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ये है CG की अनोखी अंधकार कला मंडली, इसका हर सदस्य है नेत्रहीन, छत्तीसगढ़ी लोकगीतों की सड़क पर सजाते हैं महफिल

Dakshi Sahu

Publish: Nov 11, 2019 11:53 AM | Updated: Nov 11, 2019 11:53 AM

Balod

प्रदेश में ऐसी कला मंडली है जिनके नेत्रहीन सदस्यों के वाद्ययंत्रों के साथ परंपरागत गीत सुनकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो जाता है। राह चलते लोग सुमधुर गीत सुनकर आवाज की ओर खींचे चले आते हैं।

बालोद. प्रदेश में ऐसी कला मंडली है जिनके नेत्रहीन सदस्यों के वाद्ययंत्रों के साथ परंपरागत गीत सुनकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो जाता है। राह चलते लोग सुमधुर गीत सुनकर आवाज की ओर खींचे चले आते हैं। बुजुर्ग कलाकार के रगों में सिर्फ छत्तीसगढ़ की संस्कृति और लोकगीत बसी हुई है। 6 6 की उम्र में भी नेत्रहीन कलाकार प्रदेशभर में घूम-घूमकर छत्तीसगढ़ी लोकगीत, भजनों को गाकर मंत्रमुग्ध कर देते हैं। इसके माध्यम से वे लोगों को छत्तीसगढ़ की संस्कृति को बचाने का संदेश देते हैं।मंडली के सदस्यों के नेत्रहीन होने की वजह से इसका नाम भी अंधकार संगीत समिति रखा गया है। जिला मुख्यालय के घड़ी चौक के पास इन कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी तो उन्हें सुनने लोगों की भीड़ लग गई। (Balod news)

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नेत्रहीन सदस्यों के पास है छत्तीसगढ़ी गीतों का संग्रह
बेमेतरा जिले के ग्राम जांता की अंधकार संगीत समिति के कलाकार के तीनों सदस्य नेत्रहीन हैं। नेत्रहीन कलाकार श्यामलाल गंजी मास्टर ने अपने वाद्ययंत्रों के साथ गीतों की प्रस्तुति दी, तो लोग उनकी ओर खींचते चले गए। वहां जाकर सभी ने इन कलाकारों को देखते ही रह गए। धातु की गंजी को बजाकर गाना पेश करते हैं। इस वजह से उसे गंजी मास्टर कहा जाता है। उन्होंने बताया वह विगत 25 वर्षों से इस तरह की प्रस्तुति दे रहे हैं। जब इन्होंने गीतों की प्रस्तुति शुरू की तो लोगों की भीड़ लग गई।

न भूलें अपनी संस्कृति और लोकगीत
संस्था के प्रमुख श्यामलाल ने बताया कि आज भले ही लोग कितने भी आधुनिक हो जाएं, पर आधुनिकता की आड़ में अपनी संस्कृति व लोक गीतों को नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने बताया कि 25 सालों से छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों सहित अन्य राज्यों में भी छत्तीसगढ़ी गीतों की प्रस्तुति देते है। वे एक हजार से ज्यादा गीत भी लिख चुके हैं। उन्होंने चिंता जताई कि भौतिक युग में फूहड़ता के चंगुल में युवा फंसते जा रहे हैं। फूहड़ गीत हमारी भारतीय संस्कृति को बर्बाद कर रही है, इससे हमें बचना होगा।

संस्था के सभी सदस्य हैं नेत्रहीन
अंधकार संगीत संस्था में पांच सदस्य हैं, जिसमें गंजी मास्टर श्यामलाल के साथ उमा गंधर्व, रघुवर, भगवान दास व केजूराम शामिल हैं। गीत-संगीत की प्रस्तुति के दौरान जिनको अच्छा लगता है वे इच्छा अनुसार पैसे देते हैं। उन्हीं राशि से ये कलाकार अपना जीवन-यापन करते है। उनका कहना है संगीत ही जीवन का बड़ा आधार है। बस इसमें डूबने की जरूरत है।

शासन ने नहीं ली सुध
सालों से छत्तीसगढ़ की संस्कृति व लोकगीतों को बचाने का प्रयास करने वाले नेत्रहीन कलाकारों की सुध शासन-प्रशासन ने नहीं ली है। इन लोगों को आज तक छत्तीसगढ़ की संस्कृति बचाने के प्रयास के लिए शासन से कोई सहायता नहीं मिली और न ही कोई सुविधा। राज्य उत्सव के कार्यक्रमों में बड़े-बड़े कलाकार बाहर से बुलाए जाते हैं पर जमीनी कलाकारों की उपेक्षा कर दी जाती है।

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