स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

निर्वाचन आयोग ने तय नहीं की सीमा, प्रत्याशी जितना चाहे कर सकते हैं खर्च

Chandra Kishor Deshmukh

Publish: Jan 12, 2020 22:56 PM | Updated: Jan 12, 2020 22:56 PM

Balod

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए नाम वापसी के बाद कहां से कौन और कितने प्रत्याशी मैदान में यह तस्वीर साफ हो गईहै। इसी के साथ प्रत्याशी क्षेत्रों में प्रचार में जुट गए हैं। क्षेत्र के गांव बैनर पोस्टर से अट गए हैं। प्रचार वाहनों में दिनभर प्रत्याशियों के चुनाव चिन्ह और पक्ष में मतदान करने की आवाज गूंज रही है।

बालोद @ patrika . त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए नाम वापसी के बाद कहां से कौन और कितने प्रत्याशी मैदान में यह तस्वीर साफ हो गईहै। इसी के साथ प्रत्याशी क्षेत्रों में प्रचार में जुट गए हैं। क्षेत्र के गांव बैनर पोस्टर से अट गए हैं। प्रचार वाहनों में दिनभर प्रत्याशियों के चुनाव चिन्ह और पक्ष में मतदान करने की आवाज गूंज रही है।

सोशल मीडिय़ा प्रचार का बड़ा माध्यम
सोशल मीडिया भी प्रचार का बड़ा माध्यम है। प्रत्याशी फेसबुक, वाट्सऐप और टेलीग्राम में भी चुनाव चिन्ह के साथ प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। वैसे तो यह चुनाव गैरदलीय हो रहा है किंतु प्रत्याशियों के ऊपर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस पार्टी समर्थित का लेबल लगा हुआ है। लोग चर्चा में यह भी पूछते हैं कि कांग्रेस और भाजपा से कौन है प्रत्याशी? हालांकि निवार्चन आयोग ने पार्टी का चुनाव चिन्ह आवंटित न कर आयोग द्वारा निर्धारित सिंबाल ही दिए हैं।


पंचायत का मिला दर्जा, ग्रामीणों ने चुन लिया निर्विरोध
परिसीमन के बाद जिले में 12 नए ग्राम पंचायत अस्तित्व में आया है। डौंडीलोहारा ब्लाक के नए ग्राम पंचायत खड़बत्तर में ग्रामीणों ने सर्व सम्मति से निर्विरोध सरपंच चुन लिए है। यहां कुल 1012 मतदाता है। इसी तरह जिले के डौंडीलोहारा ब्लाक के 7 ग्राम पंचायत ऐसे है जहां पर निर्विरोध सरपंच चुने गए हैं। इन गांवों में रानीतराई रोड, हरदी, राधे नवागांव, खैरा, भेड़ी, बटेरा और खड़बत्तर शामिल है। वहीं डौंडी ब्लाक में गुदुम व धोतिमटोला, बालोद ब्लाक में ग्राम पंचायत पर्रेगुड़ा में भी सरपंच निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। बालोद जिले में कुल 13 पंचायतों में सरपंच निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं।

हिसाब भी नहीं पूछेता आयोग
भारत निवार्चन आयोग की ओर से नगर निगमों में पार्षद से लेकर महापौर और विधान सभा व लोकसभा में खर्च की सीमा तय की है। आयोग द्वारा खर्च की निर्धारित सीमा तक ही प्रत्याशी राशि खर्चकर सकते हैं। आयोग को रोज के खर्चकी जानकारी देने पड़ते हैं। कई प्रत्याशी जो पिछले चुनाव में खर्च की जानकारी दिए थे उन्हें चुनाव लडऩे से वंचित भी किया गया था। वहीं आयोग की ओर से त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में राशि खर्च के मामले में कोई नियम या गाइडलाइन अब-तक नहीं बनी है। इस चुनाव में प्रत्याशी एक रुपएसे लेकर एक करोड़ तक खर्च कर सकता है। खर्च सीमा की आजादी के कारण पंच और सरपंच चुनाव भी मंहगा हो गया है। कई गांवों में सरपंच का चुनाव मतलब 10 लाख रुपए खर्च तय है। चुनाव में बिना प्रलोभन के खासकर पंचायत चुनाव में प्रत्याशियों की जितने की उम्मीद कम ही रहती है। यही कारण है कि पंचायत चुनाव में लोग खुले हाथ से खर्चकर अपने पक्ष में मतदान के लिए मतदाताओं को प्रभावित करते हैं।

जिला और जनपद स्तर पर अलग-अलग ग्रुप
आगामी 28 व 31 जनवरी और 3 फरवरी को तीन चरणों में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के प्रत्याशी क्षेत्रों में प्रचार में पसीना बहा रहे हैं। प्रत्याशियों द्वारा गांवों में बैठक लेकर तथा विभिन्न समाज प्रमुखों से मुलाकात कर समर्थन मांग रहे हैं। इसके अलावा प्रत्याशी सोशल मीडिया वाट्सऐप और फेसबुक में भी प्रचार प्रसार के लिएसक्रिय है। प्रत्याशी कार्यकर्ताओं के साथ अपने-अपने क्षेत्र का ग्रुप बनाकर फोटो और चुनाव चिन्ह के साथ अपना प्रचार कर रहे हैं।

[MORE_ADVERTISE1]