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जल शक्ति अभियान में हमारा जिला पूरे देश में आठवें स्थान पर

Chandra Kishor Deshmukh

Publish: Sep 16, 2019 08:01 AM | Updated: Sep 16, 2019 00:29 AM

Balod

जल शक्ति अभियान के तहत भूजल स्तर बढ़ाने मामले में बालोद जिला पूरे देश़ के 257 जिलों में आठवां स्थान पर आ गया है। जिला प्रशासन की पहल से इस अभियान में 257 जिलों में बालोद आठवें स्थान पर पहुंच गया हैं।

बालोद @ patrika. जल शक्ति अभियान के तहत भूजल स्तर बढ़ाने मामले में बालोद जिला पूरे देश़ के 257 जिलों में आठवां स्थान पर आ गया है। जिला प्रशासन की पहल से इस अभियान में 257 जिलों में बालोद आठवें स्थान पर पहुंच गया हैं।

जल सभी के लिए जीवनदायिनी
कलक्टर रानू साहू ने कहा कि यह एक अच्छी खबर है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी के लिए हम क्या छोड़ रहे हैं और यह हमें ही तय करना है जल सभी के लिए जीवनदायिनी है। रोजाना एक व्यक्ति नहाने कपड़ा धोने से लेकर खाना बनाने दिनचर्या के काम के लिए 130 लीटर पानी खर्च करता है। जल की उपलब्धता बरकरार रखने के लिए जल का वेस्टेज कम से कम होना चाहिए भविष्य में जल संकट का सामना ना करना पड़े इसके लिए वर्षा का जल का संचय होना चाहिए। उन्होंने कहा भारत सरकार जल संचयन के लिए व्यापक स्तर पर देश भर में जल शक्ति अभियान चला रही है। इसमें सभी की सहभागिता अपेक्षित है, जो शक्ति अभियान को जन आंदोलन में तब्दील करने के लिए एवं बालोद जिले की रैंकिंग में लगातार सुधार के लिए कलक्टर ने सभी पदाधिकारियों अधिकारियों और कर्मचारियों सहित जिले वासियों को अभियान में शामिल लोगों को बधाई दी है।

लोगों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता आने लगी
गौरतलब है कि जल शक्ति अभियान के अंतर्गत जल संरक्षण जल संचयन रेन वाटर हार्वेस्टिंग एवं पौधारोपण में देश के 257 जिलों में से बालोद जिला आठवें स्थान पर पहुंच गया है। कलक्टर ने कहा कि यह उपलब्धि यह बताती है कि जिले के लोगों में जल संरक्षण के प्रति अच्छी सी जागरूकता आने लगी है। इस बारिश के जल संचयन को लगातार लोग सहेज रहे हैं। विभिन्न गांव में लगातार वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का निर्माण किया जा रहा है। वह खुद ग्राम भ्रमण योजना के तहत जब विभिन्न गांव में पहुंची हैं। ग्रामीणों को इसके लिए प्रेरित करती हैं और स्थानीय अधिकारियों का अमला भी लगातार पंचायतों में जाकर लोगों को सो?ता बनाने के लिए प्रेरित कर रही है। कई लोग स्वेच्छा से तो कई लोग दूसरे से प्रेरित होकर सो खता वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवा रहे हैं।

जिले में अभियान पर इस तरह के हुए काम
जिले में कुल 6069 रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाया गया है। इसके अलावा 1333 पुराने जल स्रोतों का पुनर्जीवन किया गया है। 2398 वाटर शेड का कार्य कराया गया है। 2115 सोकपीट एवं अन्य रिचार्ज स्ट्रक्चर का काम हुआ है। कृषि मेला के माध्यम से फसल चक्र परिवर्तन का काम 7048 किसानों द्वारा किया गया है। इस तरह से अलग अलग तरीकों से जल संरक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है। खासकर जिला प्रशासन का फोकस गुरुर ब्लॉक पर है क्योंकि वहां सबसे कम भूगर्भ जलस्तर में पानी बचने की बात सामने आई थी। अब लगातार जल संरक्षण की दिशा में चल रहे। इस प्रयास से यह भी उ?मीद की जा रही है कि इस बरसात में तेजी से वाटर लेवल रिचार्ज होगा और आने वाले गर्मी में लोगों को जल संकट से छुटकारा मिल जाएगा।

जुलाई से शुरू हुआ था अभियान
केंद्र सरकार ने 1 जुलाई से देश भर में जल शक्ति अभियान लांच किया है। जिसमें छग से दो जिले रायपुर व बालोद का चयन पहले हुआ। बालोद के गुरुर ब्लॉक से इसकी शुरुआत की गई है। केंद्र के ग्राउंड वाटर बोर्ड के सर्वे के मुताबिक धान की दो फसल में की जा रही खेती के कारण जिला रेड जोन में शामिल है। इन इलाकों में गर्मी में 500 फीट में पानी मिल पाता है। किसानों में जागरूकता के अभाव में आज भी वे पानी के अधिक दोहन वाली फसल धान की खेती कर रहे हैं। बोर खनन से भूजल का दोहन बढ़ गया है। भूमिगत जलस्रोत घटने से बिगड़ते हालत को सुधारने मोदी सरकार ने यह अभियान शुरू किया है। जिसमें लोगों को पानी का मोल समझाया जा रहा है। अभियान में जिला प्रशासन, जिला पंचायत, मनरेगा, कृषि, सिंचाई, पीएचई सहित अन्य विभाग मिलकर काम कर रहे हैं ताकि जल्द से जल्द स्थिति को सुधारा जा सके। स्वच्छ भारत अभियान के तर्ज पर जल शक्ति आंदोलन चलाया जाएगा। इसका उद्देश्य लोगों के बीच पानी का मोल समझाना और जल संरक्षण को बढ़ावा देना है।

देश के 257 जिले के 1539 ब्लॉक में हो रहा इस तरह से काम
इस अभियान के जरिए देश के 257 जिलों को लक्षित किया गया है। इन जिलों के 1539 ब्लॉकों में अधिकारी तैनात हैं जो वहां भूमिगत जल का स्तर मापेंगे और नतीजों के बाद जल संरक्षण को मिशन मोड में लागू किया गया है। केंद्र सरकार इन जिलों में बारिश के पानी का संचय, जल संरक्षण और जल प्रबंधन को बढ़ावा दे रही और लोगों को भी जागरूक कर रही। अभियान 2 अक्टूबर तक चलाया जाएगा। इससे अधिक से अधिक लोगों को जोड़ा जाएगा ताकि पानी को सहेज सकें।

कम पानी वाली फसलों के लिए प्रोत्साहन राशि
अधिक जल खपत करने वाले फसलों की जगह कम पानी वाले फसलों की खेती पर सरकार प्रोत्साहन राशि भी देगी। कृषि विज्ञान केंद्र मेला में किसानों को जानकारी दी जाएगी। शहरों से निकलने वाले गंदे पानी को साफ कर खेती और उद्योगों में इस्तेमाल किया जाएगा। गांवों का 3डी मैप तैयार किया जाएगा ताकि योजना को कारगर तरीके से लागू किया जा सके। किसानों को जानकारी देंगे कि कैसे जल की बचत की जा सकती है और तकनीक का इस्तेमाल कर कैसे जल का प्रबंधन किया जा सकता है।

भारत में 11.18 क्यूबिक मीटर प्रति किलो फसल पानी का इस्तेमाल होता है
1951 में प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता सलाना 5177 क्यूबिक मीटर थी, जो 2011 में घटकर 1545 क्यूबिक मीटर हो गया और 2025 तक 1341 क्यूबिक मीटर सलाना होने का अंदेशा है। प्रति फसल पानी का इस्तेमाल भारत, चीन, अमेरिका और इजरायल से तीन गुना ज्यादा होता है। भारत में 11.18 क्यूबिक मीटर प्रति किलों फसल पानी का इस्तेमाल होता है तो अमेरिका में 4.78 , इजरायल में 4.74, दक्षिण अफ्रीका में 6.60 और चीन में 2.28 क्यूबिक मीटर प्रति किलों फसल है। नीति आयोग के प्रतिवेदन अनुसार देश की 6 0 करोड़ जनता स्वच्छ पेयजल की गंभीर समस्या से जूझ रही है। साफ पानी न मिलने से देश में हर साल दो लाख लोगों की मौत हो रही है।

ये पांच प्रमुख काम हो रहे
अभियान के जरिए जल संरक्षण, बारिश की पानी का संचय, परंपरागत जलाशयों को फिर से जीवित करना, सूखे पड़े जलाशयों को पुनर्जीवित करना, वॉटर शेड और जंगल लगाने जैसे पांच मुख्य कामों पर जोर दिया जा रहा है।