बढ़ी है उसकी तुलना में एक चौथाई लोगों ने ही लाइसेंस बनवाया है।

वाहनों की संख्या बढ़ी

अतिरिक्त क्षेत्रीय परिवहन विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक 25 फरवरी 2013 को जिले में आरटीओ कार्यालय खुलने के बाद से लेकर अब तक 63361 वाहनों की संख्या बढ़ी है। वहीं इस अवधि के दौरान महज 32933 हजार लोगों ने लाइसेंस बनवाया। साल दर साल के आंकड़ों को देखें तो 25 फरवरी 2013 से लेकर 31 दिसंबर 2013 तक आरटीओ विभाग ने कुल 749 वाहनों का पंजीयन किया था, जिसके बाद सन् 2014 में 10401 वाहन सड़क पर आए थे। इस अवधि में केवल 5565 लोगों ने लाइसेंस बनवाए थे।

दो साल लोगों ने दिखाया उत्साह
वर्ष 2017 में वाहनों की बिक्री की संख्या 12 हजार 682 तक पहुंच गई, लेकिन लाइसेंस बनाने वालों की संख्या घटकर 5305 हो गई। हालांकि वर्ष 2015-2016 में लाइसेंस बनाने के प्रति लोगों ने जागरूकता दिखाई। इसी तरह वर्ष 2015 में 6146 तो 2016 में 6202 लोगों ने लाइसेंस बनाए।

लाइसेंस को लेकर ग्रामीणों में नहीं जागरूकता
गाडिय़ों की संख्या बढऩे के साथ लाइसेंस की संख्या में उसी अनुपात में वृद्धि नहीं होने के पीछे भी तर्क है। जानकारों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र में आर्थिंक समृद्धि और किश्तों में गाडिय़ों की बिक्री होने से शहरों के बराबर ही कस्बों में गाडिय़ों की बिक्री हो रही है। गाड़ी तो आसानी से ग्रामीण इलाकों में मिल जा रही है, लेकिन लाइसेंस के लिए उन्हें जिला मुख्यालय आना पड़ता है। यही वजह है कि ग्रामीण लाइसेंस बनाने में रुचि नहीं ले रहे हैं।

लाइसेंस बनाने चलाया जाए अभियान
यातायात विभाग समय-समय पर वाहनों की चेकिंग की जाती है। इसमें एक बाइक पर तीन सवारी बैठाने के अलावा हेलमेट, लाइसेंस भी जांच की जाती हैं। बाइक चालक द्वारा जुर्माना तो भर दिया जाता है, लेकिन लाइसेंस बनवाने के लिए चालकों को प्रेरित करने के लिए कोई उपाय नहीं किया जा रहा है। माना जा रहा है कि जिस तरह से पुलिस ने हेलमेट को लेकर जागरुकता अभियान चला रही है, उसी तरह लाइसेंस बनाने के लिए भी अभियान छेड़े जाने की जरूरत है।

जून में 9 हजार 200 वाहन का रजिस्ट्रेशन, लाइसेंस बने मात्र 3214
आरटीओ के मुताबिक जून 2019 तक इस साल जिले में कुल 9 हजार 269 नई गाडिय़ों का पंजीयन हुआ है। इसके विपरीत सिर्फ 3 हजार 214 लोगों ने ही लाइसेंस बनाए है।

वर्षवार जानकारी
वर्ष लाइसेंस वाहन
2013 1671 749
2014 5565 10401
2015 6146 10002
2016 6202 10237
2017 5305 12682
2018 5330 10031
2019 जून तक 3214 9269

चलाया जाएगा अभियान
यातायात प्रभारी सत्यकला रामटेके ने बताया वाहन शो रूम संचालकों को निर्देशित किया गया जाएगा कि वाहन देते समय संबंधित व्यक्ति से लाइसेंस की जानकारी लें। अगर उसके पास लाइसेंस नहीं है तो बनाने प्रेरित करें। पुलिस व यातायात विभाग की ओर से समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।