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डुंडेरा स्कूल में राष्ट्रगान के साथ राजगीत अरपा पैरी के धार की सामूहिक गायन के साथ हो रही पढ़ाई

Chandra Kishor Deshmukh

Publish: Nov 12, 2019 08:12 AM | Updated: Nov 12, 2019 00:21 AM

Balod

छत्तीसगढ़ के लोक गीत अरपा पैरी के धार को राजगीत का दर्जा देने के बाद यह गीत अब स्कूलों में भी गूंजने लगा है। इस गीत को प्रार्थना गीत के रूप में ही गाने के बाद ही पढ़ाई शुरू होती है।

बालोद @ patrika . छत्तीसगढ़ के लोक गीत अरपा पैरी के धार को राजगीत का दर्जा देने के बाद यह गीत अब स्कूलों में भी गूंजने लगा है। इस गीत को प्रार्थना गीत के रूप में ही गाने के बाद ही पढ़ाई शुरू होती है।

शासकीय उच्चतर माध्यमिक स्कूल के प्राचार्य की पहल
गुंडरदेही ब्लॉक के ग्राम डुंडेरा स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में स्कूल के प्राचार्य व शिक्षकों की पहल पर ही सोमवार से राष्ट्र गान के बाद राज गीत अरपा पैरी के धार, महानदी है अपार, इंद्रावती तोर पखारे पइया, जय हो जय हो छत्तीसगढ़ मईया गीत को सभी बच्चे मिलकर एक साथ गाकर ही स्कूल में प्रवेश करते हैं और पढ़ाई शुरू होती है।

राजगीत गायन कराकर बच्चों को दिया जाता है प्रवेश
डुंडेरा स्कूल जिले का पहला स्कूल है, जहां छत्तीसगढ़ का राज गीत का सामूहिक गायन कराकर बच्चों को स्कूल में प्रवेश दिलाया जा रहा है और छत्तीसगढ़ महतारी की जयकारे के साथ ही शिक्षक भी प्रवेश करते हैं।

बच्चों को कंठस्थ हो गया राजगीत
प्राचार्य केके बंजारे ने कहा कि राष्ट्रगान तो चलता ही है। राजगीत का दर्जा मिलने के बाद इस गीत को भी प्रार्थना के तौर पर गायन कराया जाता है। इस प्रयोग से बच्चों को राज्य का राजगीत पूरी तरह कंठस्थ हो गया है। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों को अपने राजगीत की पहचान व उसे कंठस्थ करना है। विद्यार्थियों को इस गीत को कंठस्थ कराने में सप्ताहभर का समय लग गया।

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